14 दिसंबर : बस एक क्लिक में पढ़िए, दिनभर की 10 बड़ी खबरें

Samachar Jagat | Friday, 14 Dec 2018 05:31:31 PM
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एक बार फिर चल गया जादूगर का जादू, गहलोत होंगे मुख्यमंत्री, तो पायलट बनेंगे उप मुख्यमंत्री 

CM for third time Ashok Gehlot

काफी माथा पच्ची के बाद राजस्थान के नए मुख्यमंत्री के नाम का ऐलान हो ही गया। कांग्रेस आलाकमान ने मुख्यमंत्री पद के लिए अशोक गहलोत के नाम की घोषणा की। गहलोत तीसरी बार सीएम बन ही गए। वहीं उप मुख्यमंत्री सचिन पायलट को बनाया गया।

वे उप मुख्यमंत्री रहते हुए राजस्थान कांग्रेस प्रदेशाध्यक्ष का पद भी संभालते रहेंगे। आपको बता दें कि बुधवार से बैठकों का दौर शुरू था, सचिन पायलट सीएम बनने के लिए अडे हुए थे, आखिर सचिन पायलट की सहमति से आलाकमान ने अशोक गहलोत को फिर से सीएम पद के नाम का ताज पहना ही दिया।

अशोक गहलोत की जीवनी
गहलोत का जन्म  3 मई 1951 को जोधपुर राजस्थालन में हुआ। स्व. श्री लक्ष्मण सिंह गहलोत के घर जन्मे अशोक गहलोत ने विज्ञान और कानून में स्नानतक डिग्री प्राप्त की और अर्थशास्त्र विषय लेकर स्नाीतकोत्तमर डिग्री प्राप्त‍ की। गहलोत का विवाह 27 नवम्बर, 1977 को श्रीमती सुनीता गहलोत के साथ हुआ उनके एक पुत्र वैभव गहलोत और एक पुत्री सोनिया गहलोत हैं। अशोक गहलोत एक जमाने में जादूगर रह चुके हैं और उन्हें घूमना-फिरना पसन्द हैं। 

तीसरी बार बने मुख्यमंत्री
मुख्यमंत्री : राजस्थान के 23 वें (13 दिसम्बर 2008 – 12 दिसम्बर 2013),राजस्थान के 21 वें मुख्यमंत्री (1 दिसम्बर 1998 – 8 दिसम्बर 2003)

विधार्थी जीवन से हैं गहलोत राजनीति में सक्रिय
अशोक गहलोत विद्यार्थी जीवन से ही राजनीति और समाजसेवा में सक्रिय रहे गहलोत 7वीं लोकसभा (1980-84) के लिए वर्ष 1980 में पहली बार जोधपुर संसदीय क्षेत्र से निर्वाचित हुए। 

-उन्होंने जोधपुर संसदीय क्षेत्र का 8वीं लोकसभा (1984-1989), 10वीं लोकसभा (1991-96), 11वीं लोकसभा (1996-98) तथा 12वीं लोकसभा (1998-1999) में प्रतिनिधित्व- किया।

-सरदारपुरा (जोधपुर) विधानसभा क्षेत्र से निर्वाचित होने के बाद गहलोत फरवरी, 1999 में 11वीं राजस्थान विधानसभा के सदस्य बने। 

-गहलोत फिर से इसी विधानसभा क्षेत्र से 12वीं राजस्थान विधानसभा के लिए 4 दिसंबर 2003 को निर्वाचित हुए और 13वीं राजस्थान विधानसभा के लिए 8 दिसंबर 2008 को सरदारपुरा विधानसभा क्षेत्र से ही फिर से निर्वाचित हुए।

राफेल सौदे में सभी याचिकाएं खारिज, मोदी सरकार को मिली सुप्रीम कोर्ट से बड़ी राहत

Rafael dismisses all petitions in deal, big relief to Modi government

नई दिल्ली। राफेल लड़ाकू विमान की खरीद में कथित घोटाले को लेकर लगातार निशाने पर रही मोदी सरकार को उच्चतम न्यायालय से शुक्रवार को उस वक्त बड़ी राहत मिली, जब इसने सभी छह याचिकाएं खारिज कर दी। मुख्य न्यायाधीश रंजन गोगोई की अध्यक्षता वाली खंडपीठ ने सौदे की प्रक्रिया की वैधता को चुनौती देने वाली सभी छह याचिकाएं यह कहते हुए खारिज कर दी कि उसे सौदे में कोई अनियमितता नजर नहीं आई।

शीर्ष अदालत ने राफेल लड़ाकू विमान को देश की जरूरत बताते हुए याचिकाएं ठुकराईं। न्यायमूर्ति गोगोई ने फैसला सुनते हुए कहा कि सितंबर 2016 में जब राफेल सौदे को अंतिम रूप दिया गया था, उस वक्त किसी ने खरीद प्रक्रिया पर सवाल नहीं उठाये थे। उन्होंने कहा कि हमें फ्रांस से 36 राफेल विमानों की खरीद की प्रक्रिया में हस्तक्षेप करने का कोई कारण नजर नहीं आता है।

न्यायालय ने कहा के राफेल लड़ाकू विमानों की कीमत पर निर्णय लेना अदालत का काम नहीं है। शीर्ष अदालत ने माना कि भारतीय वायुसेना में राफेल की तरह के चौथी और पांचवीं पीढ़ी के लड़ाकू विमानों को शामिल करने की जरूरत है। पीठ ने कहा कि देश को चौथी एवं पांचवी पीढ़ी लड़ाकू विमानों की जरूरत है, जो हमारे पास नहीं है और देश लड़ाकू विमानों के बगैर नहीं रह सकता।

न्यायालय ने कहा कि उसे राफेल खरीद सौदे में निर्णय लेने की प्रक्रिया पर संदेह करने का कोई कारण नजर नहीं आता। संयुक्त प्रगतिशील गठबंधन (संप्रग) के शासन काल में 126 लड़ाकू विमान खरीदे जाने के बजाय मोदी सरकार द्बारा केवल 36 लड़ाकू विमान खरीदे जाने को लेकर उठाये गये सवालों पर न्यायालय ने कहा कि वह सरकार को 126 या 36 विमान खरीदने के लिए बाध्य नहीं कर सकता। 

विमान की कीमतों के मुद्दे पर न्यायालय ने कहा कि राफेल लड़ाकू विमानों की कीमत पर निर्णय लेना अदालत का काम नहीं है। खंडपीठ ने कहा​ कि हमें फ्रांस से 36 राफेल विमानों की खरीद की प्रक्रिया में हस्तक्षेप करने का कोई कारण नजर नहीं आता है। न्यायालय ने सरकार को सौदे की प्रक्रिया में क्लीन चिट देते हुए कहा कि विमानों की खरीद को लेकर भी वह दबाव नहीं बना सकता।

ऑफसेट पार्टनर के मामले में मुख्य न्यायाधीश ने कहा कि पसंद का ऑफसेट पार्टनर चुने जाने में हस्तक्षेप करने का कोई कारण नहीं है, साथ ही व्यक्तिगत सोच के आधार पर रक्षा खरीद जैसे संवेदनशील मामलों में जांच नहीं करवाई जा सकती। न्यायमूर्ति गोगोई ने यह भी कहा कि फैसला लिखते वक्त पीठ ने राष्ट्रीय सुरक्षा और सौदे के नियम कायदे दोनों का ध्यान रखा है। उन्होंने कहा कि हमें ऐसी कोई सामग्री नहीं मिली, जिससे लगे कि व्यावसायिक तरीके से किसी खास कंपनी को लाभ दिया गया। हम इस बात से संतुष्ट हैं कि प्रक्रिया पर संदेह करने का अवसर नहीं है।

पेशे से वकील मनोहर लाल शर्मा ने सबसे पहले राफेल सौदे में कथित अनियमितताओं की एसआईटी जांच को लेकर जनहित याचिका दायर की थी, उसके बाद जाने माने वकील प्रशांत भूषण एवं विनीत ढांडा, पूर्व केंद्रीय मंत्री अरुण शौरी एवं यशवंत सिन्हा तथा आम आदमी पार्टी (आप) के राज्यसभा सांसद संजय सिह ने याचिकाएं दायर की थी।

महिलाओं के खिलाफ भेदभाव में सामाजिक मानक जिम्मेदार: यूनीसेफ

Social Standards Responsible in Discrimination Against Women: UNICEF

नयी दिल्ली। यूनिसेफ का मानना है कि भारत में महिलाओं के खिलाफ होने वाले भेदभाव से देश का विकास प्रभावित हो रहा है और इसके लिए देश में ’गहरी जड़ पकड़े सामाजिक मानकों’’ में सुधार करना होगा। उपकार्यकारी निदेशक उमर आब्दी ने कहा, ‘‘कुछ ऐसे सामाजिक मुद्दे हैं जिनका हल हमें शिक्षा और सरकारी नीतियों जैसे प्रत्यक्ष हस्तांरण योजना से निकालना होगा। 

उन्होंने बिहार के पटना में चिल्ड्रन्स क्लीनिक का उदाहरण देते हुये कहा कि ऐसा पाया गया कि परिवार बालिकाओं को इलाज के लिये नहीं लाते हैं जो दर्शाता है कि उन्हें ‘वित्तीय बोझ’ मानने का मुद्दा है जिसकी वजह से माता-पिता उन्हें उपचार के लिये नहीं लाते हैं। उन्होंने कहा कि बच्चे पर शुरू से ही उसके विकास पर ध्यान देना होगा और यह भलग आधारित भेदभाव को कम करने में मदद कर सकता है। इसे अर्ली चाइल्डहुड डेवलपमेंट (ईसीडी) भी कहा जाता है। 

आब्दी ने कहा, ‘‘समाज में ऐसा कुछ भीतर तक पैठ बनाए हुए है जिसके कारण समाज लडक़ों की तुलना में लड़कियों को कम तरजीह देता है और इससे बाहर निकलने में समय लगेगा। इसके लिए जरूरी है उनके मांबाप को ठीक से समझाया जाए। 

उन्होंने कहा शुरूआती एक हजार दिन बच्चे के लिए बहुत जरूरी होते हैं, इससे न केवल उसकी उत्तरजीविता सुनिश्चित होती है बल्कि यह भी तय होता है कि बच्चे का संपूर्ण विकास हो सके, जिसमें न केवल उसका शारीरिक विकास शामिल है अपितु मानसिक विकास भी इससे गिना जाता है। उन्होंने जोर देते हुये कहा कि ईसीडी कार्यक्रम को स्वास्थ्य कार्यकर्ताओं के मध्य प्रसारित करना होगा। 

सीनेट ने खगोशी की मृत्यु के लिए प्रिंस सलमान को ठहराया जिम्मेदार

Senate upholds Prince Salman for death

शिंगटन।  अमेरिकी सीनेट ने पत्रकार जमाल खगोशी की मृत्यु के लिए सऊदी अरब के प्रिंस मोहम्मद बिन सलमान को ‘जिम्मेदार’ ठहराते हुए उनके नाम से गुरुवार को एक प्रस्ताव पास किया। कांग्रेस की ऊपरी प्रतिनिधि सभा (सीनेट) में इस प्रस्ताव को गुरुवार को सुबह में पेश किया गया, जिसे सीनेट ने अपराह्न में ध्वनी मत से पास कर दिया। अब इस प्रस्ताव को कांग्रेस की निचली प्रतिनिधि सभा यानी हाउस ऑफ रिप्रेसेंटेटिव में पेश किया जाएगा। 

रोहिंग्या संकट ‘नरसंहार’ के समान: अमेरिका

Rohingya crisis is similar to 'massacre': America

वाशिंगटन। अमेरिकी प्रतिनिधि सभा ने एक प्रस्ताव पारित कर म्यांमार सेना के रोहिंग्या अल्पसंख्यकों के खिलाफ चलाये गये अभियान को ‘नरसंहार’ बताते हुए विदेश मंत्री माइक पोम्पिओ से इस मामले में उचित कदम उठाने का आग्रह किया है। प्रतिनिधि सभा में गुरुवार को पारित प्रस्ताव का डेमोक्रेट और रिपब्लिकन दोनों पार्टियों के 394 सांसदों ने समर्थन किया जबकि एक रिपब्लिकन सांसद ने इसका विरोध किया।

प्रस्ताव के जरिये रोहिंग्या संकट को कवर करने गये दो पत्रकारों की म्यांमार में गिरफ्तारी पर विरोध जताते हुए दोनों की तत्काल रिहाई की मांग की गयी। 
प्रस्ताव में ट्रंप प्रशासन विशेषकर पोम्पिओ से अपील की गयी कि रोहिंग्या को नरसंहार के पीड़ित माना जाए। पाम्पिओ ने इसे एक ‘जातीय नरसंहार’ कहा लेकिन इस मामले में कोई कानूनी निर्णय लेने से इंकार कर दिया। राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने कभी भी रोहिंग्या संकट को लेकर कोई सार्वजनिक बयान नहीं दिया।

सेवानिवृत हो रहे विदेश संबंध समिति के अध्यक्ष बॉब कॉर्कर के नेतृत्व में पास हुआ प्रस्ताव गैर-बाध्यकारी है, लेकिन यह सीनेट में भप्रस के बारे में रिकॉर्ड पर रखता है, जो अमेरिका और सऊदी अरब के संबंधों को लेकर निराश है। सीनेट में मतदान के बाद कॉर्कर ने कहा अमेरिकी सीनेट ने सर्वसम्मति से कहा है कि भप्रस मोहम्मद बिन सलमान जमाल खगोशी की हत्या के लिए जिम्मेदार हैं, जो एक कड़ा बयान है। मैं समझता हूं कि यह उन मूल्यों से बात करता है जिन्हें हम सबसे ऊपर रखते हैं मुझे खुशी है कि सीनेट इस मुद्दे पर सर्वसम्मति से आवाज उठा रहा है। 

AUS VS IND: भारतीय गेंदबाजों ने रोके बड़े स्कोर की तरफ बढ़ते ऑस्ट्रेलिया के कदम

Australia made 277 runs losing 6 wickets till the end of the day's game

खेल डेस्क। ओपनर मार्कस हैरिस और आरोन फिंच की शतकीय साझेदारी की बदौलत ऑस्ट्रेलियाई टीम की शुरूआत काफी अच्छी रही। लेकिन इसके बाद भारतीय गेेंदबाजों ने भी जबरदस्त वापसी करते हुए ऑस्ट्रेलिया के बड़े स्कोर की तरफ बढ़ते हुए कदको को रोक दिया है। इससे पहले मैदान पर उतरे ऑस्ट्रेलिया के मार्कस हैरिस और आरोन फिंच के बीच ओपनिंग विकेट के लिए 112 रन की शतकीय साझेदारी की बदौलत अच्छी शुरूआत करने वाली टीम ने भारत के खिलाफ दूसरे टेस्ट के पहले दिन शुक्रवार का खेल समाप्त होने तक छह विकेट पर 277 रन बना लिए है।

ऑस्ट्रेलिया ने टॉस जीतकर पहले बल्लेबाजी करने का फैसला किया और चायकाल तक तीन विकेट गंवाकर 148 रन बना लिए थे। हालांकि लंच तक वह 66 रन पर बिना कोई विकेट गंवए ऑस्ट्रेलिया सुखद स्थिति में दिख रही थी। हैरिस तथा फिंच ने टीम को अच्छी शुरूआत दिलाते हुए पहले विकेट के लिए 112 रन की साझेदारी की। लेकिन तेज गेंदबाज जसप्रीत बुमराह ने 36वें ओवर में फिंच को पगबाधा कर इस साझेदारी पर ब्रेक लगा भारत को उसका पहला विकेट दिला दिया। फिंच ने 105 गेंदों में छह चौके लगाकर 50 रन की अर्धशतकीय पारी खेली।

इसके बाद उस्मान ख्वाजा भी सस्ते में अपना विकेट गंवा बैठे। ख्वाजा को उमेश यादव ने विकेटकीपर रिषभ पंत के हाथों कैच कराकर भारत को दूसरा विकेट दिलाया। हालांकि ओपनर मार्कस हैरिस एक छोर पर बने रहे। लेकिन हैरिस भी 141 गेंदों में 10 चौकों की मदद से 70 रन की उपयोगी पारी खेलकर हनुमा विहारी का शिकार बन गए। हनुमा ने अजिंक्या रहाणे के हाथों मार्कस को कैच कराकर चायकाल तक तीसरा विकेट निकाल दिया। मार्कस के बाद पीटर हैंडस्कोम्ब भी कुछ कमाल नहीं दिखा पाए।

हैंडस्कोम्ब भी इशांत शर्मा की गेंद पर विराट कोहली को अपना कैच थमा बैठे। हालांकि इस दौरान एक छोर पर शॉन मार्स टिके रहे। मार्स ने ट्रेविस हैड के साथ मिलकर थोड़ी साझेदारी जरूर की। लेकिन उन्हे भी हनुमा विहारी ने रहाणे के हाथों कैच थमाकर पवेलियन की राह दिखाई। वहीं ट्रेविस हैड को इशांत शर्मा ने मोहम्मद शमी के हाथों कैच थमाकर उन्हे डे्रसिंग रूम में वापस भेजा। हैड ने 80 गेंदों पर 58 रन बनाए। वहीं भारत की और से इशांत शर्मा और हनुमा विहारी ने दो-दो विकेट निकाले तो वहीं उमेश यादव और जसप्रीत बुमराह के हाथ एक-एक सफलता लगी। दिन का खेल समाप्त होने तक ऑस्ट्रेलिया ने छह विकेट खोकर 277 रन बना लिए है। 

अंपायरिंग फैसलों से हारा भारत: हरेंद्र सिंह

India defeats umpiring decisions: Harendra Singh

भुवनेश्वर। घरेलू जमीन पर 43 साल बाद विश्वकप सेमीफाइनल में पहुंचने से चूकी भारतीय पुरूष हॉकी टीम के मुख्य कोच हरेंद्र सिंह ने मेजबान टीम की हॉलैंड के खिलाफ क्वार्टरफाइनल हार के लिये अंपायर के फैसलों को जिम्मेवार ठहराया है।

भारत को कलिंगा स्टेडियम में रोमांचक क्वार्टरफाइनल मुकाबले में 1-2 से शिकस्त झेलनी पड़ी थी। इस हार के बाद कोच ने संवाददाता सम्मेलन में कहा मेरी टीम के 11 लड़ाके विपक्षी टीम के 11 खिलाड़यिों से खेल सकती है लेकिन वह 13 विपक्षियों से नहीं लड़ सकती है।’’ भारतीय पुरूष हॉकी टीम इस हार के कारण 43 वर्ष बाद विश्वकप के सेमीफाइनल में पहुंचने का सपना पूरा नहीं कर सकी। भारत ने आखिरी बार वर्ष 1975 में हॉकी विश्वकप के सेमीफाइनल के लिये क्वालीफाई किया था। 

हरेंद्र ने घरेलू प्रशंसकों से माफी मांगते हुये कहा कि रेफरी की गलतियों और उनके गलत निर्णय भारतीय टीम की हार की बड़ी वजह है। उन्होंने कहा मैं इस बात को आज खुलकर बताना चाहता हूं जो मैंने पहले नहीं की। मैंने एशियन गेम्स में भी अपना विरोध दर्ज नहीं कराया। इन खेलों में मलेशिया के खिलाफ शूटआउट में मेरे कप्तान को गलत तरीके से येलो कार्ड दिया गया था जबकि यह गलत निर्णय था। अंतरराष्ट्रीय हॉकी महासंघ में अंपायरिंग ही एक ऐसी समिति है जो सुधरने के लिये तैयार नहीं है। हमें यकीन है कि यदि इसमें बदलाव नहीं होगा तब तक हमें ऐसे ही परिणाम देखने को मिलेंगे।

कमजोर वैश्विक रुख से शेयर बाजारों में मामूली बढ़त

Minor rise in stock markets by weak global trend

मुंबई। उतार-चढ़ाव भरे कारोबार में शेयर बाजारों में शुक्रवार को हल्की तेजी रही। रिजर्व बैंक के केंद्रीय निदेशक मंडल की महत्वपूर्ण बैठक के चलते निवेशक बाजार से दूर रहे। वैश्विक वृद्धि को लेकर चिंता तथा अमेरिका और चीन के बीच लंबे समय से चल रहे व्यापार युद्ध से जोखिम लेने की क्षमता प्रभावित होने से एशिया के अन्य बाजारों में गिरावट दर्ज की गई।

उतार-चढ़ाव भरे कारोबार में बंबई शेयर बाजार का सेंसेक्स 33.29 अंक या 0.09 प्रतिशत की बढ़त के साथ 35,962.93 अंक पर बंद हुआ। एनएसई निफ्टी भी 13.90 अंक यानी 0.13 प्रतिशत की मामूली बढ़त के साथ 10,805.45 अंक पर बंद हुआ। यह लगातार चौथा सत्र है जब सूचकंाक में तेजी रही। आरबीआई निदेशक मंडल की बैठक शुक्रवार सुबह शुरू हुई।

यह बैठक केंद्रीय बैंक के लिये नई आर्थिक पूंजी रूपरेखा (ईसीएफ) तथा कम-से-कम कुछ बैंकों के लिए तत्काल सुधारात्मक कार्रवाई (पीसीए) नियमों में ढील जैसे जटिल मुद्दों पर चर्चा के लिए हुई है। नव नियुक्त गवर्नर शक्तिकंात दास की अगुवाई में निदेशक मंडल की यह पहली बैठक है। लाभ में रहने वाले प्रमुख शेयरों में भारती एयरटेल, यस बैंक, ओएनजीसी, कोल इंडिया, एनटीपीसी, इन्फोसिस, एशियन पेंट्स, पावर ग्रिड और आईसीआईसीआई बैंक 5.32 प्रतिशत तक मजबूत हुए।

वहीं नुकसान में रहने वाले प्रमुख शेयरों में विप्रो (1.67 प्रतिशत), एचडीएफसी (1.65 प्रतिशत), एल एंड टी (0.79 प्रतिशत) तथा बजाज आटो (0.71 प्रतिशत) शामिल हैं। इस बीच, कारोबार के दौरान डॉलर के मुकाबले रुपया 14 पैसे टूटा। एशियाई बाजारों में कोरिया का कोस्पी 1.25 प्रतिशत, जापान का निक्केई 2.02 प्रतिशत, हांगकांग का हैंग सेंग 1.62 प्रतिशत तथा शंघाई कंपोजिट सूचकांक 1.53 प्रतिशत नीचे आए। यूरोपीय बाजारों में शुरूआती कारोबार में फ्रैंकफर्ट का डीएएक्स 1.46 प्रतिशत तथा पेरिस का सीएसी 1.21 प्रतिशत नीचे आए। लंदन का एफटीएसई भी 1.13 प्रतिशत टूटा।

कृषि ऋण माफी चुनावी वादों का हिस्सा नहीं होना चाहिए: राजन

Agriculture loan waiver should not be part of electoral promises: Rajan

नयी दिल्ली। भारतीय रिजर्व बैंक के पूर्व गवर्नर रघुराम राजन ने शूक्रवार को कहा कि कृषि ऋण माफी जैसे मुद्दों को चुनावी वादा नहीं बनाया जाना चाहिए। उन्होंने इस संबंध में चुनाव आयोग को पत्र लिखा है कि ऐसे मुद्दों को चुनाव अभियान से अलग रखा जाना चाहिये। उन्होंने कहा कि इससे ना केवल कृषि क्षेत्र में निवेश रुकता है, बल्कि उन राज्यों के खजाने पर भी दबाव पड़ता है जो कृषि ऋण माफी को अमल में लाते हैं।

गौरतलब है कि पिछले पांच साल के दौरान राज्यों में होने वाले चुनावों में किसी ना किसी राजनीतिक दल ने कृषि ऋण माफी का वादा किया है। हाल में हुए पांच राज्यों के विधानसभा चुनावों में भी अनाज का न्यूनतम समर्थन मूल्य बढ़ाने और कृषि ऋण माफी कई पार्टियों के घोषणापत्र का हिस्सा रहा है।

राजन ने कहा, ‘‘मैं हमेशा से कहता रहा हूं और यहां तक कि मैंने चुनाव आयुक्त को भी पत्र लिखकर कहा है कि ऐसे मुद्दों को चुनाव अभियान का हिस्सा नहीं होना चाहिए। मेरा कहने का तात्पर्य है कि कृषि क्षेत्र की समस्याओं पर निश्चित रूप से विचार किया जाना चाहिए। लेकिन सवाल यह उठता है कि क्या कृषि ऋण माफ करने से किसानों का भला होने वाला है? क्योंकि किसानों का एक छोटा समूह ही है जो इस तरह का ऋण पाता है।

वह यहां ‘भारत के लिए एक आर्थिक  रणनीति’ रपट जारी करने के मौके पर बोल रहे थे। उन्होंने कहा कृषि ऋण माफी का अक्सर फायदा उन लोगों को मिलता है जिनके बेहतर संपर्क होते हैं ना कि गरीबों को। दूसरा इससे प्राय: उस राज्य की राजकोषीय स्थिति के लिए कई समस्याएं पैदा होती हैं जो इसे लागू करते हैं और मेरा मानना है कि दुर्भाग्यवश इससे कृषि क्षेत्र में निवेश भी घटता है।

राजन ने कहा कि आरबीआई भी बार-बार कहता रहा है कि ऋण माफी से ऋण संस्कृति भ्रष्ट होती है, वहीं केंद्र सरकार और राज्य सरकारों के बजट पर भी दबाव पड़ता है। राजन ने कहा, ‘‘मेरा मानना है कि किसानों को भी उनके हक से कम नहीं मिलना चाहिए। हमें एक ऐसा माहौल बनाने की जरूरत है जहां वह एक सक्रिय कार्यबल बन सकें। इसके लिए निश्चित तौर पर अधिक संसाधनों की जरूरत है, लेकिन क्या ऋण माफी सर्वश्रेष्ठ विकल्प है, मेरे हिसाब से इस पर अभी बहुत विचार करना बाकी है। राजन सितंबर 2016 तक तीन साल के लिए आरबीआई के गवर्नर रहे हैं। इस समय वह शिकागो के बूथ स्कूल ऑफ बिजनेस में अध्यापन कार्य कर रहे हैं।

आलिया भट्ट ने प्रशंसक को आलिया कपूर बुलाने पर दिया ये करारा जवाब 

Alia Bhatt gave this to the fan on the invitation of Aliya Kapoor

मुंबई। बॉलीवुड अभिनेत्री आलिया भट्ट ने प्रशंसक को आलिया कपूर बुलाने पर जवाब दिया है। आलिया भट्ट और रणबीर कपूर के लिकअप की खबरें जोरों पर है। दोनों आने वाली फिल्म 'ब्रह्मास्त्र’ की शूटिग कर रहे हैं। कुछ दिन पहले रणबीर कपूर ने एक मैग्जीन को दिए गए इंटरव्यू में इस बात को माना था कि वह और आलिया एक दूसरे को डेट कर रहे हैं।

आलिया भट्ट के पिता महेश भट्ट ने भी इस बात को माना है कि आलिया-रणबीर एक दूसरे से प्यार करते हैं। महेश भट्ट  ने कहा कि बिलकुल रणबीर-आलिया प्यार में हैं और इतनी सी बात को समझने के लिए किसी को बुद्धिजीवी होने की जरूरत नहीं है। मैं रणबीर को पसंद करता हूं।

वह एक कमाल का लड़का है। ये दोनों अपने रिश्ते को क्या अंजाम देते हैं ये उन दोनों को ही सोचना है। हाल ही में आलिया भट्ट ने अपने फैंस के साथ ट्विटर पर सेशन किया था। इस दौरान आलिया ने अपने फैंस के ढेरों सवालों के जवाब दिए।

इसी बीच जब आलिया के एक फैन ने उनसे पूछा कि क्या वे उन्हें आलिया कपूर कह कर बुला सकता है, तो आलिया ने इसका बड़ा ही बेहतरीन जवाब दिया। आलिया ने अपने इस फैन का जवाब देते हुए लिखा, क्या मैं आपको हिमांशु भट्ट बुला सकती हूं?



 
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