खुद को बदलने से सब कुछ बदल जाएगा

Samachar Jagat | Tuesday, 04 Sep 2018 03:07:50 PM
Changing yourself will change everything

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इसी शहर में एक धनवान व्यक्ति रहता था। वह एक बड़े से घर में रहता था। वह रोज घर के कमरों की खिड़कियों से बाहर के दृश्यों को देखा करता था। और इसके के बारे में वह अपने घरवालों से चर्चा किया करता था। वह कहा करता था कि देखो ये बाहर खड़े पेड़ कितने धुंधले दिखाई दे रहे हैं, इनकी टहनियों-पत्तियों पर धूल-मिट्टी जमी हुई है। 

अपने घर के सामने यह सडक़ भी बहुत गंदी है, इस पर भी बहुत धूल-मिट्टी जमी हुई है, देखो उस घर को वह तो पूरे का पूरा ही काला-कलूटा और मिट्टी से सना हुआ है, देखो यह आदमी जा रहा है, यह भी बहुत गंदा है, और तो और इधर से जो भी गाड़ी गुजरती है वह भी बहुत गंदी और धूल से सनी होती है। एकदिन उसने घर की सारी खिड़कियों को अच्छे से साफ कर दिया। जब वह अगले दिन उठा और देखा तो उसे घर के बाहर सब कुछ साफ-सुधरा और अच्छा दिखाई दे रहा था। वह चिल्ला-चिल्लाकर कह रहा था कि देखो आज सामने वाले घर की सारी दीवारें बहुत साफ हैं, खिड़कियंा बहुत साफ हैं, यह पेड़ भी बहुत अच्छा लग रहा है और तो और इधर से गुजरने वाली आज ये सभी गाडि़यां एक दम से साफ सुथरी है।

यहां यह बात ध्यान देने की है कि जब मकान की खिडक़ी की गंदगी साफ करने से ही बाहर की चीजें साफ-सुथरी दिखाई देने लगती है तो फिर यदि व्यक्ति अपने भीतर की गंदगी को, भीतर की बुराइयों-कमजोरियों को साफ कर ले उनको जड़ामूल से मिटा ले तो फिर उसके लिए यह संसार बहुत सुंदर और सार्थक हो जाएगा।

संसार के हर व्यक्ति में उसे अनेक गुण और अच्छाइयां नजर आएगी क्योंकि उसने अपने भीतर की सारी कमजोरियों को कमियों को और बुराइयों को मिटा लिया है। यही कारण है कि वह पहले स्वयं बदला, स्वयं की कमियों को खोजा और भगाया, तभी उसे संसार की, समाज की और परिवार की कमियां और कमजोरियां नदारद मिली। उसे अब सब कुछ अच्छा और सार्थक दिखाई दे रहा था क्योंकि उसने स्वयं को बदल लिया था।

यहां यह बात ध्यान देने की है कि जब तक व्यक्ति अपनी सोच को पोजिटिव नहीं बनाएगा, सार्थक नहीं बनाएगा अर्थात् स्वयं अच्छा नहीं बनेगा, आदर्श नहीं बनेगा और बड़े दिल वाला नहीं बनेगा तब तक उसे संसार का कोई भी व्यक्ति अच्छा दिखाई नहीं देगा, सुंदर दिखाई नहीं देगा और अपना दिखाई नहीं देगा।

क्योंकि जो व्यक्ति संवेदनशील है वही दूसरे व्यक्तियों की वेदनाओं को समझ सकता है, उसकी परेशानियों को समझ सकता है और उसके काम आ सकता है। इसलिए दुनिया को बदलने की आवश्यकता नहीं है, समाज और परिवार को बदलने की आवश्यकता नहीं है, सबसे बड़ी आवश्यकता तो स्वयं को बदलने की है फिर देखिए सब कुछ बदल जाएगा।

प्रेरणा बिन्दु:- 
स्वयं को अच्छा, सार्थक, मेहनती और संकल्पवान बनाने से ही समाज देश और दुनिया अच्छी, सार्थक और मेहनती बनती दिखाई देगी।

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