भारत के साथ चीन की दोस्ती संदेह के घेरे में

Samachar Jagat | Thursday, 21 Feb 2019 05:41:31 PM
China's friendship with India, in the wake of suspicion

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पुलवामा के आतंकवादी हमले को लेकर चीन के रवैए से दुनिया भर में हैरानी जताई जा रही है। चीन को लेकर भारत में भी काफी रोष व्याप्त है। चीन ने पुलवामा हमले की निंदा तो की, लेकिन पाकिस्तान का नाम लेने से परहेज ही किया। चीन ने मसूद अजहर को वैश्विक आतंकी घोषित करने की भारत की अपील को भी खारिज कर दिया है। दुनिया के ज्यादातर देश पाकिस्तान को आतंकवादी देश घोषित कर चुके हैं। यह सब जानते बूझते भी चीन पाकिस्तान के साथ खड़ा है और उसकी आतंकवादी नीतियों और गतिविधियों को खुलकर समर्थन दे रहा है। 


संकट की इस घड़ी में भारत को एक बड़ा झटका यह लगा है कि चीन ने एक बार फिर मसूद अजहर को संयुक्त राष्ट्र द्वारा अंतराराष्ट्रीय आतंकवादी घोषित कराने से साफ इंकार कर दिया है। हैरान करने वाली बात यह है कि एक तरफ तो चीन भारत के साथ दोस्ती का दंम भरता है और दूसरी तरफ भारत के कट्टर दुश्मन मसूद अजहर को वह आतंकवादी मानने को तैयार नहीं है। पुलवामा हमले की चीन द्वारा निंदा किया जाना उसका ढोंग ही है। हालांकि पुलवामा हमले के बाद भारत पाकिस्तान से खिलाफ एक के बाद एक कड़े कदम उठा रहा है। 

भारत ने पाकिस्तान को दिया गया मोस्ट फेवर्ड नेशन (एमएफएन) का दर्ज खत्म कर दिया है। भारत ने पाक और आतंक परस्त अलगाववादियों का सुरक्षा कवच छीन लिया है। साथ ही उसने सेना को फ्री हैंड दे दिया है। हालांकि ऐसे कदम पहले ही उठा लिए जाते तो अच्छा रहता, क्योंकि पाक आतंकवादियों को भारत में घुसपैठ के लिए निरंतर सहायता देता रहा है। पुलवामा के हमले की जिम्मेदारी जैश-ए-मोहम्मद ने ली है और जैश का सरगना मौलाना मसूद अजहर पाकिस्तान में ही रहता है। इस आतंकी संगठन का संचालन परदे के पीछे से पाकिस्तान की सरकार और आईएसआई ही करती है। भारत ने वैश्विक स्तर पर पाकिस्तान के खिलाफ जनमत तैयार करने के लिए कूटनीतिक प्रयास भी शुरू कर दिए हैं और भारत को इन प्रयासों में सफलता भी मिल रही है।

 कई देशों के राजनयिकों के साथ अलग मुलाकातें और जी-20 के प्रतिनिधियों के साथ बैठक के बाद भारत को आतंकवाद फैलाने वालों के खिलाफ कार्रवाई पर समर्थन मिला है। अमेरिका से लेकर दक्षिण कोरिया, दक्षिण अफ्रीका से लेकर खाड़ी देश तक ने भारत के साथ खड़ा होने का भरोसा दिया है। इस कूटनीति का सबसे बड़ा फायदा यह होगा कि पाकिस्तान के खिलाफ भारत अब जो भी बड़ा कदम उठाएगा उसे वैश्विक समर्थन हासिल होगा। जो देश पाकिस्तान को आतंकवादी बताते हुए भी उसे मदद देते रहे हैं उन्हें भी एक बार उसका पक्ष लेने से पहले दो बार सोचना पड़ेगा। संयुक्त राष्ट्र संघ द्वारा जैश-ए-मोहम्मद को आतंकी संगठन घोषित किए जाने के बावजूद चीन सुरक्षा परिषद में इसके सरगना मसूद अजहर का नाम वैश्विक आतंकियों की सूची में शामिल करने और उस पर प्रतिबंध लगाने के प्रस्तावों को दोबार अपने विशेषाधिकार का इस्तेमाल कर रोक चुका है। यह कोई पहला मौका नहीं है, जब चीन ने भारत के विरुद्ध सक्रिय आतंकी समूहों को शह दी है। बहुत पहले वह मिजो और नागा लड़ाकों को भी ट्रेनिंग दे चुका है। 

चीन भले ही वैश्विक मंचों से यह कहता रहे कि वह आतंकवाद के खिलाफ और भारत के साथ है, लेकिन हकीकत कुछ और ही है। मसूर अजहर के बचाव में चीन का उतरना कोई नई बात नहीं है। जब-जब सुरक्षा परिषद में मसूद अजहर का मामला गया, परिषद के सदस्य देश भारत के साथ खड़े नजर आए और इस पक्ष में रहे कि मसूद अजहर को अंतरराष्ट्रीय आतंकवादी घोषित किया जाना चाहिए। लेकिन ऐनवक्त पर चीन ने ऐसे अड़ंगे लगाए कि भारत के प्रयास विफल होते गए। सबसे पहले अप्रैल 2016 में चीन ने सुरक्षा परिषद की प्रतिबंधित आतंकियों की सूची में मसूद अजहर का नाम डालने की भारत की कोशिश को तकनीकी आधार पर रुकवा दिया था। फिर उसी साल अक्टूबर में मसूद को अंतरराष्ट्रीय आतंकवादी घोषित करने की भारत की अपील पर बाधा पैदा की। तीसरी बार फरवरी 2017 में मसूद अजहर पर पाबंदी के अमेरिका के प्रयास को ‘वीटो’ कर दिया।

 इससे यह तो पुख्ता हो ही गया है उसके ये सारे प्रयास भारत विरोधी है। मसूद अजहर पाक अधिकृत कश्मीर की राजधानी मुजफ्फराबाद सहित पाकिस्तान के शहरों में भारत के खिलाफ रैलियां निकालता रहा है और जहर उगलता रहा। यह वही अजहर मसूद है जिसे 1994 में तत्कालीन प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी के कार्यकाल में श्रीनगर में गिरफ्तार किया गया और 1999 में कंधार अपहरण कांड के बाद विमान यात्रियों की सुरक्षित रिहाई के बदले उसे भारत सरकार ने छोड़ा था। चीन एक तरफ भारत से दोस्ती का राग अलापता रहता है दूसरी तरफ भारत के दुश्मन के साथ खड़ा है। ऐसे में उसकी दोस्ती संदेह के घेरे में है।

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