महिला मतदाता 2019 को बना सकती हैं भारत की महिलाओं का वर्ष: हिंदुजा एसपी शानु

Samachar Jagat | Monday, 18 Mar 2019 03:35:05 PM
Women voter can make 2019 India women year: Hinduja SP Shanu

न्यूयॉर्क। स्विट्जरलैंड में हिंदुजा बैंक की अध्यक्ष हिंदुजा एस पी शानु ने कहा कि देश बेहद महत्वपूर्ण आगामी राष्ट्रीय चुनावों के लिए तैयार है और इस बार के चुनाव में महिलाओं की भूमिका अहम होने वाली है क्योंकि अधिक से अधिक महिला मतदाता एक बेहतर लैंगिक समावेशी कानून एवं नीतियों को सुनिश्चित करने में संभावित गेम चेंजर की भूमिका निभाकर 2019 को भारत की महिलाओं का वर्ष बना सकती हैं।

शानु ने कहा कि भारत में अभी चुनाव होने वाले हैं इसलिए यह ध्यान देने वाली बात है कि पहले की तुलना में कहीं अधिक महिलाएं अपने मताधिकार का इस्तेमाल करने के लिये आगे आ रही हैं और देश के कई राज्यों में हुए चुनावों में अधिक संख्या में महिलाओं ने मतदान किया है। पीटीआई को भेजे गए उनके लेख के मुताबिक हिंदुजा फाउंडेशन यूएस की अध्यक्ष शानु ने कहा कि अधिक संख्या में महिला मतदाताओं के होने से बेहतर लैंगिक समावेशी कानून एवं नीतियां बनेंगी।

लैंगिक जागरुकता न सिर्फ उम्मीदवारों के चुनाव प्रचार के तरीके में बदलाव लायेगी, बल्कि इससे महिला उम्मीदवारों के लिये तो द्बार खुलेंगे ही बल्कि निर्णय लेने वाली राष्ट्रीय संस्थाओं के अंदर भी महिलाओं के लिए अवसर पैदा होंगे। शानु ने उल्लेख किया कि अपने लोकतांत्रिक एवं संवैधानिक अधिकारों के इस्तेमाल के मामले में महिला मतदाताओं के रूझान में इजाफा हुआ है जो यह दिखाता है कि समूचे भारत में अपनी आवाज उठाने और अपने अधिकारों के इस्तेमाल को लेकर महिलाएं अधिक दृढ़ हुई हैं।

उन्होंने कहा कि महिलाएं दुनिया भर में समूचे राजनीतिक परिदृश्य में लड़ाई लड़ रही हैं। उन्होंने कहा कि अमेरिका के लिए 2019 का वर्ष महिलाओं का वर्ष रहा और रिकॉर्ड संख्या में 127 महिलाएं अमेरिकी कांग्रेस का हिस्सा बनीं। हाल में  शुरू हुई देश की पहली सिर्फ महिलाओं की राजनीतिक पार्टी नेशनल वीमेंस पार्टी (एनडब्ल्यूपी) का हवाला देते हुए उन्होंने जोर देकर कहा कि भारत में भी इनका सामूहिक कार्य देखा जा सकता है।

पार्टी ने कहा है कि वह आगामी लोकसभा चुनावों में कुल सीटों की आधी से अधिक यानी 283 सीटों पर चुनाव लड़ेगी। शानु हिंदुजा ग्लोबल सॉल्यूशंस इंक की सह अध्यक्ष और निदेशक भी हैं। उन्होंने कहा कि समाज में महिलाओं की भूमिका तय करने वाले तथा लैंगिक समानता एवं उन्हें बनाए रखने में बाधक गहरे तक पैठ बनाये पारंपरिक सांस्कृतिक मूल्यों एवं मान्यताओं को तोड़ने के लिये एनडब्ल्यूपी के पास अब एक मंच है। शानु के ये विचार ब्रसेल्स पब्लिकेशन के न्यू यूरोप में प्रकाशित हुए हैं।



 

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