सांसद विकास निधि का हिसाब

Samachar Jagat | Tuesday, 04 Sep 2018 02:53:46 PM
Account of MP Development Fund

संसद निधि के ताजा आंकड़ों के मुताबिक आम लोगों के विकास पर खर्च होने वाले करीब 12 हजार करोड़ रुपए सांसदों की सुस्ती के चक्कर में या तो खर्च नहीं हो रहे या फिर अटके पड़े हैं। सांसद निधि पर दिल्ली में 30 अगस्त को हुई समीक्षा बैठक में इस धन राशि को खर्च करने और इसके इस्तेमाल पर नजर रखने वाले कामकाज पर चर्चा हुई। ऐसे में यह मामला अहम है कि सांसद विकास निधि की भारी-भरकम राशि खर्च नहीं हो पा रही है। लोकसभा और राज्यसभा के सांसद अपनी निधि के करीब 5 हजार करोड़ रुपए खर्च ही नहीं कर पाए हैं। इसलिए करीब 7 हजार करोड़ रुपए की अगली किस्त जारी नहीं हुई। 

धनराशि खर्च न कर पाने वालों में लगभग सभी राज्यों के सांसद शामिल है। इनमें दिग्गजों के भी नाम है। यहां तक कि बिहार, मध्यप्रदेश, राजस्थान और उत्तर प्रदेश, जिन्हें विकास की सबसे ज्यादा जरूरत की श्रेणी में रखा जाता है। उन राज्यों में भी सांसद निधि के 1600 करोड़ रुपए खर्च नहीं हो पाए हैं। इससे जाहिर तौर पर  लोग विकास के लाभ से वंचित रह गए हैं।

समीक्षा बैठक में राज्यों से संबंधित नोडल अधिकारी और साथ ही मिनिस्ट्री ऑफ प्लानिंग एंड इम्प्लीमेंटेंशन अधिकारी भी शामिल थे। यहां यह बता दें कि किसी सांसद का कार्यकाल खत्म होने के 18 महीने के भीतर उसके इलाके का काम पूरा कर सर्टिफिकेट जिला या नोडल अधिकारी को जमा कराना होता है। इसे यूटिलाइजेशन सर्टिफिकेट यानी उपयोग प्रमाण कहते हैं। साथ ही कार्यकाल के आडिट का भी प्रमाण पत्र आडिटर से लेना होता है। सांसद निधि के कामकाज के यही प्रमाण-पत्र या तो पहुंचते नहीं है और अगर पहुंचते भी है तो आधे-अधूरे होते है।

किसी में सांसद का नाम नहीं होता है तो किसी में ऑडिटर की मुहर नहीं होती है। इसके चलते प्रमाण पत्र पास नहीं होते हैं और आम जनता के विकास के हिस्से के करोड़ों रुपए फंसे रहते हैं। जैसा कि ऊपर कहा गया है कि सांसद का कार्यकाल खत्म होने के बाद 18 महीने यानी डेढ़ साल के भीतर काम पूरा करना होता है।

लेकिन आलम यह है कि 14वीं और 15वीं लोकसभा तथा राज्यसभा के मिलाकर कुल 1156 सांसदों के कामकाज का खाता अभी तक बंद नहीं हुआ है। इन सांसदों की निधि से होने वाले विकास कार्यों के बाद जरूरी कागजात देने की जिम्मेदारी नहीं निभाई गई। इनमें 204 खाते 14वीं लोकसभा सांसदों के बंद होने बाकी है, जबकि 15वीं लोकसभा के 318 लोकसभा सांसदों के खाते बंद होने बाकी है। राज्यसभा के 634 सांसदों के खाते अभी तक बंद नहीं हुए है। इस प्रकार कुल 1156 सांसदों के खाते बंद होने बाकी है।

जहां तक राज्यों की बात है उसमें उत्तर प्रदेश में 691.6 करोड़ रुपए, बिहार में 340.4 करोड़ रुपए, राजस्थान में 269.7 करोड़ रुपए और मध्य प्रदेश में 258.3 करोड़ रुपए खर्च नहीं हुए। इनमें उत्तर प्रदेश में 343 किस्तें, बिहार में 187 किस्तें, झारखंड में 71 किस्तें, दिल्ली में 64 किस्तें और उत्तराखंड में 30 किस्तें रूकी पड़ी है। दरअसल पैसा खर्च नहीं होने की वजह से सांसद निधि की अगली किस्त फंस जाती है। देशभर में सांसद निधि की कुल 2920 किस्तें अटकी है। सांसद निधि की एक किस्त 2.5 करोड़ यानी ढ़ाई करोड़ रुपए होती है। इस तरह इन किस्तों को रकम में जोड़े तो यह आंकड़ा 7 हजार 320 करोड़ रुपए बैठता है।


अटकी हुई किस्तें सर्वाधिक उत्तर प्रदेश की है। यहां यह बता दें कि सासंदों को साल में ढ़ाई-ढ़ाई करोड़ रुपए की दो किस्ते मिलती है। लोकसभा के सांसदों को कुल 10 और राज्यसभा के सांसदों को 12 किस्तें मिलती है। फंड जिस भी मद में खर्च करने के लिए लिया जाता है। उसे एक साल के भीतर खर्च करना होता है। प्रमाण पत्र के भीतर खर्च करना होता है। प्रमाण पत्र जमा न कराने पर अगली किस्त रोक दी जाती है। ऐसे में सांसद निधि के दायरे में किए जाने वाले विकास कार्यों पर अब तक तकनीक के जरिए नजर रखी जाएगी।

 इसके लिए सांसद जिन जगहों पर विकास कार्यों की सिफारिश करेंगे, उसकी जियो टैनिंग की जाएगी और मोबाइल एप के जरिए कामकाज में हो रही प्रगति की जानकारी रखी जाएगी। उन कार्यों की स्थिति की जानकारी सरकार के साथ मतदाता को भी मिलेगी। मोबाइल एप से फोटो, वीडियो भी  अपलोड किए जाएंगे। इसका मकसद पारदर्शिता और गुणवता निश्चित करना है।



 

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