चंद्रमा के सबसे नजदीक पहुुचा लैंडर विक्रम, अब रहेगा लैड़िग का इंतजार: चंद्रयान 2

Samachar Jagat | Wednesday, 04 Sep 2019 09:30:37 AM
Vikram, the lander closest to the moon, will now wait for the landing: Chandrayaan 2

इंटरनेट डेस्क। चंद्रयान-2 के लैंडर विक्रम को चंद्रमा की सबसे निचली कक्षा में उतारने का दूसरा  चरण भी सफलतापूर्वक पूरा कर लिया। इसरो के वैज्ञानिकों ने ऑन बोर्ड पोपल्शन सिस्टम का इस्तेमाल करते हुए लैंडर विक्रम को चंद्रमा की सबसे निचली कक्षा में उतार दिया। दो दिन पहले ही वैज्ञानिकों ने चंद्रयान-2 के ऑर्बिटर से सुबह 1.55 बजे के उस पल का इंतजार है। जब निर्धारित कार्यक्रम के तहत लैंडर चंद्रमा की सतह पर उतरेगा।


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भारतीय अंतरिक्ष अनुंसधान संगठन ने बताया कि चंद्रयान-2 के लैंडर विक्रम को चंद्रमा की सबसे नजदीकी कक्षा में ले जाने का कार्य बुधवार को तड़के 3 बजकर 42 मिनट पर सफलतापूर्वक और पूर्व निर्धारित योजना के तहत किया गया। पूरी प्रकिया कुल नौ सेकेंड की रही। अब अगले तीन दिनों तक लैंडर विक्रम चांद के सबसे नजदीकी कक्षा 35गुणा 97 किलोमीटर में चक्कर लगाता रहेगा। इन तीन दिनों तक विक्रम लैंडर और प्रज्ञान रोवर की जांच की जाती रहेगी।

योजना के मुताबिक यदि सब कुछ ठीक रहा तो लैंडर विक्रम और उसके भीतर मौजूद रोवर प्रज्ञान के सात सितंबर को देर रात एक बज कर 30 मिनट से दो बज कर 30 मिनट के बीच चंद्रमा के सतह पर उतरने की उम्मीद है। लैंडर विक्रम दो गड्ढों, मंजिनस सी और सिमपेलियस एन के बीच वाले मैदानी हिस्से में लगभग 70° दक्षिणी अक्षांश पर लैंड करेगा। चंद्रमा की सतह पर उतरने के बाद लैंडर विक्रम से रोवर प्रज्ञान उसी दिन सुबह 5 बज कर 30 मिनट से 6 बज कर 30 मिनट के बीच निकलेगा। रोवर प्रज्ञान एक चंद्र दिवस यानी यानी धरती के कुल 14 दिन तक चंद्रमा की सतह पर रहकर परीक्षण करेगा।

यह इन 14 दिनों में कुल 500 मीटर की दूरी तय करेगा। चंद्रमा की सतह पर लगातार 14 दिनों तक प्रयोगों को अंजाम देने के बाद रोवर प्रज्ञान निष्क्रिय हो जाएगा। यह चंद्रमा की सतह पर ही अनंत काल तक मौजूद रहेगा। प्रज्ञान से पहले चांद पर सोवियत यूनियन, अमेरिका, चीन आदि ने पांच रोवर भेजे थे जो चंद्रमा पर ही निष्क्रयि पड़े हैं। दूसरी ओर ऑर्बिटर चंद्रमा की कक्षा में 100 किलोमीटर की ऊंचाई पर उसकी परिक्रमा करता रहेगा। ऑर्बिटर चंद्रमा की कक्षा में एक साल तक सक्रिय रहेगा। 



 

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