भारत की पहली स्वदेशी परमाणु रोधी मेडिकल किट विकसित

Samachar Jagat | Friday, 14 Sep 2018 10:48:11 AM
India's first indigenous anti-nuclear medical kit developed

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नई दिल्ली। केंद्रीय शोध संस्थान के वैज्ञानिकों ने भारत की पहली स्वदेशी मेडिकल किट विकसित करने का दावा किया है। यह किट रेडियोधर्मी पदार्थ के लीक होने और परमाणु युद्ध के घायलों के जख्मों को तेजी भरने और उनके उपचार और सुरक्षा प्रदान करने में मदद करेगी। यह किट परमाणु चिकित्सा एवं संबद्ध विज्ञान संस्थान (आईएनएमएएस) के दो दशक तक किए काम का नतीजा है। इसमें रेडियो संरक्षकों समेत 25 से अधिक सामग्री है जो विकिरणों और नर्व गैस एजेंटों से सुरक्षा कर सकता है। किट में दवाओं और लेप के साथ ऐसी पट्टियां भी हैं जो विकिरणों को सोख सकती हैं।

आईएनएमएएस के निदेशक ए के सिह ने कहा कि भारत में पहली बार विकसित यह किट इसी तरह की किटों का ताकतवर विकल्प है जिन्हें अभी तक अमेरिका और रूस जैसे सामरिक रूप से उन्नत देशों से ऊंचे दामों पर खरीदा जाता रहा है।
मेडिकल किट के दस्तावेजों के अनुसार, इसमें रेडियोधर्मी पदार्थ के पेट या अन्य हिस्सों से शरीर में घुसने पर उन्हें 100 प्रतिशत तक सोखने वाली दवाएं उपलब्ध कराई गई हैं।

आईएनएमएएस के मुताबिक, यह किट सशस्त्र बलों, अर्द्धसैन्य बलों और पुलिस बलों के लिए बनाई गई हैं क्योंकि उनके परमाणु, रसायन और बायोमेडिक युद्ध या फिर परमाणु दुर्घटना के बाद बचाव अभियानों के दौरान सबसे पहले रेडियोधर्मी पदार्थ के संपर्क में आने की आशंका होती है। किट में ऐसा इंजेक्शन भी है जो जब नसों में जाता है तो वह शरीर से भारी धातुओं और खनिजों को सोखता है तथा उन्हें बाहर निकालता है।

यह इंजेक्शन शरीर से 30 - 40 फीसदी तक रेडियाधर्मी पदार्थ को निकाल देता है और परमाणु दुर्घटना के बाद बचाव दलों तथा पीड़ितों के लिए बेहद कारगर है। संस्थान के मुताबिक विभिन्न अर्द्धसैन्य बल इस किट को खरीदने के लिए उनके साथ समझौता ज्ञापन पर आगे बढ़ रहे हैं। सिंह  ने कहा, कुछ मामलों में सेना और अर्द्धसैन्य बलों के सामने आने वाले चिकित्सीय एवं स्वास्थ्य से जुड़े मुद्दे आम जनता से अलग होते हैं। रक्षा क्षेत्र के लिए चिता के तीन क्षेत्र ऊंचाई वाले स्थान, युद्ध के दौरान आने वाली चोटें और एनबीसी युद्ध है।

उन्होंने कहा कि मेडिकल किट में उपलब्ध कराई गई दवाएं मेड इन इंडिया है और कोई भी ऐसी दवा नहीं है जो अन्य देशों में निर्मित हो । आईएनएमएएस के अतिरिक्त निदेशक असीम भटनागर ने कहा कि किट में एक खास तरह की पट्टी रेडियोएक्टिव ब्लड मोपिग ड्रेसिग है जो रेडियोधर्मी पदार्थ को सोखती है। उन्होंने कहा कि रेडियोधर्मी दुर्घटना के दौरान हजारों मरीज अस्पतालों की ओर भागते हैं। ऐसे मरीजों के रक्त में रेडियोधर्मी पदार्थ होते हैं और इनका तुरंत उपचार करने की जरुरत है ताकि दूसरे लोग इससे संक्रमित ना हो। -एजेंसी 

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