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Samachar Jagat | Sunday, 09 Sep 2018 04:29:03 PM
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Whatsapp के जरिए मुकदमा चलाने पर सुप्रीम कोर्ट ने कहा, 'क्या यह मजाक है'

On being prosecuted through Whatsapp, the Supreme Court said,

नई दिल्ली। क्या आपने आपराधिक मामले में इंस्टैंट मैसेजिंग ऐप व्हाट्स ऐप के जरिए मुकदमा चलाते सुना है। यह विचित्र कितु सत्य है। यह विचित्र मामला सुप्रीम कोर्ट में पहुंच गया है, जिसने इस बात पर आश्चर्य जताते हुए कहा कि भारत की किसी अदालत में इस तरह के 'मजाक’ की कैसे अनुमति दी गई। मामला झारखंड के पूर्व मंत्री और उनकी विधायक पत्नी से संबंधित है। यह वाकया हजारीबाग की एक अदालत में देखने को मिला, जहां न्यायाधीश ने व्हाट्स ऐप कॉल के जरिये आरोप तय करने का आदेश देकर इन आरोपियों को मुकदमे का सामना करने को कहा।

झारखंड के पूर्व मंत्री योगेंद्र साव और उनकी पत्नी निर्मला देवी 2016 के दंगा मामले में आरोपी हैं। उन्हें शीर्ष अदालत ने पिछले साल जमानत दी थी। उसने यह शर्त लगाई थी कि वे भोपाल में रहेंगे और अदालती कार्यवाही में हिस्सा लेने के अतिरिक्त झारखंड में प्रवेश नहीं करेंगे। हालांकि, आरोपियों ने अब शीर्ष अदालत से कहा है कि आपत्ति जताने के बावजूद निचली अदालत के न्यायाधीश ने 19 अप्रैल को व्हाट्स ऐप कॉल के जरिए उनके खिलाफ आरोप तय किया।

न्यायमूर्ति एस ए बोबडे और न्यायमूर्ति एल एन राव की पीठ ने इस दलील को गंभीरता से लेते हुए कहा, ''झारखंड में क्या हो रहा है। इस प्रक्रिया की अनुमति नहीं दी जा सकती है और हम न्याय प्रशासन की बदनामी की अनुमति नहीं दे सकते।’’ पीठ ने झारखंड सरकार की ओर से उपस्थित वकील से कहा, ''हम यहां व्हाट्स ऐप के जरिये मुकदमा चलाए जाने की राह पर हैं। इसे नहीं किया जा सकता। यह किस तरह का मुकदमा है। क्या यह मजाक है।’’

पीठ ने दोनों आरोपियों की याचिका पर झारखंड सरकार को नोटिस जारी किया और दो सप्ताह के भीतर राज्य से इसका जवाब देने को कहा। आरोपियों ने अपने मामले को हजारीबाग से नयी दिल्ली स्थानांतरित करने की मांग की है।     झारखंड के वकील ने शीर्ष अदालत से कहा कि साव जमानत की शर्तों का उल्लंघन कर रहे हैं और ज्यादातर समय भोपाल से बाहर रहे हैं, जिसकी वजह से मुकदमे की सुनवाई विलंबित हो रही है।

इसपर पीठ ने कहा, ''वह अलग बात है। अगर आपको आरोपी के जमानत की शर्तों का उल्लंघन करने से समस्या है तो आप जमानत रद्द करने के लिये अलग आवेदन दे सकते हैं। हम साफ करते हैं कि जमानत की शर्तों का उल्लंघन करने वाले लोगों से हमें कोई सहानुभूति नहीं है।’’ दंपति की ओर से उपस्थित वरिष्ठ अधिवक्ता विवेक तन्खा ने कहा कि आरोपी को 15 दिसंबर 2017 को शीर्ष अदालत ने जमानत दी थी और उन्हें जमानत की शर्तों के तहत मध्य प्रदेश के भोपाल में रहने का निर्देश दिया गया था। उन्होंने कहा, ''मुकदमा भोपाल में जिला अदालत और झारखंड में हजारीबाग की जिला अदालत से वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए चलाने का निर्देश दिया गया था।’’

तन्खा ने कहा कि भोपाल और हजारीबाग जिला अदालतों में ज्यादातर समय वीडियो कॉन्फ्रेंसिग संपर्क बहुत खराब रहता है और निचली अदालत के न्यायाधीश ने 'व्हाट्स ऐप’ कॉल के जरिए 19 अप्रैल को आदेश सुनाया। पीठ ने तन्खा से पूछा कि दोनों आरोपियों के खिलाफ कितने मामले लंबित हैं। तनखा ने बताया कि साव के खिलाफ 21 मामले जबकि उनकी पत्नी के खिलाफ नौ मामले लंबित हैं। उन्होंने कहा, ''दोनों नेता हैं और राष्ट्रीय ताप विद्युत निगम (एनटीपीसी) द्वारा भूमि अधिग्रहण किए जाने के खिलाफ विभिन्न प्रदर्शनों का नेतृत्व किया है और इनमें से ज्यादातर मामले उन आंदोलनों से जुड़े हैं।’’

तन्खा ने कहा कि चूंकि दोनों ये मामले दायर करने के समय विधायक थे इसलिए उनके खिलाफ इन मामलों में मुकदमा दिल्ली की विशेष अदालत में अंतरित किया जाना चाहिए, जो नेताओं से संबंधित मामलों पर विशेष तौर पर विचार कर रही है। साव और उनकी पत्नी 2016 में ग्रामीणों और पुलिस के बीच हिसक झड़प से संबंधित मामले में आरोपी हैं। इसमें चार लोग मारे गए थे। साव अगस्त 2013 में हेमंत सोरेन सरकार में मंत्री बने थे।

थम नहीं रहे बिहार में महिलाओं के खिलाफ अपराध, इस वर्ष छमाही के आंकड़े कर देंगे हैरान!

Crime against women in Bihar

पटना। बिहार में महिलाओं के साथ बलात्कार, छेडछाड़, अपहरण, दहेज के लिए हत्या एवं प्रताड़ना के मामलों में वृद्धि देखी गई है। पिछले बरस हर दिन जहां बलात्कार की तीन से ज्यादा घटनाएं हुईं, वहीं अपहरण के 18 से ज्यादा मामले हर रोज दर्ज किए गए। इस वर्ष की पहली छमाही के आंकड़े भी कुछ ऐसे ही हैं।

राज्य के पुलिस मुख्यालय से मिली जानकारी के मुताबिक, वर्ष 2017 के दौरान प्रदेश में महिला अपराध से जुड़े कुल 15,784 मामले प्रकाश में आए। इनमें बलात्कार के 1199, अपहरण के 6817, दहेज हत्या के 1081, दहेज प्रताड़ना के 4873 और छेड़खानी के 1814 मामले शामिल हैं। वर्ष 2018 के जून तक बिहार में महिला अपराध के कुल 7683 मामले प्रकाश में आए। इनमें बलात्कार के 682, अपहरण के 2390, दहेज हत्या के 575, दहेज प्रताड़ना के 1535, छेड़खानी के 890 और महिला प्रताड़ना के 1611 मामले शामिल हैं।

मुंबई स्थित टाटा इंस्टीट्यूट ऑफ सोशल साईंस द्बारा गत 27 अप्रैल को सौंपी गयी सामाजिक अंकेक्षण रिपोर्ट के आधार पर मुजफ्फरपुर जिला स्थित एक बालिका गृह में 34 लड़कियों के यौन शोषण का मामला सामने आया। 

वैशाली जिले के एक अल्पावास गृह में महिलाओं के यौन उत्पीड़न का मामला प्रकाश में आया। गत 20 अगस्त को भोजपुर जिले के बिहिया थाना क्षेत्र में एक युवक की हत्या के संदेह में एक महिला को कथित तौर पर निर्वस्त्र कर घुमाया गया। बिहार के कैमूर, जहानाबाद, नालंदा, सहरसा, दरभंगा आदि जिलों में लड़कियों के साथ छेड़खानी के वीडियो वायरल होने, अश्लील फोटो एवं वीडियो अपलोड करने के मामले भी सामने आए।

 बहरहाल, राज्य सरकार ने प्रदेश में महिलाओं के सशक्तिकरण के लिए उन्हें पंचायती राज संस्थानों और स्थानीय निकाय चुनाव में 50 फीसदी आरक्षण, शिक्षकों की नियुक्ति में आधी सीटें महिलाओं के लिए आरक्षित करने, पुलिस सहित अन्य नौकरियों में 35 प्रतिशत का आरक्षण, बाल विवाह और दहेज प्रथा के खिलाफ अभियान छेड़ने के सहित कई कदम उठाए हैं। 

महिलाओं को स्वावलंबी बनाने के लिए उन्हें रोजगारोन्मुखी प्रशिक्षण देने तथा तकनीकी शिक्षा पर भी जोर दिया जा रहा है। 

अल्पसंख्यक कल्याण मंत्री मुख्तार अब्बास नकवी बोले, कहा - भ्रष्टाचार का डूबता जहाज है कांग्रेस

Congress is sinking of corruption

इलाहाबाद। कांग्रेस को भ्रष्टाचार का डूबता हुआ जहाज करार देते हुए केंद्रीय अल्पसंख्यक कल्याण मंत्री मुख्तार अब्बास नकवी को कहा कि इसकी सवारी करने वाले राजनीतिक दलों का डूबना तय है। नकवी ने शनिवार देर शाम यहां पत्रकारों से कहा कि कांग्रेस पार्टी भ्रष्टाचार का डूबता हुआ ऐसा क्रूज है जिस पर कोई भी बैठेगा, डूबेगा। उत्तर प्रदेश में समाजवादी पार्टी (सपा) इस करप्शन क्रूज पर बैठ गयी थी, उसका क्या हाल हुआ, सर्वविदित है। पश्चिम बंगाल में वामपंथी दल इस क्रूज पर सवारी करने लगे थे, उनका क्या हश्र हुआ।

कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी की कैलाश मानसरोवर यात्रा पर तंज कसते हुये उन्होने कहा कि जो लोग सियासी पाखण्ड करके देश के विकास में पलीता लगाने का संकल्प लेकर काम कर रहे हैं उनको कभी सफलता नहीं मिलेगी। कांग्रेस पार्टी राजनीतिक पाखण्ड का पर्यायवाची बन गयी है। कांग्रेस के शासनकाल में मंहगाई दर 11 फीसदी से अधिक थी।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने सत्ता संभालने के बाद नाकामयाबियों के निशान को मिटाते हुए कामयाबी के कदम आगे बढाए और उस 11 फीसदी से अधिक मंहगाई दर को चार प्रतिशत के आस-पास लाकर खड़ा कर दिया। नकवी ने स्वीकार किया कि अन्तर्राष्ट्रीय समेत अन्य कारणों से मंहगाई दर में इजाफा हुआ है हालांकि इसे जल्द ही नियंत्रित कर लिया जायेगा। 

मंहगाई, बेरोजगारी और राफेल घोटाले को लेकर 10 सितम्बर को कांग्रेस के भारत बन्द के सवाल पर उन्होंने कहा कि दुनिया के तमाम देशों को पछाड़ते हुए भारत की मजबूत होती अर्थव्यवस्था के बीच इस बंद का कोई औचित्य नही है। 

रूस में स्थानीय चुनाव रविवार को, विपक्ष ने पेंशन सुधारों के खिलाफ प्रदर्शन का किया आह्वान

Russia's local election Sunday, opposition calls for demonstration against pension reforms

मॉस्को। रूस में रविवार को हो रहे स्थानीय चुनाव में क्रेमलिन के वफादार उम्मीदवार का दबदबा रहने की संभावना है। वहीं दूसरी ओर जेल में बंद विपक्ष के नेता ने देश में हुए अलोकप्रिय पेंशन सुधारों के खिलाफ प्रदर्शन का आह्वान किया है। मॉस्को के मेयर पद का चुनाव सबसे हाई-प्रोफाइल होता है लेकिन इस बार सभी गंभीर प्रतिद्बंद्बी उम्मीदवारों को चुनाव से बाहर कर दिया गया है। चुनाव में निवर्तमान सेरगी सोब्यानिन को जीत मिलने की पूरी संभावना है।  

गौरतलब है कि इस वर्ष मार्च में हुए राष्ट्रपति चुनाव में व्लादिमिर पुतिन ने बेहद आसानी से जीत दर्ज करते हुए बतौर राष्ट्रपति अपना चौथा कार्यकाल शुरू किया । इन चुनावों में पुतिन के खिलाफ कोई प्रतिद्बंद्बी नहीं होने के कारण सिर्फ मतदान प्रतिशत ही एकमात्र सस्पेंस था।   

राज्य ने पुतिन के सहयोगी सोब्यानिन को फिर से मॉस्को का मेयर चुने जाने में मदद करने के लिए मतदान केन्द्रों पर उत्सवों और भोजन उत्सवों का आयोजन किया है ताकि बड़ी संख्या में लोग मतदान करने पहुंचें। वहीं दूसरी ओर अवैध प्रदर्शनों के आरोप में करीब एक महीने जेल की सजा काट रहे विपक्ष के नेता एलेक्सी नवाल्नी ने पेंशन सुधारों के विरोध में देश व्यापी प्रदर्शनों का आयोजन किया है।  

वहीं दुसरी और अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के पूर्व सलाहकार को एफबीआई से झूठ बोलने के मामले में शुक्रवार को जेल की सजा दी गई है। उनके रूस से संपर्क की वजह से ही मास्को के साथ संभावित सांठगांठ की जांच शुरू की गई थी।

US Open 2018: नाओमी ओसाका ने सेरेना को हराया, ग्रैंडस्लैम खिताब जीतने वाली पहली जापानी खिलाड़ी बनीं

Naomi Osaka wins US Open title

न्यूयार्क।  नाओमी ओसाका ग्रैंडस्लैम एकल खिताब जीतने वाली पहली जापानी खिलाड़ी बनी जबकि अमेरिकी ओपन फाइनल में उनके हाथों शिकस्त झेलनी वाली उनकी आदर्श सेरेना विलियम्स ने चेयर अंपायर को गुस्से में 'चोर’ करार दिया। बीस साल की ओसाका ने खिताबी मुकाबले में 6-2, 6-4 से जीत दर्ज की। इस दौरान सेरेना को दूसरे सेट में अंपायर कार्लोस रामोस ने बाक्स से कोचिग लेने के कारण चेतावनी दी। रैकेट से फाउल पर सेरेना को जब दूसरी बार आचार संहिता के उल्लंघन की चेतावनी और एक अंक की पेनल्टी दी गई तो यह अमेरिकी खिलाड़ी गुस्से से भड़क गई।

रोते हुए सेरेना ने अंपायर को 'चोर’ करार दिया और गुस्से में इस अधिकारी को माफी मांगने को कहा। सेरेना ने कहा, ''आप मेरे चरित्र पर हमला कर रहे हैं। आप कभी मेरे कोर्ट पर दोबारा नहीं आ पाओगे। आप झूठे हैं।’’ अंपायर रामोस ने इसके बाद नाराज सेरेना को अंपायर संहिता के तीसरे उल्लंघन के लिए एक गेम की पेनल्टी दी जिससे ओसाका दूसरे सेट में 5-3 से आगे और जीत से एक गेम दूर हो गई। तीसरा उल्लंघन अपशब्दों का इस्तेमाल करने पर था।

सेरेना ने अगला गेम जीता लेकिन ओसाका ने अपनी सर्विस बचाकर अपने देश के लिए एतिहासिक जीत दर्ज की। ओसाका ने मैच के बाद कहा, ''अब भी लग ही नहीं रहा कि वास्तव में ऐसा हो गया है। शायद कुछ दिनों में मुझे अहसास होगा कि मैंने क्या किया है।’’ पेनल्टी के जरिए एक गेम मिलने पर ओसाका ने कहा, ''जब सब कुछ हुआ तो स्कोर 5-3 था इसलिए मैं थोड़ी भ्रम में थी।’’

उन्होंने कहा, ''मुझे लगा कि मुझे अपना ध्यान केंद्रित रखना होगा। वह चैंपियन खिलाड़ी है इसलिए मुझे पता है कि वह किसी भी अंक के समय वापसी कर सकती है।’’ सेरेना एक सितंबर 2017 को अपनी बेटी ओलंपिया के जन्म के बाद से पहले ग्रैंडस्लैम खिताब की तलाश में हैं। ओसाका ने सेरेना को 24वें ग्रैंडस्लैम खिताब से वंचित किया जिससे वह मारग्रेट कोर्ट के 24 ग्रैंडस्लैम खिताब के सर्वकालिक रिकार्ड की बराबरी कर लेती।

निचले क्रम की बल्लेबाजी को लेकर जसप्रीत बुमराह ने दिया ये बड़ा बयान

Could not implement the plan against lower-order batsmen: Bumrah

लंदन। भारत के तेज गेंदबाज जसप्रीत बुमराह का मानना है कि एक अतिरिक्त गेंदबाज बाकी गेंदबाजों को आराम और उबरने का बेहतर मौका देता लेकिन उन्होंने साथ ही स्वीकार किया कि अंतिम टेस्ट में दूसरे दिन गेंदबाज इंग्लैंड के निचले क्रम के बल्लेबाजों के खिलाफ योजना को लागू करने में नाकाम रहे।

भारत ने आलराउंडर हार्दिक पंड्या को बाहर करके हनुमा विहारी को पदार्पण का मौका दिया जिन्होंने पहले दिन सिर्फ एक ओवर गेंदबाज की। यह पूछने पर कि क्या भारत को पांचवें गेंदबाज की कमी खली, बुमराह ने कहा, ''मुझे टीम चयन के बारे में जानकारी नहीं है। यह सवाल प्रबंधन के लिए है।’’ उन्होंने कहा, ''जब आपके पास अतिरिक्त गेंदबाज होता है तो यह गेंदबाजी में आपको प्रयोग का मौका देता है। चार गेंदबाजों के साथ आपको अधिक ओवर फेंकने होते हैं क्योंकि आपको तब गेंदबाजी के लिए जल्दी लौटना होता है।’’

बुमराह ने कहा, ''केवल यही एक अंतर है। मुझे लगता है कि इसके अलावा हमने अपना सर्वश्रेष्ठ प्रयास किया, हमने पूरी जान के साथ गेंदबाजी की, हमने काफी ओवर फेंके। एक अतिरिक्त गेंदबाज कई बार आपको पर्याप्त आराम का मौका देता है।’’ इंग्लैंड की टीम ने पहले दिन सात विकेट पर 198 रन बनाए थे लेकिन जोस बटलर की 89 रन की पारी की बदौलत टीम 332 रन बनाने में सफल रही।

भारत ने दूसरे दिन का खेल खत्म होने तक छह विकेट पर 174 रन बनाए हैं। बुमराह ने कहा, ''190 के आसपास सात विकेट चटकाकर हम अच्छी स्थिति में थे लेकिन उन्होंने अच्छी बल्लेबाजी की और हम फायदा नहीं उठा सके। यह दोनों चीजों का संयोजन है। हमने सही क्षेत्र में गेंदबाजी के लिए कड़ी मेहनत की। लेकिन आज हमने उतनी अच्छी गेंदबाजी नहीं ही और उन्होंने अच्छा जज्बा दिखाया।’’

पूरी श्रृंखला के दौरान इंग्लैंड के निचले कम के बल्लेबाज भारत के लिए समस्या बने रहे। शनिवार को बटलर ने आदिल राशिद के साथ 33 और फिर स्टुअर्ट ब्राड के साथ 98 रन की साझेदारी की। निचले क्रम के बल्लेबाजों के खिलाफ विशिष्ट योजना के बारे में पूछने पर बुमराह ने कहा, ''निचले क्रम के बल्लेबाजों के लिए कोई विशिष्ट योजना नहीं है। आप प्रत्येक बल्लेबाज के लिए योजना बनाते हैं, अगर वह निचले क्रम का बल्लेबाज है तो भी, हम इसका सम्मान करते हैं। हमने आज योजना को लागू करने का प्रयास किया लेकिन काम नहीं बना।’’

भारत को पेट्रोल- डीजल की कीमत पर बगैर सोचे झटके में निर्णय लेने से बचना चाहिए: पेट्रोलियम मंत्री

India should refrain from making decisions in petrol and diesel prices: petroleum minister

नई दिल्ली। केंद्रीय पेट्रोलियम मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने शनिवार को कहा कि एक मजबूत अर्थव्यवस्था वाले भारत को पेट्रोल-डीजल में भारी उछाल पर बिना गहराई से सोचे झटके में कोई निर्णय करने से बचाना चाहिए। उनकी बात से लगता है कि सरकार फिलहाल डीजल पेट्रोल पर कर में कोई कटौती करने के मूड में नहीं है।

उल्लेखनीय है कि दिल्ली में पेट्रोल की खुदरा कीमतें शनिवार को पहली बार 80 रुपए प्रति लीटर के स्तर से भी ऊपर निकल गयीं। प्रधान ने वैश्विक आवागमन सम्मेलन 'मूव’ के दौरान अलग से बातचीत में कहा कि अमेरिकी डॉलर की मजबूती, उत्पादक देशों द्बारा उत्पादन बढ़ाने का वायदा पूरा न करने तथा ईरान, वेनेजुएला और तुर्की में उत्पादन के बाधित होने के कारण कच्चे तेल की कीमतें ऊंची हुई हैं।

उन्होंने कहा, ''एक मजबूत और सबसे तेजी से वृद्धि करती प्रमुख अर्थव्यवस्था होने के नाते भारत को बिना सोचे समझे कोई कदम नहीं उठाना चाहिए। हमें थोड़ा इंतजार करना चाहिए।’’ प्रधान से पूछा गया था कि क्या सरकार पेट्रोल-डीजल की कीमतों में रिकार्ड तेजी को देखते हुए उत्पाद शुल्क में कोई कटौती करेगी।

प्रधान ने सम्मेलन के दौरान कहा कि तेल विपणन कंपनियां इलेक्ट्रिक वाहनों को प्रोत्साहित करने के लिए पेट्रोल पंपों पर चाîजग प्वायंट लगाने की योजना बना रही हैं। उन्होंने कहा कि इलेक्ट्रिक वाहन चर्चा का केंद्र हो गए हैं और देश को सिर्फ इलेक्ट्रिक वाहनों का ही इस्तेमाल करना चाहिए। उन्होंने कहा, ''हम देश में इलेक्ट्रिक वाहनों के इस्तेमाल को प्रोत्साहित करना चाहते हैं क्योंकि हम प्रदूषण कम करना चाहते हैं। लेकिन हम इलेक्ट्रिक वाहनों के लिए बिजली कहां से लाएंगे?’’

प्रधान ने कहा, ''यदि आप कह रहे हैं कि वाहनों के ईंधन से प्रदूषण बढ़ रहा है और यदि आप इलेक्ट्रिक वाहनों के लिए कोयले से बिजली बना रहे हैं तो इससे प्रदूषण शहरों से गांवों की ओर जाएगा।’’ प्रधान ने कहा कि इलेक्ट्रिक वाहनों के लिए सौर ऊर्ज़ा से उत्पन्न बिजली का इस्तेमाल किया जाना चाहिए।

उन्होंने कहा, ''सौर ऊर्ज की मदद करने के लिए हमें गैस आधारित बिजली संयंत्रों की जरूरत होगी... अत: सिर्फ इलेक्ट्रिक वाहनों पर ध्यान देने से अन्य ऊर्ज़ा के साथ न्याय नहीं होगा।’’ प्रधान ने कहा कि क्षेत्र में सीएनजी, एलएनजी और बायो-सीएनजी के इस्तेमाल को बढ़ावा दिया जा रहा है और एक दशक के भीतर देश में 10 हजार सीएनजी स्टेशन लगाने की योजना है जो आधे देश को सेवा देंगे।

उन्होंने कहा कि वैश्विक चलन में बदलाव के बाद भी देश में पेट्रोल-डीजल की खपत पांच प्रतिशत की सालाना दर से बढ़ रही है। उन्होंने कहा, ''इलेक्ट्रिक वाहनों की वृद्धि का जो भी परिदृश्य हो, भारत को उच्च परिशोधन क्षमता की जरूरत बनी रहेगी।’’

उन्होंने सार्वजनिक तेल कंपनियों तथा कुछ निजी कंपनियों द्बारा एलएनजी वितरण संरचना तैयार करने की कोशिशों की भी जानकारी दी। उन्होंने कहा, ''इंडियन ऑयल ने अगले साल 5० हाइड्रोजन संवर्धित सीएनजी बसें उतारने के लिए दिल्ली सरकार के साथ करार किया है।’’

28 सितंबर को थिएटर में आएगी 'जॉनी इंग्लिश स्ट्राइक्स अगेन'

'Johnny English Strikes Again' will come in theaters on September 28

नई दिल्ली। दूसरे सीरीज के आने के सात साल बाद कॉमेडी के बादशाह रोवन एटकिसन की पसंदीदा एक्सीडेंटल स्पाई फिल्म जॉनी इंग्लिश का तीसरा संस्करण 'जॉनी इंग्लिश स्ट्राइक्स अगेन’ आगामी 28 सितंबर को रिलीज होगी।

डेविड केर निर्देशित 'जॉनी इंग्लिश स्ट्राइक्स अगेन’ में रोवन एटकिसन, एम्मा थॉम्पसन और ओल्गा क्यूरिलेंको मुख्य भूमिकाओं में दिखेंगे। यूनिवर्सल पिक्चर्स इंटरनेशनल इंडिया की इस फिल्म में जॉनी इंग्लिश के सहायक बॉ के रूप में बेन मिलर की भी वापसी हो रही है। इस नए एडवेंचर की शुरुआत एक साइबर हमले से होती है, जिसमें ब्रिटेन के सभी जासूसों की पहचान सामने आ जाती है। इसके बाद खुफिया एजेंसियों की आखिरी उम्मीद जॉनी इंग्लिश ही बचता है।

अपने रिटायरमेंट को खत्म करते हुए जॉनी इंग्लिश इस मिशन में कूदता है और मास्टरमाइंड हैकर को खोजने में लग जाता है। सीमित जानकारी के दम पर ही जॉनी इंग्लिश मॉडर्न टेक्नोलॉजी की चुनौतियों से पार पाते हुए मिशन को सफल बनाता है। फिल्म के बारे में एटकिसन कहते हैं, अगर आप सोचते हैं कि कुछ होना चाहिए, तो आपके मन में खुद यह सवाल आ जाता है कि कुछ नया है क्यों नहीं? यह तब तक चलता रहेगा, जब तक आप शारीरिक और मानसिक रूप से काम करने में सक्षम हैं।

एटकिसन ने अपने सहयोगी बॉ की वापसी पर भी उत्साह जताया। यह भूमिका बेन मिलर निभा रहे हैं। एटकिसन ने कहा, थोड़े ही लोग हैं जिनके साथ कॉमेडी में साझेदार के तौर पर मैं सहज महसूस करता हूं। निश्चित रूप से ब्लैकेडर में बाल्ड्रिक की भूमिका निभाने वाले टोनी रॉबिन्सन उनमें से एक हैं। हम एक-दूसरे से जुड़े हुए हैं और ऐसा ही जुड़ाव मुझे बेन के साथ महसूस होता है। मुझे लगता है कि हम एक-दूसरे के साथ बेहद अच्छी तरह काम कर पाते हैं। 'जॉनी इंग्लिश स्ट्राइक्स अगेन ’के लेखक विलियम डेविस और निर्माता टिम बेवन, एरिक फेलनर और क्रिस क्लार्क हैं। देश के अधिकांश शहरों में यह फिल्म 28 सितंबर को रिलीज होगी।

B'Day Spl: अक्षय कुमार को ऐसे मिली थी पहली फिल्म, जानें फिल्म इंडस्ट्री से जुड़ी उनकी ये दिलचस्प बातें

B'Day Spl: Akshay Kumar got the first movie

मुम्बई। बॉलीवुड में खिलाड़ी कुमार अक्षय कुमार का नाम उन गिने चुने अभिनेताओं में शुमार किया जाता है जिन्होंने लगभग 25 वर्षो से अपने दमदार अभिनय से दर्शकों के दिल में आज भी एक खास मुकाम बना रखा है। अक्षय कुमार (मूल नाम राजीव भाटिया) का जन्म नौ सितंबर 1967 को पंजाब के अमृतसर में एक मध्यम वर्गीय पंजाबी परिवार में हुआ था। उनका बचपन दिल्ली में बीता। अपनी पढ़ाई पूरी करने के बाद अक्षय बैंकाक चले गए और वहां बावर्ची का काम करने लगे। इस दौरान वह वहां मार्शल आर्ट सीखा करते थे।

बैंकाक से लौटने के बाद अक्षय कुमार मुम्बई आ गए और मार्शल आर्ट ट्रेनर का काम करने लगे। इसी दौरान अक्षय की मुलाकात फिल्मकार प्रमोद चक्रवर्ती से हुई और उनसे अपनी फिल्म दीदार में काम करने की पेशकश की। इससे पहले हालांकि उनकी फिल्म सौगंध प्रदर्शित हो गयी। इस बीच निर्देशक अब्बास मस्तान की नजर अक्षय कुमार पर पड़ी। उन्होंने उनसे अपनी फिल्म खिलाड़ी 1992 में काम करने का प्रस्ताव किया। रहस्य और रोमांच से भरी यह फिल्म टिकट खिड़की पर सुपरहिट साबित हुयी और वह काफी हद तक इंडस्ट्री में पहचान बनाने में कामयाब हो गए। फिल्म खिलाड़ी की सफलता के बाद अक्षय फिल्म इंडस्ट्री में अपनी पहचान बनाने में कामयाब हो गए। 

खिलाड़ी के बाद अक्षय कुमार फिल्म इंडस्ट्री में खिलाड़ी कुमार के नाम से मशहूर हो गए। इसके बाद फिल्मकारों ने उन्हें लेकर खिलाड़ी टाइटल वाली कई फिल्मों का निर्माण किया। इनमें मै खिलाड़ी तू अनाड़ी.सबसे बडा खिलाड़ी खिलाड़ियों का खिलाड़ी मिस्टर एंड मिसेज खिलाड़ी इंटरनेशनल खिलाड़ी खिलाड़ी 420 आदि है।

वर्ष 1994 अक्षय कुमार के सिने कैरियर के लिये अहम वर्ष साबित हुआ। इसी वर्ष उनकी ये दिल्लगी मोहरा, सुहाग, एलान और मै खिलाड़ी तू अनाड़ी जैसी सुपरहिट फिल्में प्रदर्शित हुयी। फिल्म ये दिल्लगी में उन्हें निर्माता निर्देशक यश चोपडा के साथ पहली बार काम करने का अवसर मिला।

इस फिल्म में अपने दमदार अभिनय के लिए वह पहली बार सर्वश्रेष्ठ अभिनेता के फिल्म फेयर पुरस्कार से नामांकित भी किये गए। वर्ष 1994 में ही प्रदर्शित फिल्म मोहरा सिने करियर की सर्वाधिक सुपरहिट फिल्म साबित हुयी। मारधाड़ और एक्शन से भरपूर इस फिल्म में उन पर फिल्माया गीत तू चीज बडी है मस्त मस्त उन दिनों श्रोताओं के बीच क्रेज बन गया था। 

भागवत ने हिंदुओं से एक होने की अपील की, कहा- जंगली कुत्ते अकेले शेर का शिकार कर सकते हैं

Bhagwat appealed to be one with Hindus, said - Wild dogs can lion alone

शिकागो। हजारों सालों से हिंदुओं के प्रताड़ित रहने पर अफसोस जाहिर करते हुए राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) प्रमुख मोहन भागवत ने हिंदुओं से एक होने की अपील की और कहा कि ''यदि कोई शेर अकेला होता है, तो जंगली कुत्ते भी उस पर हमला कर अपना शिकार बना सकते हैं।’’ उन्होंने समुदाय के नेताओं से अपील की कि वे एकजुट हों और मानवता की बेहतरी के लिए काम करें। दूसरी विश्व हिदू कांग्रेस (डब्ल्यूएचसी) में यहां शामिल 2500 प्रतिनिधियों को संबोधित करते हुए भागवत ने कहा कि हिंदुओं में अपना वर्चस्व कायम करने की कोई आकांक्षा नहीं है। उन्होंने कहा, '' हिंदु समाज तभी समृद्ध होगा जब वह समाज के रूप में काम करेगा।’’ 

उन्होंने कहा, ''पूरे विश्व को एक टीम के तौर पर लाने का महत्वपूर्ण मूल्य अपने अहं को नियंत्रित करना और सर्वसम्मति को स्वीकार करना सीखना है। शिकागो में 1893 में विश्व धर्म संसद में स्वामी विवेकानंद के ऐतिहासिक भाषण की 125वीं वर्षगांठ की स्मृति में दूसरी विश्व हिंदु कांग्रेस का आयोजन किया गया है। 

उन्होंने कहा, ''अगर शेर अकेला हो तो जंगली कुत्ते उस पर हमला कर उसे शिकार बना लेते हैं। हमें यह नहीं भूलना चाहिए। हम दुनिया को बेहतर बनाना चाहते हैं। हमारी वर्चस्व स्थापित करने की कोई अकांक्षा नहीं। हमारा प्रभाव विजय या उपनिवेशीकरण का नतीजा नहीं है।’’ भागवत ने कहा कि आदर्शवाद की भावना अच्छी है। उन्होंने खुद को ''आधुनिकता विरोधी’’ न करार देकर ''भविष्योन्मुखी’’ बताया। उन्होंने हिंदु धर्म का वर्णन ''प्राचीन और उत्तर आधुनिक’’ के तौर पर करने की मांग की। 

उन्होंने कहा, ''हिंदु समाज तभी समृद्ध होगा जब वह एक समाज के तौर पर काम करेगा।’’  यह सम्मेलन हिंदु सिद्धांत 'सुमंत्रिते सुविक्रांते’ अर्थात 'सामूहिक रूप से चितन करें, वीरतापूर्वक प्राप्त करें’ पर आधारित है। भागवत ने कहा, ''समूची दुनिया को एक टीम के तौर पर बदलने की कुंजी नियंत्रित अहं और सर्वसम्मति को स्वीकार करना सीखना है। उदाहरण के लिए भगवान कृष्ण और युधिष्ठिर ने कभी एक दूसरे का खंडन नहीं किया।’’

इस संदर्भ में उन्होंने हिंदु महाकाव्य महाभारत में युद्ध और राजनीति को इंगित करते हुए कहा, राजनीति को ध्यान के सत्र की तरह नहीं संचालित किया जा सकता और इसे राजनीति ही रहना चाहिए।  भागवत ने कहा, ''साथ काम करने के लिये हमें सर्वसम्मति स्वीकार करनी होगी। हम साथ काम करने की स्थिति में हैं।’’

उन्होंने सम्मेलन में शामिल लोगों से कहा कि वह सामूहिक रूप से काम करने के विचार को लागू करने के तरीके को लागू करने की कार्यप्रणाली विकसित करें और चर्चा करें। उन्होंने कहा कि हिंदु समाज में प्रतिभावान लोगों की संख्या सबसे ज्यादा है। उन्होंने कहा, ''लेकिन वे कभी साथ नहीं आते हैं। हिंदुओं का साथ आना अपने आप में मुश्किल चीज है।’’

भागवत ने कहा कि हिंदु हजारों सालों से पीड़ित हैं क्योंकि उन्होंने इसके मौलिक सिद्धांतों और आध्यत्मवाद को भुला दिया।  संघ प्रमुख ने कहा, '' हिंदु किसी का विरोध करने के लिये नहीं जीते। हम कीड़ों को भी जीने देते हैं। यहां ऐसे लोग हो सकते हैं जो हमारा (हिदुओं का) विरोध करते हों। आपको उन्हें नुकसान पहुंचाए बिना उनसे निपटना होगा।’’

विश्व हिंदु कांग्रेस के अध्यक्ष एस पी कोठारी ने कहा कि उन्हें और सम्मेलन में शामिल कई और लोगों को विभिन्न संगठनों और व्यक्तियों की तरफ से ऐसे अनुरोध और याचिकाएं मिलीं जिनमें उनसे सम्मेलन से अलग होने का अनुरोध किया गया क्योंकि डब्ल्यूएचसी या इसके कुछ संगठन ''सामाजिक और धार्मिक रूप से विभाजक’’ हैं। 

कोठारी ने कहा, ''मैं ऐसी मान्यता को सिरे से खारिज करता हूं।’’ सम्मेलन में अपने संबोधन में अभिनेता अनुपम खेर ने कहा कि हिंदुवाद जीवन का एक तरीका है और कोई हिदू उनकी तरह के तौर तरीकों को अपनाकर बनता है। उन्होंने कहा, ''सहिष्णुता विवेकानंद के संदेश का मूलतत्व था। अपने ही देश में शरणार्थी की तरह रहने के बावजूद कश्मीरी पंडितों ने इस तरह से 28 वर्षों से सहिष्णुता दिखाई है जैसे कोई और नहीं दिखाता।’’

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