जब स्वामी विवेकानंद के इस एक बयान से पंडितों के छूट गए थे पसीने

Samachar Jagat | Saturday, 12 Jan 2019 01:26:22 PM
Swami Vivekananda's Birthday is celebrated as National Youth Day

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इंटरनेट डेस्क। स्वामी विवेकानन्द का जन्म 12 जनवरी सन् 1863 में कलकत्ता के एक कायस्थ परिवार में हुआ था। उनका बचपन का नाम नरेंद्र था और बचपन से ही स्वामी विवेकानंद की तीक्ष्ण बुद्धि के सभी कायल थे, उन्होंने जब शिकागो में विश्व धर्म महासभा में भारत की ओर से सनातन धर्म का प्रतिनिधित्व किया तो पूरे विश्व में सनातन धर्म का डंका बज गया। अमेरिका और यूरोप के हर एक देश में भारत का आध्यात्मिकता से परिपूर्ण वेदान्त दर्शन स्वामी विवेकानन्द की वक्तृता के कारण ही पहुंचा। उन्होंने रामकृष्ण मिशन की स्थापना की थी जो आज भी अपना काम कर रहा है। 


विवेकानंद ने अमेरिका, इंग्लैंड और यूरोप जैसे देशों में हिंदू दर्शन के सिद्धांतों का प्रसार किया। उन्होंने सैकड़ों सार्वजनिक और निजी व्याख्यानों का आयोजन किया, जिससे भारतीय संस्कृति का प्रचार—प्रसार हो सके। विवेकानंद को एक देशभक्त संत के रूप में माना जाता है और इनके जन्मदिन को राष्ट्रीय युवा दिवस के रूप में मनाया जाता है। स्वामी विवेकानंद संत के साथ ही एक अच्छे वक्ता, विचारक, लेखक और मानव-प्रेमी भी थे। वे सदा अपने को गरीबों का सेवक कहते थे। भारत के गौरव को देश-देशान्तरों में उज्ज्वल करने का उन्होंने सदा प्रयत्न किया। उन्होंने धर्म को मनुष्य की सेवा के केन्द्र में रखकर ही आध्यात्मिक चिंतन किया। इसी कारण उन्होंने एक ऐसा बयान दिया था जो विवादों में घिर गया था। 

आपको बता दें कि उन्होंने यह विद्रोही बयान दिया था कि इस देश के तैंतीस करोड़ भूखे, दरिद्र और कुपोषण के शिकार लोगों को देवी देवताओं की तरह मंदिरों में स्थापित कर दिया जाए और मंदिरों से देवी देवताओं की मूर्तियों को हटा दिया जाए। उनके इस आह्वान को सुनकर पूरे पुरोहित वर्ग के पसीने छूट गए थे। उन्होंने पुरोहितवाद, ब्राह्मणवाद, धार्मिक कर्मकाण्ड और रूढ़ियों की खिल्ली उड़ाई और आक्रमणकारी भाषा में ऐसी विसंगतियों के खिलाफ युद्ध भी किया। 

विवेकानंद के ओजस्वी और सारगर्भित व्याख्यानों की प्रसिद्धि विश्व भर में है। 4 जुलाई 1902 को ऐसी महान प्रतिभा ने इस दुनिया को अलविदा कह दिया। उन्तालीस वर्ष के संक्षिप्त जीवनकाल में स्वामी विवेकानन्द जो काम कर गये वे आने वाली अनेक शताब्दियों तक पीढ़ियों का मार्गदर्शन करते रहेंगे।

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