विश्व ऋतु चक्र में आया बदलाव, है बड़े खतरे की आहट

Samachar Jagat | Monday, 14 May 2018 10:10:03 AM
Changes in the World Season, The Great Dangers

Rajasthan Tourism App - Welcomes to the land of Sun, Sand and adventures

मई माह की शुरुआत से ही देश के कई हिस्सों में आ रही आंधी-तूफान, बारिश-ओलावृष्टि और हिमपात का खतरा अब भी बरकरार है। मौसम विभाग ने इन खतरों की सटीक भविष्यवाणी को लेकर हाथ खड़े कर दिए हैं और कहा है कि आंधी-तूफान की सटीक भविष्यवाणी संभव नहीं है और इसे समय पर सभी लोगों तक पहुंचानी काफी मुश्किल है। मौसम विभाग के महानिदेशक डॉ. केजे रमेश के अनुसार किसी भी जगह आंधी-तूफान स्थानीय मौसमी सिस्टम के कारण बनते हैं। ऐसी स्थिति में इनका सही वक्त और सही स्थान का आकलन करना संभव नहीं होता है। सामान्य तौर पर इनके बनने का आकलन 48 घंटे पहले किया जा सकता है। 

लेकिन आजकल डॉप्लर राडार की मदद से दो-तीन घंटे पहले भी इनका आकलन किया जा रहा है। जो काफी हद तक सही साबित होता है। बावजूद इसके आंधी-तूफान (थंडर स्ट्राम) की 100 फीसदी सही भविष्यवाणी करना संभव नहीं है। इसके अलावा इसके खतरों की सूचनाएं इतनी कम अवधि में लोगों तक पहुंचाना भी बहुत मुश्किल है। उन्होंने बताया कि पिछले सोमवार को देर रात दिल्ली-राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र (एनसीआर) में आए तूफान की गति कुछ स्थानों पर 70 किलोमीटर प्रतिघंटा तक दर्ज की गई। आंधी-तूफान, बरसात-ओलावृष्टि और पहाड़ी क्षेत्रों में बर्फबारी का सिलसिला पिछले दो दशक में विश्व को ऋतु चक्र में आया बदलाव एक बहुत बड़े खतरे की आहट है। ठंक के मौसम में गर्भी का अहसास, बारशि के मौसम में कहीं भयंकर सूखा तो कहीं बाढ़ गर्मी में तेज आंधी और तूफानी बारिश यानी कुल मिलाकर मौसम चक्र गड़बड़ा गया है। 

गर्मी के मौसम में कश्मीर और हिमाचल में बर्फ पड़ रही है। जो समय उत्तर भारत में लू चलने का होता है उस वक्त अंधेड़, बारिश और ओलावृष्टि हो रही है। देश के ज्यादातर हिस्सों में मौसम का यही आलम है। बारिश का मौसम आएगा तो मालुम चलेगा कि उमस भरी गर्मी पड़ती रही, पर पानी नहीं पड़ा और आखिर में सूखे की मार झेलनी पड़ी। दो दशक पहले अक्टूबर में ठंड पड़नी शुरू हो जाती थी और मार्च तक रहती थी। लेकिन अब 15 दिन भी कड़ाके की सर्दी नहीं पड़ती। मौसम में आ रहे इस बदलाव से न केवल राजस्थान और भारत बल्कि पूरी दुनिया प्रभावित है। यूरोप और अमेरिका में सर्दी लंबे समय तक पड़ने लगी है। बर्फबारी होती है तो ऐसी कि पिछले सारे रिकार्ड टूट जाते हैं। अरब के मुल्कों तक से बर्फबारी की खबरें आ जाती है। समुद्र गरम होते जा रहे हैं और तटीय शहरों के लिए खतरा बनते नजर आ रहे हैं। ऐसे में इंसान करे तो क्या करे कुदरत की मार के आगे बेबस है। 

बिगड़ते मौसम को लेकर मौसम विभान आए दिन आगाह कर रहा है। इस बार उत्तरी राज्यों मे जिस तरह से अचानक मौसम बदला और तेज आंधी-तूफान और बारिश से जो तबाही हुई, वह मौसम विज्ञानियों के लिए भी एक चुनौती है। उत्तर भारत को पिछले हफ्ते जिस प्राकृतिक आपदा का सामना करन पड़ा, उसमें मौसम तंत्र से जुड़ी कई घटनाएं ऐसी हुई जो पहले कमी नहीं देखी गई। मौसम विभाग इस तूफान को छोटे से दायरे तक सीमित मानकर चल रहा था, लेकिन उसका दायरा बढ़ता ही गया और सही अनुमान नहीं लग पाया। हालांकि मई की शुरुआत में अंधड़ और बारिश को लेकर चेतावनी जारी हुई थी, लेकिन राजस्थान और उत्तर प्रदेश के बारे में नहीं थी। जबकि इन्हीं दो राज्यों में सबसे ज्यादा तबाही हुई। राजस्थान और उत्तर प्रदेश में तबाही का कारण हरियाणा के ऊपर बना चक्रवाती प्रवाह रहा। वैसे मई में ऐसा तूफान और ऐसी बारिश देखने को नहीं मिलती। 

जलवायु में तेजी से हो रहे छोटे बड़े बदलाव ऋतु चक्र को बिगाड़ रहे हैं। उत्तरी पाकिस्तान और राजस्थान में तापमान ज्यादा होने की वजह से गरम हवाएं ऊपर की ओर उठी और कम दबाव का क्षेत्र बना। इसके साथ ही भूमध्य सागर और अरब सागर से चलने वाली पछुआ हवाओं से इस कम दबाव वाले क्षेत्र में इस तरह के बदलावों के पीछे बड़ा कारण जलवायु संकट है। मौसम विभाग में पूर्वानुमान केंद्र के क्षेत्रीय निदेशक डॉ. कुलदीप श्रीवास्तव के अनुसार पश्चिमी विक्षोभ कमजोर होने पर राजस्थान, गुजरात और मध्यप्रदेश में तापमान 44 डिग्री सेल्सियस तक पहुंचेगा। पश्चिमी विक्षोभ के कमजोर होने पर उत्तर भारत के मैदानी इलाकों में तापमान बढ़ने का अनुमान है। 

यही कारण है कि राजधानी जयपुर सहित पूरे प्रदेश में फिर से गर्मी के तीखे तेवर नजर आ रहे हैं। सुबह से ही तापमान 40 से 42 डिग्री सेल्सियस पहुंचा जाता है। मौसम विभाग के अनुसार आने वाले दिनों ेमें भी तामपान के कम होने की कोई उम्मीद नहीं है। गर्मी से अभी राहत की आशा नहीं की जा सकती। मौसम विभाग के अनुसार अभी प्रदेश का तापमान 40 से 44 डिग्री सेल्सियस बने रहने की संभावना है। यह बात विचित्र सी नजर आ रही है कि आंधी-तूफान, बारिश और ओलावृष्टि के बावजूद गर्मी में किसी प्रकार की राहत नहीं मिल रही है। अब तक अक्सर यह होता आया है कि जब भी आसपास बारिश, आंधी तेज हवाओं के साथ ओलावृष्टि होती है, कम से कम पांच-साल दिन तक तापमान गिर जाता है और गर्मी से राहत मिल जाती थी किन्तु इस बार ऐसा नजर नहीं आ रहा है। उत्तराखंड में चार धाम की यात्रा जहां पहले अक्षय तृतीया यानी आखातीज को शुरू हो जाती थी।

 वह इस बार देरी से शुरू हुई और हफ्ते भर में ही वहां बर्फबारी होने से यात्रा रोकनी पड़ी। उत्तराखंड के बद्रीनाथ-केदारनाथ धाम में मई में बारिश होना आम है, किन्तु इस बार पिछले सप्ताह सोमवार और मंगलवार को यहां घंटों तक बर्फबारी ने चकित कर दिया। बर्फबारी के कारण हजारों यात्री फंस गए। 3 दशक में मौसम में आए बदलाव से दोनों धाम बर्फ की चादर से ढक गए। 20 सेंटीमीटर बर्फबारी हुई है रोहतांग में और 2 सेटीमीटर शिमला में। मौसम के बदलाव के चलते 4 सेंटीमीटर सालाना की दर से घट रही है हिमपात की मात्रा। भारत में यह पहला मौका है, जब मौसम को लेकर इतने व्यापक स्तर पर चेतावनी जारी की गई है। मौसम विभाग इस तरह के अनुमान उपग्रहों से मिले आंकड़ों और अन्य स्त्रोतों से हासिल जानकारियों के विश्लेषण के आधार पर व्यक्त करता है। ऐसे में संभव है कई बार अनुमान सटीक नहीं बैठ पाते।

 इसीलिए मौसम विभाग महानिदेशक डॉ. केजे रमेश ने कहा है कि किसी भी जगह आंधी-तूफान स्थानीय, मौसमी सिस्टम के कारण बनते हैं ऐसी स्थिति में इनका सही वक्त और सही स्थान का आकलन करना संभव नहीं होता। मौसम विभाग को देखना होगा कि वह अपने पूर्वानुमानों को और विश्वसनीय कैसे बना सकता है। आपदा से बचाव के लिए सही पूर्वानुमान पहला तकाजा है।

Rajasthan Tourism App - Welcomes to the land of Sun, Sand and adventures


 

यहां क्लिक करें : हर पल अपडेट रहने के लिए डाउनलोड करें, समाचार जगत मोबाइल एप। हिन्दी चटपटी एवं रोचक खबरों से जुड़े और अन्य अपडेट हासिल करने के लिए हमें फेसबुक और ट्विटर पर फॉलो करें!

loading...

Copyright @ 2018 Samachar Jagat, Jaipur. All Right Reserved.