कर्ज में बड़ी राहत की उम्मीद को झटका

Samachar Jagat | Tuesday, 09 Apr 2019 04:37:09 PM
Big hope of relief in debt shocks

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रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया (आरबीआई) ने नीतिगत ब्याज दर में कमी तो कर दी है, लेकिन इसका पूरा फायदा बैंकों द्वारा ग्राहकों को देने की उम्मीदों को झटका लगा है। दरअसल भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) ने एक अप्रैल से बाहरी मानकों के आधार बैंकों से ब्याज दर तय करने का दिशा निर्देश जारी किया था, लेकिन इसे आगे टाल दिया गया है। रिजर्व बैंक गवर्नर शक्तिकांत दास ने बीते गुरुवार को कहा कि इस मुद्दे पर बैंकों से आगे और बातचीत की जाएगी। विशेषज्ञों का कहना है कि इससे बैंक ब्याज दर में 0.25 फीसदी की कटौती का पूरा लाभ देने की बजाए पिछली बार की तरह 0.05 से 0.10 फीसदी की कटौती ही कर्ज की दरों में कर सकते हैं। बैंक रेपो दर में कमी का कुछ हिस्सा लागत कम करने और एनपीए की भरपाई करने में करेंगे।

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रिजर्व बैंक ने बाहरी आधार दर के अनुसार सभी तरह के फ्लेटिंग रेट, निजी या खुदरा ऋण या छोटे या मझोले उद्योगों को दिए जाने वाले कर्ज की दरों को एक अप्रैल से लागू करने का तय किया था इस बारे में रिजर्व बैंक गवर्नर का कहना है कि अर्थव्यवस्था को गति देने के लिए जरूरी है कि बैंक रेपो दर में कटौती का लाभ प्रभावी ढंग से आगे ग्राहकों तक पहुंचाए। लेकिन लगातार दो बार ब्याज दर में कटौती का पूरा हस्तांतरण अभी संभव दिखाई नहीं देता। अभी अंतिम दिशा निर्देश जारी होने में वक्त लगेगा। नई मौद्रिक नीति में सबसे ज्यादा ध्यान आकर्षित करने वाली बात है रेपो दरों में 25 अंक या दूसरे शब्दों में कहें तो 0.25 फीसदी की कटौती। ऐसी कटौती आम चर्चा का विषय इसलिए बन जाती है क्योंकि यह मामला सीधे मध्यवर्ग से जुड़ता है। 

इससे घर और वाहन आदि पर लिए गए कर्ज सस्ते हो जाते हैं। हालांकि पूरी अर्थव्यवस्था के लिहाज से देखे तो इसके अर्थ काफी बड़े भी हो सकते हैं। इससे उद्योगों को सस्ता कर्ज मिलता है, जिससे नए उद्योग लगने का रास्ता थोड़ा और खुलता है। इसलिए ज्यादातर उद्योग संगठनों ने इसकी मांग भी की थी। हालांकि कुछ लोगों को उम्मीद थी कि रिजर्व बैंक रेपो दर को 0.5 फीसदी तक नीचे लाने का बड़ा फैसला कर सकता है। लेकिन बैंक ने कठिन समय में इतनी बड़ी दरियादिली न दिखाना ही बेहतर समझा। देश में डिजिटल भुगतान में उछाल के साथ बढ़ती शिकायतों के निवारण के लिए जल्द ही लोकपाल बनेगा, जो पेमेंट वॉलेट, प्रीपेडइंस्ट्रमेंट, यूपीआई से जुड़ी ग्राहकों की शिकायतों की सुनवाई करेगी। आरबीआई ने कहा है कि सभी भुगतान प्रणालियों से जुड़ी ग्राहकों की शिकायतों के लिए मुआवजा तंत्र बनेगा। गवर्नर का कहना था कि दिशा निर्देश होने के बावजूद ग्राहकों की शिकायतें आ रही है।

केेंद्रीय बैंक ने इससे पहले दिसंबर 2018 को मौद्रिक समीक्षा में संकेत दिया था कि डिजिटल पेमेंट के लिए जून 2019 तक बैंकिंग से अलग एक लोकपाल काम करने लगेगा। केंद्रीय बैंक ने कहा है कि ग्राहकों को डिजिटल भुगतान प्रणाली में बेहतर सेवाओं के लिए लोकपाल काम करेगा, जो पीडि़त पक्ष को मुआवजा और आरोपी कंपनी पर जुर्माना लगाने जैसे अधिकारों से लैस होगा। आरबीआई ने बैंकिंग लोकपालके तहत नॉन डिपाजिट गैर बैंकिंग वित्तीय कंपनियों को भी ला दिया है। अब सौ करोड़ रुपए तक की ऐसी कंपनियों के ग्राहकों से जुड़ी शिकायतें बैंकिंग लोकपाल सुनेगा। 

इससे पहले जमा लेने वाली एनबीएफसी लोकपाल के दायरे में थी। मानसून के साथ अगली सरकार को लेकर भारी अनिश्चितता है। राजकोषीय घाटा भी लक्ष्य के पार जाने की आशंका है, जिसका भी असर महंगाई पर पड़ेगा। इन सब मुद्दों पर सोच समझकर ही आरबीआई ने फैसला लिया है। इस साल के मानसून में अगर थोड़ी सी कसर रह गई तो खाद्य पदार्थों की महंगाई तेजी से बढ़े तो आम जनता की जिंदगी के लिए इससे दुखदायी कुछ नहीं होता। मौद्रिक नीति से लगता है कि रिजर्व बैंक किसी भी आशंका से निपटने के लिए तैयार है।

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