आम लोगों के पास हथियार

Samachar Jagat | Monday, 22 Apr 2019 04:26:24 PM
Arms to common people

हथियारों पर नजर रखने वाले जिनेवा स्थित संगठन ‘स्मॉल आम्र्स सर्वे’ की पिछले साल जून में प्रकाशित रिपोर्ट ‘एस्टिमेटिंग ग्लोबल सिविलियन हेल्ड फायर आम्र्स नंबर्स’ के अनुसार दुनिया भर में मौजूद एक अरब एक करोड़ छोटे हथियारों का 84.6 फीसदी सिविलियंस यानी आम नागरिक के पास है। आम नागरिक, यानी पुलिस और सशस्त्र बलों को छोडक़र बाकी सब। दूसरे शब्दों में कहें तो निजी सुरक्षा कंपनियों गैर सरकारी सशस्त्र संगठनों और गिरोहों को भी इसमें शामिल किया गया है। 

रिपोर्ट के अनुसार 2017 में कुल हथियारों का 13.2 प्रतिशत (13.30 करोड़) ही राज्य के नियंत्रण वाली सेना और 2.2 प्रतिशत (2.30 करोड़) विभिन्न सरकारी सुरक्षा एजेंसियों के पास था। रिवॉल्वर, सेल्फ लोडिंग पिस्टल, राइफल, कार्बाइन और असॉल्ट राइफल से लेकर लाइट मशीनगन तक को इस अध्ययन में शामिल किया गया है। इस तरह के हथियारों में पिछले दस सालों में 17 प्रतिशत की वृद्धि हुई है। इन्हें रखने वाले आम नागरिक मुख्यत: अमेरिका, भारत, चीन और पाकिस्तान के है। अमेरिका में दुनिया की सिर्फ 4 फीसदी आबादी रहती है, मगर वहां के नागरिकों के पास दुनिया के 40 फीसदी छोटे हथियार है। 

वहां लोगों के पास कुल 39 करोड़ 33 लाख यानी औसतन 10 नागरिकों पर 12 हथियार है। व्यू रिसर्च सेंटर के अनुसार 50 लाख से ऊपर के एक तिहाई अमेरिकियों के पास, जबकि 18 से 29 वर्ष आयु वर्ग के 28 प्रतिशत युवाओं के पास बंदूके हैं। इस मामले में अमेरिका के बाद भारत (7.11 करोड़) चीन (करीब 5 करोड़) पाकिस्तान (4.39 करोड़) और रूस (1.76 करोड़) का नंबर आता है। न्यूजीलैंड में आम लोगों के पास 12 लाख हथियार है। भारत की एक अलग खासियत यह है कि यहां आम लोगों के पास मौजूद 7.11 करोड़ हथियारों में से 6.4 करोड़ गैर कानूनी है, यानी उनका रजिस्ट्रेशन नहीं हुआ है। आम लोगों के पास हथियार होने का सबसे ज्यादा खामियाजा अमेरिका को भुगतना पड़ा है। वहां आए दिन कभी स्कूल में तो कभी बाजार या कंसर्ट में खुलेआम गोलीबारी होती रहती है। 2016 में अमेरिका में 64 प्रतिशत हत्याएं आग्नेयास्त्रो से हुई। 

1982 से 2016 तक 90 मास शूटिंग (जिनमें तीन या ज्यादा लोग मरे) की घटना घटी। इन घटनाओं के कारण वहां निजी तौर पर हथियार रखने के खिलाफ अभियान शुरू हुआ। पूर्व राष्ट्रपति बराक ओबामा तक हथियार रखने के अधिकार के खिलाफ थे, लेकिन हथियार लॉबी वहां इतनी मजबूत है कि ऐसे सारे अभियान बेअसर साबित होते हैं। भारत के लिए अवैध हथियार भारी चिंता का विषय है, खासकर इसलिए भी कि चुनाव में इनका इस्तेमाल वोटरों को धमकाने में किया जाता है। समृद्धि, सुरक्षा और स्मार्टनेंस के तमाम दावों के बावजूद आम लोगों का दिनोंदिन हथियारबंद होते जाना दुनिया को भला क्या बताता है। सिवाय इसके कि ये चीजे न तो हमें सुकून दे पा रही है और ना ही अच्छा इंसाना बना पा रही है।



 

यहां क्लिक करें : हर पल अपडेट रहने के लिए डाउनलोड करें, समाचार जगत मोबाइल एप। हिन्दी चटपटी एवं रोचक खबरों से जुड़े और अन्य अपडेट हासिल करने के लिए हमें फेसबुक और ट्विटर पर फॉलो करें!

loading...
ताज़ा खबर

Copyright @ 2019 Samachar Jagat, Jaipur. All Right Reserved.