Mothers Day Special : चंबल के बीहड़ों में दस्यु सुंदरियों को मातृत्व सुख पाना चुनौती भरा रहा

Samachar Jagat | Sunday, 13 May 2018 01:06:31 PM
Chambal ravages have been challenging for banditry sufferers to bandit merchants.

इटावा। चंबल के बीहड़ों में मजबूरी के चलते डाकू बनी महिलाओं के लिए मातृत्व सुख पाना कम चुनौतीपूर्ण नहीं था, फिर भी कई ऐसी महिलाओं ने तमाम कठिनाइयों का सामना करते हुए यह सुख हासिल किया। बीहड़ों में आवागमन के साधनों के अभाव में पैदल ही दौड़ धूप करने से लेकर पुलिस दवाब के चलते बार बार स्थान बदलना इन गर्भवती महिलाओं के लिए बहुत कष्टदायक समय रहा। इन महिलाओं ने नौ माह तक सभी बाधाओं को पार करते हुए शिशुओं को जन्म दिया। चंबल में डाकुओं के नामों के साथ दस्यु सुंदरियों के नामों की भी चर्चायें आम होती रही हैं जिनके नाम से चंबल एवं आसपास के लोग थर्राते थे। कई डाकू अपने एकाकी जीवन में महिलाओं को साथ रखते थे। यह बात दीगर है कि कुछ को जबरन जबकि कुछ को प्रेम वश बीहड़ों में डाकूओं के साथ रहना पड़ा था।

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चंबल घाटी में डाकुओं का सिक्का हमेशा से अकेला नहीं चला है। उनके साथ कुछ ऐसी महिलाएं रही हैं, जिनके नाम से इलाके के लोग कांपते रहे हैं और आज भी उनके नाम की चर्चाएं होती रहती हैं। हाथों मे बदूंक थामना वैसे तो हिम्मत और साहस की बात कही जाती है, लेकिन जब कोई महिला बंदूक थामकर बीहड़ों में कूदती है तो उसकी चर्चा बहुत ज्यादा होती है। चंबल के बीहडों में सैकडों की तादाद में महिला डाकुओं ने अपने आंतक का परचम लहराया है। 

इस दरम्यान कुछ महिला डकैत पुलिस की गोली खाकर मौत के मुंह मे समा गईं तो कुछ गिरफ्तार कर ली गई या फिर कुछ महिला डकैतों ने आत्मसमर्पण कर दिया । इनमें से ऐसी ही कुछ महिला डकैत आज भी समाज में अपने आप को स्थापित करने में लगी हुई हैं । साथ ही ये महिला डकैत अपने बच्चों को भी समाज में सम्मानजनक स्थान दिलाने की जद्दोजहद कर रही हैं।  चंबल घाटी के कुख्यात डकैत छविराम की पत्नी ने तमाम संघर्षों के बाद अपने बेटे को समाज में जो सम्मान दिलाया है, उसकी दूसरी मिसाल मिलना ही मुश्किल है । डकैत छविराम की पत्नी संघर्षों से कभी नहीं घबराई। उन्होंने अपने बेटे अजय पाल यादव को पढ़ाया-लिखाया। आज अजयपाल यादव उत्तर प्रदेश पुलिस में सब इंस्पेक्टर है ।

चंबल के इतिहास में पुतलीबाई का नाम पहली महिला डकैत के रूप में दर्ज है। बीहडों में पुतलीबाई का नाम एक बहादुर और आदर्शवादी महिला डकैत के रूप में सम्मानपूर्वक लिया जाता है। गरीब मुस्लिम परिवार में जन्मी गौहरबानो को परिवार का पेट पालने के लिए नृत्यांगना बनना पड़ा। इस पेशे ने उसे नया नाम दिया-पुतलीबाई । शादी-ब्याह और खुशी के मौकों पर नाचने-गाने वाली खूबसूरत पुतलीबाई पर सुल्ताना डाकू की नजर पड़ी और वह उसे जबरन गिरोह के मनोरंजन के लिए नृत्य करने के लिए अपने पास बुलाने लगा । धीरे-धीरे डाकू सुल्ताना का पुतलीबाई से मेल-जोल बढ़ा और दोनों में प्रेम हो गया । इसके बाद पुतलीबाई अपना घर बार छोड़कर सुल्ताना के साथ बीहड़ों में रहने लगी।

पुलिस एनकाउंटर में सुल्ताना डाकू के मारे जाने के बाद पुतलीबाई गिरोह की सरदार बनी और 1950 से 1956 तक बीहड़ों में उसका जबर्दस्त आतंक रहा। पुतलीबाई पहली ऐसी महिला डकैत थी, जिसने गिरोह के सरदार के रूप में सबसे ज्यादा पुलिस से मुठभेड़ की। चंबल के बीहड़ों में रहते हुए सबसे पहले महिला डकैत सीमा परिहार ने अपने बच्चे को जन्म दिया । एक समय था जब चंबल में सीमा के नाम की तूती बोला करती थी। सीमा बीहड़ में आने से पहले अपने माता-पिता के साथ मासूमियत के साथ जिदगी बसर कर रही थी।

दस्यु सरगना लालाराम सीमा परिहार को उठा कर बीहड़ में लाया था। बाद में लालाराम ने गिरोह के एक सदस्य निर्भय गुर्जर से सीमा की शादी करवा दी, लेकिन दोनों जल्दी ही अलग हो गए। सीमा परिहार चंबल में गुजारे अपने पुराने दिनों को याद करते हुए कहती हैं कि निर्भय गुर्जर से अलग होने के बाद लालाराम के साथ रहने लगी । लालाराम से मुझे एक बेटा है। उसने अपने बेटे का नाम सागर रखा है । आज उसका बेटा सागर अपने बेहतर भविष्य के लिए पढ़ाई करने में लगा हुआ है । 18 मई, 2000 को पुलिस मुठभेड़ में लालाराम के मारे जाने के बाद 30 नवंबर, 2000 को सीमा परिहार ने आत्मसमर्पण कर दिया था।

फिलहाल, जमानत पर चल रही सीमा परिहार औरैया में रहते हुए राजनीति में सक्रिय हैं । फूलनदेवी के चुनाव क्षेत्र मिर्जापुर से लोकसभा का चुनाव लड़ चुकी सीमा परिहार टेलीविजन शो बिग बॉस में हिस्सा ले चुकी हैं। सीमा परिहार कहती हैं कि आज की तारीख में मेरी जिन्दगी ठीक-ठाक तरीके से चल रही है, लेकिन चंबल के बीहड़ों में अपनी जिन्दगी का जो समय गुजारा है, बीहड़ों में जो दर्द और तकलीफ झेली है, वह आंखो से ओझल नहीं होती है। सात नवंबर, 2005 को निर्भय गुर्जर की मौत के बाद जब सीमा परिहार ने अपने पति का पुलिस प्रशासन से शव मांगा तो उसके अनुरोध को पुलिस ने सिरे से खारिज कर दिया, बावजूद इसके सीमा ने वाराणसी में मोक्षदायिनी गंगा में निर्भय की अस्थियां विसर्जित कर जबरन पत्नी का दर्जा हासिल करने की कोशिश की।

सीमा परिहार के बाद डकैत चंदन की पत्नी रेनू यादव, डकैत सलीम गुर्जर की प्रेयसी सुरेखा उर्फ सुलेखा और जगन गुर्जर की पत्नी कोमेश गुर्जर ने भी चंबल के बीहड़ों में रहते हुए मातृत्व सुख हासिल किया। डकैत सलीम की प्रेमिका सुरेखा ने भी एक बेटे को जन्म दिया है।मूल रूप से मध्यप्रदेश के भिंड की रहने वाली सुरेखा लंबे समय तक जेल में रही है। अदालत के निर्णय पर वह बाहर आ चुकी है। फिलहाल सुरेखा गांव में रहकर अपना जीवन बसर कर रही है । 5 जनवरी 2005 को औरैया जिले में पुलिस मुठभेड़ में मारे गये कुख्यात डकैत चंदन यादव गैंग की महिला डकैत रेनू यादव ने भी एक बेटी को जन्म दिया है। रेनू की बेटी अपनी नानी के पास औरैया के मंगलीपुर गांव मे रह रही है।

अरविन्द गुर्जर और रामवीर गुर्जर दोनों के साल 2005 में बबली और शीला से डाकू जीवन में ही बीहड़ में शादी रचाई दोनों पर कई मुक़दमे भी दर्ज रहे, रामवीर की बीबी शीला ने नर्मदा नाम की एक बेटी को जन्म दिया। आज नर्मदा अपनी मां के साथ मध्य प्रदेश के इंदौर में पढ़ाई करके जीवन उत्थान में जुटी हुई है।

राजस्थान के कुख्यात डकैत जगत गुर्जर के गैंग की महिला डकैत कोमेश गुर्जर ने भी बीहड़ में रह कर मां बनने मे गुरेज नहीं किया। बीहड़ मे जहां हरपल मौत से सामना होता है, वहीं पर कोमेश ने दुर्गम हालात में मां बनने का फैसला किया । राजस्थान के धौलपुर जिले के पूर्व सरपंच छीतरिया गुर्जर की बेटी कोमेश अपने पिता की हत्या का बदला लेने के लिए बंदूक उठाकर बीहड़ों में कूद गई थी। गिरोह में साथ-साथ रहने के दौरान जगन गुर्जर और कोमेश एक दूसरे के करीब आ गए। शादीशुदा और दो बच्चों के पिता जगन से उसकी नजदीकी इस कदर बढ़ गई कि साढ़े चार फुट लंबी 28 वर्षीय कोमेश गिरोह में जगन की ढ़ाल मानी जाने लगी।

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मुरैना में मध्य प्रदेश के साथ हुई एक मुठभेड़ में गोली लगने से कोमेश घायल हो गई थी। जगन उसे पुलिस की नजरों से बचाकर अपने साथ ले गया। लेकिन राजस्थान के धौलपुर के समरपुरा के एक नर्सिंग होम में 5 नवंबर, 2008 को इलाज करा रही कोमेश को पुलिस ने गिरफ्तार कर लिया । कोमेश की जुदाई जगन से बर्दास्त नहीं हुई और उससे मिलने को बेचैन जगन ने 31 जनवरी, 2009 को राजस्थान के करौली जिले के कैमरी गांव के जगदीश मंदिर के परिसर में दौसा से कांग्रेस सांसद सचिन पायलट के सामने इस शर्त पर आत्मसमर्पण कर दिया कि उसे और कोमेश को एक ही जेल में रखा जाए। आत्मसमर्पण के समय जगन ने भावुक होकर कहा कि वह अब आम आदमी की तरह सामाजिक जीवन जीना चाहता है।

अस्सी के दशक में सीमा परिहार के बाद लवली पांडे, अनीता दीक्षित, नीलम गुप्ता, सरला जाटव, सुरेखा, बसंती पांडे, आरती, सलमा, सपना सोनी, रेनू यादव, शीला इंदौरी, सीमा यादव, सुनीता पांडे, गंगाश्री आदि ने भी बीहड़ में दस्तक दी लेकिन इनमें से कोई भी सीमा परिहार जैसा नाम और शोहरत नहीं हासिल कर सकीं। सरला जाटव, नीलम गुप्ता और रेनू यादव के अतिरिक्त अन्य महिला डकैत पुलिस की गोलियों का शिकार हो गईं। हालांकि एक समय लवली पांडेय सीमा परिहार के मुकाबले ज्यादा खतरनाक साबित हुई थी।-एजेंसी 
 



 

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