अश्वगंधा से कैंसर का इलाज

Samachar Jagat | Saturday, 07 Oct 2017 01:48:54 PM
Cancer treatment from Ashwagandha

भारत के परंपरागत चिकित्सा ज्ञान पर शोध कर रहे जापानी वैज्ञानिकों की एक टीम ने दावा किया है कि अश्वगंधा से कैंसर का सुरक्षित दवा बनाई जा सकती है। चूहों पर किए गए परीक्षण में पाया गया कि अश्वगंधा के पत्तों से मिले खास तत्व शरीर में कैंसर कोशिकाओं को चुन-चुनकर मारने में सक्षम है। जापान के नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ एडवांस इंडस्ट्रीयल साइंस एंड टेक्नोलॉजी (एआईएसटी) में चीफ सीनियर रिसर्च साइंटिस्ट डॉ. सुनील कौल ने एक अखबार को बताया कि आयुर्वेद में अश्वगंधा के कैंसर में उपचार का जिक्र है। लेकिन उनके संस्थान ने क्लीनिकल शोध से इस दावे की पुष्टि की है।

डॉ. कौल के अनुसार अश्वगंधा के पत्ते से निकाले गए तत्व जिसे आईएक्सट्रेक्ट नाम दिया गया है। इससे चूहों के शरीर में कैंसर कोशिकाओं को चिन्हित कर उन्हें मारने में सफलता पाई गई। अब तक दुनिया में कैंसर की जितनी भी दवाएं बनी है उसमें सबसे बड़ी समस्या यह है कि वे कैंसर कोशिकाओं के साथ-साथ सामान्य कोशिकाओं को भी नष्ट कर देती है, लेकिन डॉक्टरों की टीम का मानना है कि अश्वगंधा के रूप में ऐसा प्राकृतिक तत्व मिला है, जिसके जरिए कैंसर की अब तक की सबसे सुरक्षित दवा बनाने की राह खुल रही है। टीम के अनुसार भारत-जापान के बीच हुए समझौते के तहत भारतीय जड़ी बूटियां की मॉलिक्यूलर संरचना को समझना है। इसके तहत तनाव, बुढ़ापे से जुड़ी बीमारियों एवं कैंसर का निदान ढूंढा जाना है।

इसी कड़ी में अश्वगंधा के कैंसररोधी गुणों की पुष्टि की गई है। अश्वगंधा पर कई शोध प्रोजेक्ट जापान में शुरू किए गए हैं। कैंसर के अलावा इसके अल्जाइयर और पार्किंसन रोग में भी कारगर होने की पुष्टि हुई है। हाल ही में जापान के प्रधानमंत्री शिंजो आबे की अहमदाबाद यात्रा के दौरान इस समझौते को आगे भी जारी रखने पर सहमति जताई गई है। अब तक हुई प्रगति की भी जानकारी समझौते में साझा की गई है। जापानी वैज्ञानिकों ने अश्वगंधा को प्रयोगशाला में उगाना शुरू कर दिया है। वे इसके एंटी कैंसर गुणों के साथ-साथ अन्य प्रभावों पर भी शोध कर रहे हैं। आयुर्वेद विशेषज्ञ डॉ. रामनिवास पाराशर के अनुसार यदि आयुर्वेद के फार्मूले की आधुनिक विज्ञान की कसौटी पर परख होती है और इसके परीक्षण होते हैं तो आने वाले दिनों में कई बीमारियों का इलाज निकल सकता है। केंद्र सरकार ने आयुर्वेद के फार्मूले के ज्ञान को सुरक्षित रखने के लिए डिजिटल नॉलेज लाइब्रेरी तैयार की है, जिसमें तीन लाख फार्मूले हैं। इन पर कोई देश पैटेंट नहीं ले सकता है।

यहां यह बता दें कि अश्वगंधा आयुर्वेदिक चिकित्सा पद्धति में प्रयोग किया जाने वाला एक महत्वपूर्ण पौधा है। इसकी ताजा पत्तियों और जड़ों में घोड़े की मूत्र की गंध आने के कारण ही इसका नाम अश्वगंधा पड़ा है। भारत में इसकी दो प्रजातियां ही पाई जाती है। पौधे की जड़े शक्तिवर्धक और पौष्टिक होती है। यह शरीर को शक्ति प्रदान कर बलवान बनाती है। अश्वगंधा की जड़ों का पाउडर का प्रयोग खांसी एवं अस्थमा को दूर करने के लिए भी किया जाता है। महिला संबंधी बीमारियों जैसे श्वेत प्रदर अधिक रक्तस्त्राव में लाभप्रद है। तंत्रिका तंत्र संबंधी कमजोरी को भी दूर करने को प्रयोग किया जाता है।

गठिया एवं जोड़ों के दर्द को ठीक करने के लिए भी अश्वगंधा की जड़ों के चूर्ण का प्रयोग किया जाता है। अश्वगंधा की जड़ों को त्वचा संबंधी बीमारियों के निदान के लिए भी प्रयोग में लाया जाता है। हमारे देश में अनेक ऐसे पौधे हैं जिनका आधुनिक विज्ञान की कसौटी पर परखा जाए तो अनेक असाध्य बीमारियों का इलाज संभव है। राजस्थान में अश्वगंधा के अलावा अतिबवा, शंखपुष्पी ऐसे गुणकारी पौधे हैं, जिनसे बल और बुद्धि दोनों ही बढ़ोतरी में प्रयोग किया जा सकता है।
 

 

यहां क्लिक करें : हर पल अपडेट रहने के लिए डाउनलोड करें, समाचार जगत मोबाइल एप। हिन्दी चटपटी एवं रोचक खबरों से जुड़े और अन्य अपडेट हासिल करने के लिए हमें फेसबुक और ट्विटर पर फॉलो करें!

loading...
ताज़ा खबर

Copyright @ 2017 Samachar Jagat, Jaipur. All Right Reserved.