चीन और अमेरिका के बीच व्यापारिक रिश्तों की तनातनी और बढ़ी

Samachar Jagat | Wednesday, 15 May 2019 10:20:31 AM
china and america Business Relationships

चीन और अमेरिका के बीच व्यापारिक रिश्तों में तनातनी और बढ़ गई है। दोनों देशों के बीच वाशिंगटन में कारोबारी रिश्ते सुधारने के लिए होने वाली बैठक से पहले अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने कहा कि चीन ने अमेरिका के साथ व्यापार समझौता रद्द कर दिया है। हालांकि बीते सप्ताह गुरुवार को फिर उन्होंने कहा कि चीन के राष्ट्रपति शी चिनफिंग से एक पत्र मिला है। दोनों देशों के बीच व्यापार वार्ता को बचाने की अब भी गुंजाइश है। उन्होंने कहा कि अमेरिका तब तक नहीं रुकेगा जब तक कि उसके कर्मचारियों को ठगा जाना और उनकी नौकरियों को चुराए जाने पर रोक नहीं लगाई जाएगी। दो दिन बाद ही शनिवार को ट्रंप ने फिर चीन को शीघ्र ही व्यापार युद्ध को लेकर समझौता करने की चेतावनी दी। 

उन्होंने कहा कि यदि चीन ने अभी समझौता नहीं किया तो उनके (ट्रंप के) दूसरे कार्यकाल में यह बातचीत हुई तो स्थिति और खराब होगी। यहां यह उल्लेखनीय है कि दोनों देशों के बीच इस समय व्यापार युद्ध चल रहा है। इसे समाप्त करने को लेकर कई दौर की वार्ता हो चुकी है। बीते सप्ताह शुक्रवार को भी दो दिन की बातचीत बिना समझौते के समाप्त हो गई। चीन के शीर्ष प्रतिनिधि ने बताया कि अब अगले दौर की वार्ता बीजिंग में होगी। हालांकि उन्होंने बैठक की तारीख नहीं बताई। उन्होंने चेतावनी दी कि चीन महत्वपूर्ण सिद्धांतों पर कोई समझौता नहीं करेगा। ट्रंप ने शनिवार को एक ट्वीट में कहा, ‘‘मुझे लगता है कि चीन को हालिया बातचीत में इस तरह का झटका लगा है कि 2020 के अगले चुनाव तक इंतजार करना चाहते हैं कि यदि किस्मत ने साथ दिया और 2020 में कोई डेमोक्रेट राष्ट्रपति बन गया तो वे अमेरिका को हर साल 500 अरब डालर का चूना लगाते रहेंगे।’’ उनका कहना है कि दिक्कत बस इतनी है वे जानते हैं कि मैं जीतने वाला हूं।

 अमेरिका के इतिहास में अर्थव्यवस्था की स्थिति सबसे बेहतर रही है और रोजगार के नंबर भी ठीक-ठाक रहे हैं तथा और भी काफी कुछ रहा है। यदि मेरे दूसरे कार्यकाल में बातचीत हुई तो चीन के लिए समझौते की स्थिति खराब होगी। उनके लिए यह बेहतर होगा कि अभी बातचीत पूरी कर लें और किसी समझौते पर पहुंचे। ट्रंप का कहना है कि अभी शुल्क वसूलने में मुझे मजा आ रहा है। वाशिंगटन में दो दिन की वार्ता के बाद चीन और अमेरिका के बीच कोई समझौता नहीं होने के कारण तनाव और बढ़ गया है। चीन ने चेतावनी दी है कि अगर अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप 200 अरब डालर के आयात शुल्क बढ़ाते है तो वह जवाबी कार्रवाई करेगा। शुक्रवार को वार्ता में कोई समझौता नहीं होने पर शुल्क में यह बढ़ोतरी इसी दिन से लागू होनी है। इधर चीन ने भी कहा कि वह पलटवार करने के लिए पूरी तरह तैयार है।

 दुनिया की दो प्रमुख अर्थव्यवस्थाओं के बीच व्यापारिक रिश्ते में तनाव खत्म करने के लिए आयोजित हुई 11वीं दौर की अहम बैठक से पहले यह घटनाक्रम सामने आया था। यह बैठक बेनतीजा समाप्त हो गई। हालांकि चीन ने कहा है कि समस्या के समाधान की अभी भी उम्मीद है। शुल्क बढ़ाए जाने का असर बड़े कारोबार में तीन या चार माह बाद पड़ेगा, लेकिन छोटे और मझौले व्यापारियों पर इसका असर तुरंत पड़ने लगा है। अमेरिका ने चीन से आयात होने वाले 200 अरब डालर के सामान पर शुल्क की दर 10 फीसदी बढ़ाकर 25 फीसदी कर दी है और शुक्रवार को वार्ता खत्म होने के बाद यह लागू हो गई। अमेरिका का यह फैसला ऐसे समय में आया है, जब दोनों देश आपस में छिड़े व्यापार युद्ध को खत्म करने का प्रयास कर रहे थे। इस मुद्दे पर 11वें दौर की वार्ता पूरी हो चुकी है। 

अगले दौर की वार्ता बीजिंग में होनी है, लेकिन अभी इसकी कोई तारीख निश्चित नहीं है। चीन के उप प्रधानमंत्री ल्यू हे की अगुवाई में वार्ता के लिए अमेरिका आया था। लेकिन अमेरिका का आरोप है कि चीन बातचीत को लेकर संजीदा नहीं है। अमेरिकी व्यापार प्रतिनिधि रॉबर्ट लाइटहाइजर ने कहा था कि पिछले कुछ दिनों में हमने यह महसूस किया कि व्यापार युद्ध खत्म करने को लेकर चीन की प्रतिबद्धता कम हुई है। अमेरिका द्वारा 10 फीसदी शुल्क बढ़ाने के फैसले पर चीन ने पलटवार करते हुए कहा है कि वह भी सख्त जवाबी कदम उठाएगा। अचानक उभरी इन तनातनी ने दुनिया को चिंता में डाल दिया है और इसका फौरी असर दुनिया भर के शेयर बाजारों में भारी गिरावट के रूप में देखा गया है।

कुछ विशेषज्ञ तो इसे आर्थिक शीत युद्ध की शुरुआत तक बताने लगे हैं, जो अगले 20 वर्षों तक चल सकता है। दुनिया की इन दो आर्थिक महाशक्तियों का टकराव विश्व अर्थव्यवस्था पर इतना गहरा असर डाल सकता है कि खुद अमेरिका के लिए भी उसके विनाशकारी प्रभाव से बचना कठिन होगा। चीनी उत्पादों का अमेरिका में दखल बहुत ज्यादा है और उन पर 25 प्रतिशत शुल्क लगा तो निम्न मध्यवर्गीय अमेरिकी अपनी कुछ जरूरतों को पूरा नहीं कर पाएंगे। वाइट हाउस द्वारा जारी व्यापार से जुड़े सेक्शन-301 की रिपोर्ट में कहा गया है कि ट्रंप से सख्त रवैए से अमेरिकी भी काफी परेशान है। फिर भी ट्रंप अपने रुख पर कायम है। चीन से व्यापारिक टकराव में जाने के पीछे उनका यह डर काम कर रहा है कि तकनीकी तरक्की के जरिए चीनी अर्थव्यवस्था कहीं अमेरिका से भी बड़ी न हो जाए। 

साल 2025 तक संपूर्ण आत्मनिर्भरता हासिल करने का चीनी नारा भी अमेरिका के लिए चिंता का विषय बना हुआ है। अनुमान है कि तब तक वह अपनी 150 खरब डालर की अर्थव्यवस्था को अमेरिका की 200 खरब डालर की अर्थव्यवस्था के करीब ला खड़ा करेगा। इसीलिए चीन को कुछ खास क्षेत्रों के बाहर रखने का दबाव अमेरिका व्यापार युद्ध के जरिए बना रहा है। इसकी सबसे बड़ी कोशिश यह है कि चीन अपने यहां व्यापार करने आई अमेरिकी कंपनियों के सामने तकनीकी शेयर करने की शर्त न रखे। देखने की बात यह है कि अमेरिका की एक तरफ कार्रवाई के खिलाफ चीन कौन सा जवाबी कदम उठाता है। विश्व बिरादरी को इस मामले में मूक दर्शक नहीं बने रहना चाहिए। 

उसे चीन और अमेरिका दोनों पर दबाव डालकर टकराव को तार्किक धरातल पर लाने की पहल करनी चाहिए। इधर अमेरिका और चीन के बीच कारोबारी आग के फिर भडक़ने से भारत की भी चिंता बढ़ा दी है। ट्रंप भारत पर भी अधिक शुल्क को लेकर निशाना साधते रहते हैं। वह भारत की ओर से अमेरिकी सामानों पर लगाए गए शुल्क को अनुचित करार दे चुके हैं। विशेषज्ञों का कहना है कि ट्रंप के इस रवैए से भारत की भी चिंता बढ़ा दी है।



 

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