कैमल फेस्टिवल: रेगिस्तान में ऊंट करते हैं डांस, देशी-विदेशी पर्यटकों के बीच होती है रस्सा कस्सी, जाने और भी बहुत कुछ

Samachar Jagat | Wednesday, 09 Jan 2019 11:01:49 AM
Camel Festival: Dance camels in deserts are tourists competition participant, go and many more

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इंटरनेट डेस्क नए साल की शुरूवात होते ही देशभर के करीब करीब सभी राज्यों में फेस्टिवलों को आयोजन होता है जिसे देखने के लिए लोग देश के ही नहीं बल्कि विदेशों से भी यहां पहुंचते है ऐसा मेें एक बार फिर से नया साल आते ही देश के अलग-अलग राज्यों में टूरिस्ट फेस्टिवल की शुरुआत भी होने लगी है।जनवरी माह में होने वाला ये खास फेस्टिवल पूरे देश में अपनी एक अलग पहचान बनाए हुए है  अगर आप अपने फैमिली के साथ इस बार राजस्थान को करीब से देखना चाहते है तो यह माह आपके लिए बेस्ट ऑप्शन होगा क्योंकि राजस्थान में स्थित खूबसूरत शहर बीकानेर में हर साल की तरह दो दिवसीय कैमल फेस्टविल का 12 व 13 जनवरी से आयोजन  होने वाला है जिसकी तैयारिया करीब करीब पूर्ण हो चुकी है  इस उत्सव की सबसे खास बात होती है सजीले ऊंट जिसकी वजह से यह देशभर में अपनी अलग पहचान बनाए हुए है  


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यहां आने पर आप राजस्थान की संस्कृति को बेहद करीब और बारीकी से देख पाएंगे इस उत्सव के दौरान कई रंगारंग कार्यक्रमों का आयोजन किया जाता है जिनको देखने देश.विदेश से सैलानी उमड़ते हैं वैसे आपकों जानकारी के लिए इस उत्सव के महत्व के बारे में बताते है की ऊंटों का बीकानेर से बहुत पुराना रिश्ता रहा है यहां के लोग कहते है की बीकानेर शहर की खोज करने वाले राव बीका जी ने बीकानेर में ऊंटों की प्रजाति का पालन पोषण बेहद अच्छे से किया उस समय ऊंटों को  खासतौर पर सेना के लिए भी प्रशिक्षित किया जाता है जिससे वह आक्रमण के समय इन्हे अपने बेड़े में शामिल कर सके जी हां तभी तो आज भी भारतीय थल सेना में एक ऐसी टुकड़ी है जो ऊंट के साथ बॉर्डर की सुरक्षा में तैनात है 

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राजस्थान की सरकार ने ऊंट को राज्य पशु का दर्जा भी दिया साथ ही इसकी गरिमा व उपयोगिता को अधिक बढ़ा और दिया है बीकानेर में आयोजित होने वाले दो दिवसीय महोत्सव के मुख्य आकर्षण राजस्थानी कला व संस्कृति के साथ देश के विभिन्न इलाकों के सांस्कृतिक वैभव से भी पर्यटक रूबरू होते है ऐसे में यहां आने पर राजस्थान की संस्कृति ही नहीं बल्कि कई राज्यों की संस्कृति को भी एक मंच पर देख सकते है इस उत्सव के दौरान आतिशबाजी के नजारे भी पर्यटकों को देखने को मिलते है

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उत्सव की शुरूवात देशी.विदेशी पर्यटकों के साथ खो.खो प्रतियोगिताओं से होती है इन प्रतियोगिता में रस्सा कश्शी, ग्रामीण कुश्ती, कबड्डी, साफा बांधना और ऊंट नृत्य प्रतियोगिताए मुख्य होती है जिसमें देशी विदेशी पर्यटक जमकर भाग लेते हैअगर आप भी राजस्थान के खूबसूरत शहर बीकानेर में इस बार कैमल फेस्टिवल देखने जा रहे है तो आप यहां आने के बाद  जूनागढ़ का किला, करणी माता मंदिर, देशनोक जरूर जाए इस मंदिर की बहुत मान्यता है इस मंदिर में आप बहुत से चूहों को एक साथ देख सकेंगे मान्यता है की चूहों को माता का प्रिय माना जाता है

 

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