मुसाफिर हूं यारों ..... अपने सामान की सुरक्षा स्वयं करें, क्या इतना कहना चालक-परिचालक के लिए उचित है। 

Samachar Jagat | Wednesday, 18 Sep 2019 04:52:39 PM
I'm a friend, protect your belongings yourself, is it fair for a driver-operator to say this much?

इंटरनेट डेस्क। आधुनिक जीवनशैली और भागमभाग जिदंगी के तले जीवन चलने का नाम है। वाकई में कामकाज की तलाश हो या घर-गृहस्थी का कार्य, आदमी को प्रतिदिन घर से बाहर निकलना पड़ता ही है। कभी रेल्वेस्टेशन तो बस अड्डा और यहां तक कि मैट्रों में भी आदमी का सफर करना पड़ रहा है। ऐसे में सरकारी बसों के साथ प्राईवेट बसों में भी अधिकतर लोग सफर करते है। घर से दूर आफिस, स्कूल और काॅलेजों के लिए प्रतिदिन प्राईवेट बसों मं सफर करना भी एक मजबूरी से हो गई है। प्राईवेट बसों में भी आदमी अपने आपको सुरक्षित महसूस नहीं कर पा रहा है। सड़कों पर चलने वाली इन प्राईवेट बसों में लोगों के पर्स, मोबाईल और अन्य कीमती सामान का चोरी हो जाना भी एक आम बात हो गई हैं।

आज का नजारा भी कुछ ऐसा ही देखने लायक था। मैं प्रतिदिन की तरह सुबह-सुबह काम पर जाने के लिए जल्दी निकला। अधिकतर घर से बाहर जाने के लिए अपनी बाइक का इस्तेमाल करता हूं। लेकिन कुछ दिनों से शरीर के मोटापे को कम करने और अर्थव्यवस्था को सुचारू बनाएं रखने के लिए बसों का सफर कर रहा हूं। जैसे ही बस स्टैण्ड से अपने कार्यालय के लिए बस में रवाना हुआ तो बस काफी खचाखच भरी हुई थी। लोग आपस में गरीब और उसम के कारण पसीने से परेशान हो रहे थे। तभी मिनी बस में खडे़ अन्य यात्रियों ने बस चालक से बस में भीड़ अधिक होने की बात कहीं। एक-दो यात्री भीड़ का फायदा उठाते हुएं एक व्यक्ति की जेब से मोबाइल चुरा लिया। वह व्यक्ति जब तक कुछ समझ पाता उससे पहले उसकी जेब से मोबाइल चोरी हो गया।

बस यात्री अपने आपको लाचार समझते हुएं बस के बाहर निकल पड़ा। जैसे ही बस कुछ दूर और आगे दूसरे बस स्टाॅप पर गई तो वहां भी एक लड़की का मोबाइल चोरी हो गया। बस यात्री लड़की द्वारा बस कंडेक्टर को मोबाइल चोरी होने की बात बताई। बस कंडेक्टर ने अनभिज्ञता जाहिर की। ऐसे में वह लड़की यात्री भी मोबाइल की तलाश करती हुई बस के बाहर निकली। आखिर इन प्राईवेट बसों में सफर करने वाले यात्रियों की गलती क्या है। सुरक्षा के लिहाज से इन बसों में कुछ भी नहीं है। फस्र्टएड के नाम पर टूटा-फूटा हुआ डब्बा। बस चालक और पचिालक को तो अपनी बस में यात्री बैठाने की चिंता रहती है। ऐसे में जब किसी यात्री का सामान या मोबाइल खो जाता है तो क्या बस के चालक और परिचालक की भी जिम्मेदारी नहीं बनती। चालक और पचिालकों द्वारा यात्रियों को केवल अपने सामान की सुरक्षा स्वयं करने की बात की जाती है। तो ऐसे में चालक और परिचालक बस अपनी इतनी ही जिम्मेदारी से बच पाएंगे। आखिर उन यात्रियों के बारें में भी सोचा जाएं जो व्यक्ति सुबह से जल्दी निकलकर अपने कामकाज के लिए निकलता है। 
 



 

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