सीमा पर सैनिकों के शहीद होने का सिलसिला

Samachar Jagat | Monday, 12 Feb 2018 09:50:23 AM
army continue Martyrdom on border

जम्मू-कश्मीर में पाकिस्तान की ओर से सीमा पार से हो रहे हमलों का सिलसिला जारी है। पाकिस्तान संघर्ष विराम का उल्लंघन करके भारतीय सीमा के अंदर हमले कर रहा है और इसकी आड़ में घुसपैठ करा रहा है। आमतौर पर सर्दियों में संघर्ष विराम का उल्लंघन और घुसपैठ दोनों कम हो जाते हैं। पहाड़ों पर जमी बर्फ की वजह से घुसपैठिए अंदर नहीं आ पाते हैं। तभी सीमा पार के घुसपैठिए बर्फ जमने से पहले या बर्फ पिघलने के बाद भारत की सीमा में घुसने का प्रयास करते थे। अभी ऐसा नहीं हो रहा है। पूरे साल उनकी कोशिश जारी रहती है। उनको अंदर घुसाने के लिए पाकिस्तान की फौजे भारी हथियारों से गोलियां चलाती है। 

पाकिस्तान की ओर से संघर्ष विराम का उल्लंघन करके की गई फायरिंग में इस साल अब तक भारतीय सुरक्षा बलों के दस जवान शहीद हो चुके हैं और सात आम नागरिक मारे गए हैं। सैकड़ों की संख्या में लोग घायल हुए हैं और सीमा पर स्थित गांवों में दहशत का माहौल है। स्कूल बंद कर दिए गए हैं और लोग गांव छोडक़र जा रहे हैं। पाकिस्तान से लगी सरहद पर खासकर नियंत्रण रेखा पर दोनों तरफ के सैनिकों के बीच झड़प हो जाना कोई नई बात नहीं है। ऐसे वाकये अरसे से हो रहे हैं, लेकिन पिछले रविवार को जो कुछ हुआ उसे एक और झड़प भर मान कर हल्कें में नहीं लिया जा सकता। पाकिस्तानी सेना ने पहली बार शांतिकाल में यानी जब घोषित युद्ध की स्थिति न हो भारतीय सैन्य चौकी को मिसाइल से निशाना बनाया। साथ ही पाकिस्तानी फौज ने जम्मू-कश्मीर के राजौरी और पुंछ जिलों में नियंत्रण रेखा पर भारी गोलाबारी की। इस सबसे एक कैप्टेन समेत चार भारतीय सैनिक शहीद हो गए।

 इसके अलावा तीन जवानों सहित पांच लोग घायल हुए है।  कई बार निश्चित रूप से यह कह पाना मुश्किल होता है कि उकसावा किस तरफ से शुरू हुआ और टकराव के लिए कौन दोषी है। पर पाकिस्तानी फौजी की मनमानी इसी से जाहिर होती है कि उसने भारतीय सैन्य चौकी और भारतीय सैनिकों को लक्ष्य कर गोलाबारी करने से पहले गांवों को भी निशाना। इससे एक किशोरी और एक जवान घायल हो गए। ऐसे में पाकिस्तान की तरफ से संघर्ष विराम के उल्लंघन में कोई संदेह नहीं रह गया है। इसका कड़ाई से जवाब दिया जाना चाहिए। यहां यह उल्लेखनीय है कि वर्ष 2003 में भारत और पाकिस्तान के बीच जो संघर्ष विराम का समझौता हुआ था, उसका असर एक दशक तक साफ नजर आता रहा। समझौते से पहले के दशक की तुलना में समझौते के बाद के दशक में नियंत्रण रेखा पर झड़प और हिंसा की घटनाएं काफी कम हुई। लेकिन पिछले कुछ बरसों में ऐसी घटनाओं का सिलसिला बढ़ा है और उनकी भयावहता भी बढ़ी है।  वर्ष 2016 में पाकिस्तान ने 221 बार संघर्ष विराम का उल्लंघन किया था। लेकिन अगले साल यानी 2017 में ऐसी घटनाओं की तादाद 860 पर पहुंच गई।

 भारतीय ने भी ऐसी कारगुजारियों का करारा जवाब दिया है। पिछले साल नियंत्रण रेखा पर भारतीय फौज की कार्रवाई से पाकिस्तान के एक सौ अड़तीस (138) सैनिक मारे गए और 155 सैनिक घायल हो गए पर संघर्ष विराम के उल्लंघन का सिलसिला थमा नहीं है। कहीं ऐसी घटनाओं में बढ़ोतरी, घुसपैठ को रोकने के भारत के जोरदार प्रयासों से परेशान पाकिस्तान की हताशा का नतीजा तो नहीं है। जो भी हो नियंत्रण रेखा पर बेहद सावधान और किसी भी स्थिति से तत्काल निपटने के लिए तत्पर रहने की जरूरत है। भारत की चिंता इसलिए बढ़ी है क्योंकि पाकिस्ताान की ओर से अब ऐसे भारी हथियारों से हमला हो रहा है, जो पहले लड़ाई में इस्तेमाल होते थे। पाकिस्तान की ओर से मिसाइल दागे जाने की खबर है। इसी साल अब तक इस तरह की 170 घटनाएं हो चुकी है। इस वजह से सीमा पर भय और आतंक का माहौल है। पाकिस्तान की तरफ से एक तरह से अघोषित युद्ध चल रहा है और वह सीमा पर मोर्टार से लेकर मिसाइल तक का इस्तेमाल कर रहा है। 

भारतीय सेना पाकिस्तान की ओर से होने वाली फायरिंग का जोरदार जवाब दे रही है। सीमा सुरक्षा बल की फायरिंग में पाकिस्तान के जवान भी मारे गए हैं। एक बार सेना सर्जिकल स्ट्राइक कर चुकी है और एक बार मिनी स्ट्राइक कर चुकी है। पाकिस्तान ने कई भारतीय राजनयिकों को बुलाकर इसकी शिकायत की है। पर ऐसा लग रहा है कि पाकिस्तान बौखलाहट में इस किस्म की कार्रवाई कर रहा है। भारत सरकार ने जम्मू-कश्मीर में कई तरह के अभियान शुरू किए हैं। सुरक्षा बलों ने आतंकवादियों को खोजों और मारो का अभियान चलाया। इस अभियान के तहत आतंकवादियों को खोजकर मारा जा रहा है। इस वजह से लग रहा है कि पाकिस्तान स्थित आतंकवादी संगठनों के सरगना परेशान हुए हैं। ऊपर से भारत ने अंतरराष्ट्रीय बिरादरी में माहौल बनाकर पाकिस्तान पर कूटनीतिक दबाव बनाया है। सुरक्षा बलों की सख्त कार्रवाई और कूटनीतिक दबाव बनाने से परेशान होकर पाकिस्तान ने भारत के खिलाफ छद्म युद्ध तेज कर दिया है। भारत को निश्चित रूप से दबाव बनाए रखना चाहिए, पर यह भी सुनिश्चित करना चाहिए कि सैनिकों की जान न जाए।

 यहां यह उल्लेखनीय है कि रूस के ऊझा शहर में शंघाई सहयोग संगठन की बैठक के समय प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की तत्कालीन प्रधानमंत्री नवाज शरीफ से सीमा पर शांति बनाए रखने के मसले पर बातचीत हुई थी। तय हुआ था कि दोनों तरफ से सैन्य कार्रवाई महानिदेशक समय-समय पर मिलेंगे और कोई भी शिकायत या गलतफहमी आपसी संवाद से दूर करेंगे, बाकी द्विपक्षीय मुद्दों पर भले दुराव और तनाव रहे सरहद पर शांति बनाए रखी जाएगी।

पर ऊझा में बनी इस सहमति को पाकिस्तान भूल चुका है। यह साफ दिख रहा है कि पाकिस्तान संघर्ष विराम समझौते को लेकर कतई संजीदा नहीं है। बेशक भारत ने पाकिस्तान को परेशान किया है और इससे वहां के आतंकवादी सरगना भी बेचैन हुए हैं। पर शांतिकाल में इतनी बड़ी संख्या में भारतीय सुरक्षा बलों की शहादत भी बेचैन करने वाली है। बिना प्रत्यक्ष युद्ध के इतनी बड़ी संख्या में सैनिक कभी शहीद नहीं हुए। सरकार को तत्काल इसे रोकने के लिए काम करना चाहिए। सीमा पर इतने सैनिकों का शहीद होना भारत की सामरिक स्थिति के लिए भी चुनौती है।



 

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