केंद्र ने सोशल मीडिया हब का फैसला वापस लिया

Samachar Jagat | Saturday, 11 Aug 2018 10:29:24 AM
Center withdraws decision on social media hub

केंद्र सरकार ने सोशल मीडिया हब बनाने का फैसला वापस ले लिया है। केंद्र सरकार के प्रस्तावित हब को लेकर यह आरोप लग रहा थ कि यह नागरिकों की ऑनलाइन गतिविधियों पर नजर रखने का हथियार बन सकता है। सुप्रीम कोर्ट ने भी इस पर सख्त रुख अपनाया था। 13 जुलाई को पिछली सुनवाई में कोर्ट ने कहा था कि यह निगरानी राज बनाने जैसा होगा। केंद्र सरकार ने इसके बाद सुप्रीम कोर्ट को सूचित किया कि सोशल मीडिया हब बनाने के प्रस्ताव वाली अधिसूचना वापस ले ली गई है और सरकार अपनी सोशल मीडिया नीति की गहन समीक्षा करेगी। यहां यह बता दें कि पिछले कुछ समय के सोशल मीडिया को लेकर पूरा देश और समाज दुविधा में है। 

यहां तक करना मुश्किल हो रहा है कि इसका किस रूप में इस्तेमाल किया जाए? इसे किस तरह नियंत्रित किया जाए? दरअसल भारत जैसे विशाल देश में इसके एकदम दो छोर है। एक तरफ असामाजिक तत्वों द्वारा इसके जबर्दस्त दुरूपयोग की आशंका है। पिछले दिनों देखने में आया कि कुछ वाट्सऐप मैसेज कई लोगों की मौत का कारण बन गए। पहले गोरक्षा, फिर बच्चा चोरी के नाम पर अनेक निर्दोष लोगों की हत्या हुई। लेकिन इसकी ओर यह भी आशंका है कि इसके नियंत्रण के लिए बनाई जाने वाली कोई व्यवस्था कहीं सरकारी पक्ष के हित मेें न काम करने लग जाए। राजनीतिक तबके द्वारा अपने सियासी स्वार्थ के लिए इसके इस्तेमाल के उदाहरण भी हमारे सामने मौजूद है।

 इसलिए दोनों तरह की आशंकाओं का निराकरण जरूरी है। लेकिन हमारा देश जनतंत्र के जिस मुकाम पर पहुंच चुका है वहां ऐसी किसी व्यवस्था को मंजूरी नहीं दी जा सकती, जो किसी भी तरह से नागरिकों की निजता के अधिकार का उल्लंघन करती हो। इसलिए ऐसा रास्ता निकालना होगा, जिस पर किसी भी पक्ष का एतराज न हो। वाट्सऐप के दुरूपयोग की पिछले दिनों जब चर्चा शुरू हुई तो कंपनी ने खुद ही इसे रोकने की कोशिश की। कंपनी ने ऐसी व्यवस्था की कि यूजर्स भारत में सिर्फ पांच लोगों को ही वीडियो, फोटो शेयर कर सके। जैसे ही पांच बार वीडियो और फोटो शेयर किए जाएंगे, उसके बाद फार्वड ऑप्शन हटा लिया जाएगा। इधर फर्जी खबरों को लेकर आलोचना का सामना कर रहे वाट्सऐप ने इससे निपटने के लिए एक स्थानीय टीम बना रहा है। लेकिन निजी स्वरूप का हवाला देते हुए उसने सरकार को फर्जी खबरों के स्त्रोत बताने से इनकार कर दिया है। सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय के नोटिस का जवाब वाट्सऐप ने भेजा है।

 उसमें कंपनी ने अपने नेटवर्क पर फर्जी खबरों के प्रसार पर अंकुश लगाने की उपायों की जानकारी देने के साथ-साथ लोगों की शिक्षित करने और जागरूक करने के लिए अपने प्रयासों का उल्लेख किया है। कंपनी ने कहा है कि भारत में ही वह अपनी टीम खड़ी करने में लगी है। सरकार चाहती थी कि ऐसे संदेशों का मूल स्त्रोतों का पता लगाने के साथ-साथ उसकी पहचान बताई जाए, लेकिन कंपनी ने इससे इनकार कर दिया है क्योंकि संदेश के स्त्रोत बताने से इस प्लेटफार्म का निजी स्वरूप प्रभावित होगा। साथ ही पहचान संबंधी सूचना का गंभीर दुरूपयोग हो सकता है। कंपनी कुछ ऐसे ही और तकनीकी प्रयास किए जा रहे हैं। सोशल मीडिया एक नई तकनीक है, जिसके साथ रहने का सलीका हमें सीखना होगा। पूरी दुनिया इसके उपाय ढूंढने में लगी है। 


शुरू-शुरू में ऐसा और भी तकनीकों के साथ होता रहा है, लेकिन समाज ने अपने हित में उसके प्रयोग के कुछ मानदंड बनाए। भारत में समाज का स्वरूप एक जैसा नहीं है, नहीं जागरूकता का एक स्तर है। यहां कई तरह के हित, कई तरह की संवेदनशीलताएं है, जो एक दूसरे से टकराती भी है। ऐसे में हरेक वर्ग के हितों की रक्षा के लिए सोशल मीडिया जैसे माध्यम में सरकार के हस्तक्षेप की जरूरत हमेशा रहेगी, लेकिन इसका तरीका सर्व सम्मति ही तय किया जाना चाहिए। क्योंकि वाट्सऐप का इस्तेमाल लोग सभी प्रकार के संवेदनशील वार्तालाप के लिए करते हैं, इनमें चिकित्सक, बैंक और परिवार के साथ बातचीत भी शामिल है।



 

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