चुनाव प्रचार में प्लास्टिक के बैनर, पोस्टर पर रोक

Samachar Jagat | Monday, 11 Mar 2019 01:23:49 PM
Ban on plastic banners, posters in election campaign

चुनाव आयोग ने आने वाले लोकसभा चुनावों में चुनाव प्रचार के प्लास्टिक के बैनर, पोस्टर, होर्डिंग और कटआउट लगाने पर रोक लगा दी है। आयोग ने कहा है कि जो उम्मीदवार इसका प्रयोग करते पाया गया तो उससे इस कचरे के निपटान का खर्च वसूला जाएगा। भारत निर्वाचन आयोग ने सभी मान्यता प्राप्त राज्यीय और राष्ट्रीय राजनैतिक दलों को पत्र लिखकर इसकी सूचना दे दी है। यह सूचना सभी राज्यों के मुख्य निर्वाचन अधिकारियों और जिला निर्वाचन अधिकारियों को भेजी गई है। 

आयोग ने कहा है कि चुनाव को पर्यावरण अनुकूल बनाने की जरूरत है। प्लास्टिक के बैनर और प्रचार सामग्री चुनाव के बाद जिस तरह से सडक़ों पर पड़ी रहती है वह पर्यावरण के खिलाफ है और लोगों की सेहत पर इसका बुरा असर पड़ता है। यह प्लास्टिक पीवीसी की बनी होती है तो जलाने पर खतरनाक धुआं हवा में फैलाती है। आयोग ने कहा है कि प्रचार सामग्री के लिए कंपाजिट प्लास्टिक, रिसाइकिल्ड पेपर, प्राकृतिक फेब्रिक का इस्तेमाल किया जा सकता है, जो कम प्रदूषण फैलाते हैं। आयोग ने कहा है कि जो भी उम्मीदवार, राजनैतिक दल यह नियम नहीं मानेगा प्लास्टिक और ठोस कचरा निष्पादन रूल, 2016 के तहत इसके निष्पादन में आने वाला खर्च वसूला जाएगा। यहां यह बता दें कि हर साल 13 लाख टन प्लास्टिक का इस्तेमाल होता है। 

भारत में हर साल 9 लाख टन प्लास्टिक कचरा निकलता है। 60 फीसदी प्लास्टिक रिसाइकिल किया जाता है। भारत में प्लास्टिक कारोबार 11 हजार करोड़ का है। इस बारे में बताया गया है कि प्लास्टिक स्वाभाविक नष्ट होने की अवधि थैली की 20 से एक हजार साल, बोतल 450 साल, कप 50 साल और परत वाले पेपर कप 30 साल लगते हैं, इसके नष्ट होने। यहां यह भी उल्लेखनीय है कि 25 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में पॉलीथीन पर पूर्ण या आंशिक प्रतिबंध है। देश के शहरों में हर रोज 15 हजार टन से अधिक प्लास्टिक कचरा पैदा होता है। इसमें से 9 हजार टन कचरा ही प्रसंस्कृत या रिसाइकिल किया जाता है। यहां यह उल्लेखनीय है कि चुनाव आयोग ने चुनाव प्रचार में प्लास्टिक के बैनर और पोस्टर पर रोक इसलिए लगाई क्योंकि आगामी लोकसभा चुनावों के मद्देनजर राष्ट्रीय हरित अधिकरण ने चुनाव आयोग, पर्यावरण एवं वन और जलवायु परिवर्तन मंत्रालय और केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण की एक बैठक कर यह विचार करने को कहा है कि क्या चुनावों के दौरान प्लास्टिक से बनी प्रचार सामग्री के इस्तेमाल पर पाबंदी लगाई जा सकती है।


 राष्ट्रीय हरित अधिकरण की इस पहल पर ही निर्वाचन आयोग ने इस पर रोक लगाने का फैसला किया है। यह देखने में आया है कि सडक़ पर दिखने वाले ज्यादातर प्रचार के बैनर-पोस्टरों में भी कागज का इस्तेमाल घटा है और इसकी जगह प्लास्टिक ने ले ली है। किसी भी चुनाव के मौके पर चारों तरफ प्लास्टिक के पोस्टर, बैनर से होर्डिंग्स या दीवारें पटी रहती है। जाहिर है इन सबको लगाने वाले कोई न कोई राजनीतिक दल ही होते हैं। लेकिन चुनावों के बाद कोई भी पार्टी इतनी संवेदनशीलता नहीं दिखाती कि कचरा बन चुके प्लास्टिक के पोस्टर या बैनरों को हटाकर ऐसी जगह भिजवा दे, जहां उसके उचित निपटान की व्यवस्था हो। प्लास्टिक से पर्यावरण को होने वाले नुकसानों के तथ्य छिपे नहीं है। इसके खतरों के मद्देनजर सरकारें इस पर रोक लगाने की जुबानी घोषणा अक्सर करती दिखती है। लेकिन अब तक इस पर पूरी तरह रोक लगाने को लेकर सख्ती बरतने के लिए कोई भी सरकार वास्तव में गंभीर नहीं दिखी है। 

चुनाव आयोग ने इस पर रोक लगाकर एक आदर्श उपस्थित किया है। चुनाव आयोग चुनाव प्रक्रिया के हर नियम-कायदे को तय करना है और उसके हर आदेश को मानना सभी राजनीतिक दलों के लिए बाध्य होता है। प्लास्टिक से होने वाले नुकसान के मद्देनजर चुनाव आयोग ने प्लास्टिक की प्रचार-सामग्री के इस्तेमाल पर पाबंदी लगा दी है। इसी तरह प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड और संबंधित महकमों की भी यह जिम्मेदारी बनती है कि प्लास्टिक से तैयार इन सामग्रियों और इनसे होने वाले पर्यावरण के नुकसानों को रोकने के लिए ठोस कदम उठाएं।  



 

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