सद्गुणों को आदत बनाने से वे जीवन चरित्र बन जाते हैं

Samachar Jagat | Wednesday, 05 Sep 2018 01:15:20 PM
By making habit of virtues, they become the life character

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 एक बार एक युवक जंगल में से गुजर रहा था। उसे सामने से आती हुई चार स्त्रियां मिली। उस युवक ने पहली स्त्री से उसका नाम पूछा- बहन जी! तुम्हारा नाम क्या है? उस स्त्री ने मुस्कुराते हुए कहा- मेरा नाम तो लज्जा है। युवक ने फिर से पूछा- तुम कहां रहती हो? उस स्त्री ने जवाब दिया कि मेरे रहने का स्थान तो आंख है। इसके बाद उस व्यक्ति ने दूसरी स्त्री से पूछा- बहन! तुम्हारा क्या नाम है? स्त्री ने जवाब दिया कि मेरा नाम तो बुद्धि है। युवक ने दुबारा से उस स्त्री से पूछा कि तुम्हारे रहने का स्थान कहां है? स्त्री ने तुरंत जवाब दिया कि मेरे रहने का स्थान तो दिमाग है।

इसके बाद युवक ने तीसरी स्त्री से पूछा- बहन! तुम्हारा क्या नाम है? स्त्री ने तपाक से जवाब दिया कि मेरा नाम तो हिम्मत है। युवक ने कहा कि तुम्हारे रहने का स्थान कहां है? स्त्री ने कहा कि मैं तो दिल में रहती हूं। इसके उपरांत उसने चौथी स्त्री से पूछा- बहन! तुम्हारा क्या नाम है? उसने कहा कि भैया, मेरा नाम तंदरूस्ती है। युवक ने कहा कि तुम्हारे रहने का स्थान कहां है? इस पर स्त्री ने कहा कि मेरे रहने का स्थान तो पेट है।

वह युवक स्त्रियों से इस तरह परिचय कर आगे बढ़ा ही था कि उसे सामने से आते हुए चार पुरूष मिल गए। व्यक्ति ने प्रथम पुरूष से पूछा- भाई, तुम्हारा क्या नाम है? पुरूष ने तुरंत जवाब दिया कि मेरा नाम तो क्रोध है, तुम रहते कहां हो? युवक ने पूछा। क्रोध ने कहा कि दिमाग में रहता हूं। ऐसा सुनते ही युवक ने कहा कि दिमाग में तो बुद्धि रहती है। ऐसा सुनते ही युवक ने कहा कि जब दिमाग में मेरा प्रवेश होता है तो बुद्धि वहां से भाग जाती है। युवक ने दूसरे पुरूष से उसका नाम पूछा तो उसने अपना नाम लालच बताया। 

युवक ने उससे उसके रहने का स्थान पूछा तो युवक को अपने रहने का स्थान आंख बताया। युवक चौंककर बोल उठा कि वहां तो लज्जा रहती है। इस पर पुरूष ने कहा कि जब मैं आंख में प्रवेश करता हूं तो वहां से लज्जा भाग जाती है। युवक ने तीसरे पुरूष से पूछा कि तुम्हारा क्या नाम है, ऐसा पूछने पर उसने अपना नाम भय बताया और अपना रहने का स्थान दिल बताया। युवक ने पुरूष से कहा कि दिल में तो हिम्मत रहती है, इस पर भय ने कहा कि जब मैं दिल में प्रवेश करता हूं तो वहां से हिम्मत भाग खड़ी होती है। अब युवक ने चौथे और अंतिम व्यक्ति से उसका नाम और रहने का स्थान पूछा तो उसने अपना नाम रोग और रहने का स्थान पेट बतलाया। युवक ने कहा कि वहां तो तंदरूस्ती रहती है, पुरूष ने कहा कि मैं जब तक वहां नहीं जाता हूं तब तक ही तंदरूस्ती वहां रहती है, मेरे जाते ही दुम दबाकर वह भाग जाती है। इस प्रतीकात्मक कहानी से यही निष्कर्ष निकल कर आता है कि व्यक्ति को हमेशा बुद्धि, लज्जा, हिम्मत और तंदरूस्ती को अपने पास हर हाल में रखना चाहिए।

प्रेरणा बिन्दु:- 
व्यक्ति को मानवीय गुण बहुत बुलंदियां देते हैं, अजर-अमर करते हैं जबकि अवगुण उसे रसातल की ओर ले जाते हैं।
 

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