किसानों के लिए खास होता है पोंगल का त्योहार

Samachar Jagat | Friday, 12 Jan 2018 11:46:32 AM
Pongal festival is special for farmers

इंटरनेट डेस्क। पोंगल का त्योहार तमिलभाषी लोगों का प्रसिद्ध त्योहार है। इसे तमिल लोग तई पोंगल के नाम से मनाते है। तमिल लोग इसे फसल का त्योहार और सूर्य भगवान को धन्यवाद देने वाला त्योहार भी कहते है। 14 जनवरी से 17 जनवरी तक चार दिन तक अनेक नामों से इस मनाते है। यह त्योहार उन सभी को कृतज्ञता प्रकट करने का त्योहार है जिसकी वजह से फसलें पैदा होती है। इस त्योहार को मनाने की परंपरा द्रविड़ों के समय से चली आ रही है।

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तमिल कैलेंडर के हिसाब से मार्गशीर्ष माह के अंतिम दिनों में बोगी पोंगल मनाते है।  इस दिन सभी तमिल लोग अपनी पुरानी सोच बेकार की बातों को जलाकर नई सोच का स्वागत करते है। इस दिन घरों को पवित्र किया जाता है। तई मास के पहले दिन तई पोंगल मनाते है।

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इस महीने में सभी शुभ कार्य किए जाते है। इस त्योहार पर तमिल लोग अपने घरों को कोलम से अलंकृत करते है। जैसे हिन्दू धर्म में दिवाली पर मांडने बनाते है वैसे ही तमिल लोग इस त्योहार पर ला और सफेद रंग से कोलम बनाते है।

सफेद रंग को विष्णु और लाल रंग को लक्ष्मी माता का प्रतीक माना जाता है। इसलिए कोलम बनाकर लक्ष्मी और विष्णु को आमंत्रित किया जाता है। ऐसा लगता है कि घर में नारायण और लक्ष्मी का निवास है।

भांकरोटा निवासी मनो एम. बी. ने बताया कि तई पोंगल के दिन सुबह मिट्टी या तांबे के बर्तन में दूध उबालते है और दूध के बर्तन से बाहर निकलने की प्रतिक्षा की जाती है। दूध उबलकर बाहर निकलना शुभ माना जाता है। दूध उबलने के बाद तीन बार पोंगल बोलकर उसमें चावल डालते है।

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सीजन की पहली फसल जब कटकर आती है तो वही चावल काम लिया जाता है।  फिर उसमें गुड़, इलाइची और ड्राई फ्रूट्स डालकर शर्करई पोंगल बनाते है। इससे भगवान को भोग लगता है। सूर्य भगवान को केले के पत्तों में 21 सब्जियों, ईख, अदरक, हल्दी और शर्करई पोंगल का भोग लगाते है। पोंगल को खेती-बाड़ी का त्योहार मानते है। इसलिए उन सभी को ध्नयवाद दिया जाता है जिनके कारण फसल पैदा होती है।

पशुओं के प्रित कृतज्ञता प्रकट करने के लिए माट्टु पोंगल मनाते है। बैलों को नहलाकर उन्हें सजाकर उनकी पूजा की जाती है। किसान के परिवार, बच्चे और बड़े सभी खुशी मनाने के लिए कान्नम पोंगल मनाते है। इस त्योहार पर अलग-अलग तरह के चावल बनाए जाते है और सभी लोग साथ में बैठकर खाते है। मानव मन में एकता का भाव पैदा करने के लिए यह त्योहार खास है। साल में एक बार आने वाले इस त्योहार की मिठास सालभर रहती है।

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