कैमल फेस्टिवल का आगाज आज से: दो दिन तक विदेशी पावणों से भरा रहेगा रेगिस्तान देखने को मिलेगी राजस्थान की संस्कृति

Samachar Jagat | Saturday, 12 Jan 2019 10:41:21 AM
Camel Festival's debut from today: For two days, the desert will be filled with foreign , the Rajasthan culture will be seen.

इंटरनेट डेस्क:  नए साल की शुरूवात होते ही  देश में फेस्टिवलों को आयोजन होता है जिसे देखने के लिए लोग देश के ही नहीं बल्कि विदेशों से भी यहां पहुंचते है ऐसा मेें एक बार फिर से नया साल आते ही देश के अलग.अलग राज्यों में टूरिस्ट फेस्टिवल की शुरुआत होने लगी है। नए साल के आगमन का पहले माह जनवरी बेहद खास होता है एक तरह लोग मकर संक्रांति पर दान पुण्य करते है तो वहीं इस माह में होने वाले खास फेस्टिवल पूरे देश में अपनी एक अलग पहचान बनाए हुए है  अगर आप अपने फैमिली के साथ इस बार राजस्थान को करीब से देखना चाहते है तो यह माह आपके लिए बेस्ट ऑप्शन होगा क्योंकि राजस्थान में स्थित खूबसूरत शहर बीकानेर में हर साल की तरह दो दिवसीय कैमल फेस्टविल का आगाज आज से होने वाला है जो दो दिन तक चलेगा 12 व 13 जनवरी से आयोजन  होने वाला ये कैमल फेस्टिवल पुरी दुनिया में अपनी अलग पहचान बनाए हुए है इस उत्सव की सबसे खास बात होती है सजीले ऊंट जिसकी वजह से यह देशभर में अपनी अलग पहचान बनाए हुए है  

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एक मंच पर आपकों देखने को मिलेगी अलग अलग संस्कृति 

यहां आने पर आप राजस्थान की संस्कृति को बेहद करीब और बारीकी से देख पाएंगे इस उत्सव के दौरान कई रंगारंग कार्यक्रमों का आयोजन किया जाता है जिनको देखने देश-विदेश से सैलानी यहां उमड़ते हैं वैसे आपकों जानकारी के लिए इस उत्सव के महत्व के बारे में बताते है की ऊंटों का बीकानेर से बहुत पुराना रिश्ता रहा है यहां के लोग कहते है की बीकानेर शहर की खोज करने वाले राव बीका जी ने बीकानेर में ऊंटों की प्रजाति का पालन पोषण बेहद अच्छे से किया उस समय ऊंटों को  खासतौर पर सेना के लिए भी प्रशिक्षित किया जाता है जिससे वह आक्रमण के समय इन्हे अपने बेड़े में शामिल कर सके जी हां तभी तो आज भी भारतीय थल सेना में एक ऐसी टुकड़ी है जो ऊंट के साथ बॉर्डर की सुरक्षा में तैनात है 

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राजस्थान की कला और संस्कृति रहेगी मुख्य आकार्षण में

राजस्थान की सरकार ने ऊंट को राज्य पशु का दर्जा भी दिया साथ ही इसकी गरिमा व उपयोगिता को अधिक बढ़ा और दिया है बीकानेर में आयोजित होने वाले दो दिवसीय महोत्सव के मुख्य आकर्षण राजस्थानी कला व संस्कृति के साथ देश के विभिन्न इलाकों के सांस्कृतिक वैभव से भी पर्यटक रूबरू होते है ऐसे में यहां आने पर राजस्थान की संस्कृति ही नहीं बल्कि कई राज्यों की संस्कृति को भी एक मंच पर देख सकते है इस उत्सव के दौरान आतिशबाजी के नजारे भी पर्यटकों को देखने को मिलते है

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कैमल फेस्टिवल के साथ आप इन जगहों पर जरूर जाएं

उत्सव की शुरूवात देशी-विदेशी पर्यटकों के साथ खोण्खो प्रतियोगिताओं से होती है इन प्रतियोगिता में रस्सा कस्सी, ग्रामीण कुश्ती, कबड्डी, साफा बांधना और ऊंट नृत्य प्रतियोगिताए मुख्य होती है जिसमें देशी विदेशी पर्यटक जमकर भाग लेते है अगर आप भी राजस्थान के खूबसूरत शहर बीकानेर में इस बार कैमल फेस्टिवल देखने जा रहे है तो आप यहां आने के बाद  जूनागढ़ का किला, करणी माता मंदिर, देशनोक जरूर जाए इस मंदिर की बहुत मान्यता है इस मंदिर में आप बहुत से चूहों को एक साथ देख सकेंगे मान्यता है की चूहों को माता का प्रिय माना जाता है

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