भारत में राष्ट्रवाद के उदय और विकास पर प्रकाश डाल रही है नई पुस्तक

Samachar Jagat | Friday, 19 Jan 2018 03:03:33 PM
New book is highlighting the rise and development of nationalism in India

नई दिल्ली। इतिहासकार एस इरफान हबीब ने कहा है कि राष्ट्रवादी और राष्ट्रविरोधी के तौर पर लोगों की पहचान, राज्य और उसकी राजनीति के प्रति उनके रवैये से हो रही है। एस इरफान ने यह निष्कर्ष एक ऐसे संकलन के संपादन के बाद निकाले हैं जो भारत में राष्ट्रवाद के उद्भव और विकास की पड़ताल करता है।

‘‘इंडियन नेशनलिज्म : द एसेंशियल राइटिग्स’’ में इस विषय पर कुछ महत्त्वपूर्ण विचारों को एक जगह रखा गया है। इनमें महत्त्वपूर्ण नेताओं और विचारकों जैसे महात्मा गांधी, जवाहरलाल नेहरू, सी राजागोपालाचारी, भगत सिंह, बाल गंगाधर तिलक, सरोजनी नायडू, बी आर अंबेडकर, रविंद्रनाथ टैगोर, मौलाना आजाद, जयप्रकाश नारायण तथा अन्य के विचार शामिल किए गए हैं।

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इस पुस्तक में 19वीं शताब्दी के अंतिम वर्षों के बाद से राष्ट्रवाद के उदय और विकास को विभिन्न चरणों जैसे उदारवादी, धर्म-केंद्रित, क्रांतिकारी, सर्वव्यापी, समन्वयात्मक,  असंकीर्ण, दक्षिण उदारवाद के जरिए बताने का प्रयास किया गया है।

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हबीब ने कहा, ‘‘सांस्कृतिक एकरूपता की पुकार के बीच हम अति-राष्ट्रवाद के समय में जी रहे हैं। स्व-घोषित राष्ट्रवादियों और एक-संस्कृति का उन्माद हमारी सामाजिक बनावट को टुकड़ों में बांटने का खतरा पैदा कर रहा है। एक दोहरेपन ने हमें घेर लिया है - राज्य और उसकी राजनीति के प्रति आपके नजरिए के आधार पर तय किया जा रहा है कि आप एक राष्ट्रवादी हैं या राष्ट्रविरोधी।’’ एजेंसी

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