वायुसेना के बाद नौ सेना के लिए भी अत्याधुनिक हेलीकॉप्टर की खरीद

Samachar Jagat | Wednesday, 10 Apr 2019 04:19:44 PM
After the Air Force, the purchase of state-of-the-art helicopter

अमेरिका पनडुब्बी और समुद्री युद्धपोत को नष्ट करने में सक्षम 24 ‘रोमियो’ (सी हॉक हेलीकोप्टर) भारत को देगा। अमेरिकी सरकार ने कांग्रेस को सूचित किया है कि 2.6 अरब डालर (16 हजार करोड़ रुपए) के अनुमानित करार को मंजूरी दे दी है। अमेरिकी सरकार ने कहा कि रोमियो हेलीकोप्टर की बिक्री से भारतीय नौ सेना की ताकत में वृद्धि होगी। पर इससे क्षेत्रीय सैन्य संतुलन प्रभावित नहीं होगा। दुनिया के सबसे अधिक अत्याधुनिक समुद्री हेलीकोप्टर ‘रोमियो’ समुद्र में दुश्मन की पनडुब्बियों को भेदने में सक्षम होगा। हिंद महासागर में चीन के आक्रामक रुख के मद्देनजर भारत के लिए ये हेलीकोप्टर अहम है। ये हेलीकोप्टर इस समय अमेरिकी नौ सेना में तैनात है। इस हेलीकोप्टर से समुद्र में भारत की ताकत बढ़ने जा रही है।

दुनिया के सबसे अत्याधुनिक एमएच 60 ‘रोमियो’ सी हॉक हेलीकोप्टर मिलने से भारतीय नौ सेना समुद्र में दुश्मन की पनडुब्बियों की तलाश कर सकेगी। इसके कॉकपिट में दो कंट्रोल है। इससे चीन के हिंद और प्रशांत क्षेत्र में बढ़ते प्रभाव पर नजर रखने में आसानी होगी। एमएच 60 ‘रोमियो’ सी हॉक की विशेषता यह है कि आधुनिक जीपीएस सिस्टम के साथ-साथ मिसाइलों को भी ले जाने में सक्षम है। कठिन से कठिन हालात में भी यह हेलीकोप्टर उड़ान भर सकते हैं।

ये हेलीकोप्टर भारतीय नौ सेना की मारक क्षमता को बढ़ाएंगे। ये पनडुब्बी और पोतों पर अचूक निशाना साधने में सक्षम है। समुद्र में तलाश और बचाव कार्यों में भी काफी उपयोगी है। सतह रोधी और पनडुब्बी रोधी युद्ध मिशन में सफलता मिलेगी। ये फ्रिगेट, विध्वंसक पोतो, विमान वाहक पोतों से संचालित होगा। लॉकडीड मार्टिन द्वारा निर्मित रोमियो भारत के पुराने हो चुके ब्रिटेन निर्मित सी किंग हेलीकोप्टर की जगह लेंगे। 

भारत को एक दशक से इन एमएच 60 आरसी हॉक हेलीकोप्टरों की आवश्यकता थी। अमेरिकी विदेश मंत्रालय ने अपनी अधिसूचना में कांग्रेस को बताया कि इस प्रस्तावित बिक्री की मदद से भारत और अमेरिका के सामरिक संबंध मजबूत होंगे। इससे अमेरिका की विदेश नीति और राष्ट्रीय सुरक्षा को मजबूत बनाने में भी सहायता मिलेगी। यहां यह बता दें कि यह अत्याधुनिक हेलीकोप्टर अमेरिका, आस्टे्रलिया के बाद केवल भारत के ही पास होगा। इस तरह की ताकत चीन और पाकिस्तान के पास भी नहीं है। 

अमेरिका द्वारा भारत को रोमियो हेलीकोप्टर दिए जाने की मंजूरी मिलने से भारत की रक्षा स्थिति बेहतर होगी। यहां यह बता दें कि इस हेलीकोप्टर की जबरदस्त ताकत है। यह 267 किलोमीटर प्रतिघंटा की रफ्तार से उड़ सकता है। 8 मीटर प्रति सेकंड की तेजी से सीधे ऊपर उठ सकता है। इस रोमियो हेलीकोप्टर का वजन 7 हजार किलोग्राम है। इस अत्याधुनिक हेलीकोप्टर का निर्माण सन् 2001 में किया गया। 

सन् 2005 में पहली बार अमेरिका ने इसका इस्तेमाल किया। इस समय दुनिया में 300 से अधिक एमएच 60 आरसी हॉक सेवा में है। 24 रोमियो हेलीकोप्टर भारत से पहले आस्ट्रेलिया ने खरीदे थे। यहां यह उल्लेखनीय है कि अभी कुछ समय पूर्व भारत की वायुसेना में अमेरिकी हेलीकोप्टर चिनकू को जंगी बेड़े में शामिल किया गया, जो भारी उपकरणों व वायुसैनिकों को एक स्थान से दूसरे स्थान पर पहुंचा देगा। इसके बाद अब भारत की नौ सेना (नेवी) के लिए भी अमेरिका से 2.6 अरब डालर मूल्य के 24 एमएच 60 आर हेलीकोप्टर, रोमियो, खरीदे जा रहे हैं।

इनके आने के बाद भारतीय नौ सेना की क्षमता यह हो जाएगी कि वह समुद्र की सतह और पानी के अंदर भी शत्रु की पनडुब्बी को भी मार गिरा सकता है। इन रोमियो हेलीकोप्टरों की मारक क्षमता के साथ-साथ इन्हें सागर के अंदर तलाश, खोज और राहत अभियान में भी लगाया जा सकता है। जैसा कि ऊपर लिखा जा चुका है रोमियो हेलीकोप्टर इस समय दुनिया का सबसे आधुनिक है। प्रशांत महासागर के साथ श्रीलंका के हबंगटोला और पाकिस्तान के ग्वादर बंदरगाह से भारत के इर्द-गिर्द हिंद महासागर और अरब सागर में चीन की नौ सैनिक गतिविधियां बढ़ जाने से भारत उसे नियंत्रण में रखने के लिए अपनी नौ सेना का बहुत ही तीव्र गति से विकास कर रहा है। इसके साथ ही भारत फ्रांस के सहयोग से मुंबई के मझगांव डाक यार्ड में युद्धक पनडुब्बियों और विध्वंसक जहाजों का निर्माण कर रहा है। 

चुनाव की गहमागहमी खत्म होने के साथ ही फ्रांस द्वारा भारत में उसकी फाइटर प्लेन का आयात और यहीं पर उनका निर्माण शुरू हो जाएगा। भारत में रूस की मदद से मिग फाइटर प्लेन का निर्माण भारत में चल ही रहा है। इसके साथ ही कानपुर स्थित भारतीय रक्षा मंत्रालय का फाइटर प्लेन तेजस का हिंदुस्तान एयरोनासित में बनना शुरू हो गया है। जो स्वदेशी निर्माण है। भारत रक्षा हथियारों में आत्मनिर्भर बनने की ओर तेजी से अग्रसर हो रहा है। एक लंबे अर्से तक भारत दुनिया का सबसे बड़ा शस्त्रों का आयातक देश रहा है लेकिन अब इस स्थिति में तेजी से परिवर्तन हो रहा है। अब ‘मेक इन इंडिया’ की नीति के तहत लगभग सभी हथियार देश भारत में ही युद्ध सामग्री व उपकरण बनाने लगे है। 

इसलिए यह भी प्रगति का पैमाना है कि अब हम दुनिया से सबसे ज्यादा और बड़े वे देश रहे जो दुनिया में सबसे ज्यादा हथियार खरीदता था, लेकिन अब दूसरे स्थान पर आ गए हैं और प्रथम स्थान पर दुनिया में सबसे ज्यादा हथियार खरीदने वाला देश भारत नहीं रहा और इस प्रथम स्थान पर सऊदी अरब आ गया है। एक लंबे समय तक भारत के अधिकांश सौदे ब्रिटेन और बाद में अमेरिका से होते रहे। अमेरिका में निक्सन युग में दोनों देशों के बीच राजनैतिक खिंचाव सर्वाधिक होने से भारत में उसका रक्षा भारत रूस से प्रारंभ किया था। सबसे बड़ा ग्राहक होने के नाते कई देश फ्रांस, जर्मनी, इटली भी भारत से रक्षा व्यापार के उत्सुक हो गए। यह भी भारत के लिए सुखद स्थिति है कि अब वह किसी एक देश पर निर्भर नहीं है। इस समय रक्षा के क्षेत्र में भारत और इजराइल परस्पर हित की दृष्टि से काफी नजदीक आ गए है। 

इजराइल भी भारत में रक्षा सामग्री का आयात के साथ यहां निर्माण भी करेगा। कई इजारइली हथियार व रक्षा उपकरण व यांत्रिकी सामग्री बनाने वाली कंपनियों ने भारत में प्लांट-कारखाने स्थापित करने के लिए जमीन मांगी है। भारत इजराइल से बराक 8 मिसाइल डिफेंस सिस्टम खरीद रहा है। जिसकी कीमत 5700 करोड़ रुपए है। इससे भारत इलेक्ट्रॉनिक्स लिमिटेड सहभागी निर्यात होगा। इस मिसाइल डिफेंस सिस्टम का प्रयोग भारत की तीनों सेनाओं आर्मी, एयरफोर्स व नेवी में हो सकेगा।



 

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