शीतलहर इस बार मार्च तक सताएगी

Samachar Jagat | Tuesday, 12 Feb 2019 03:17:25 PM
cold wave will torment this March

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आमतौर पर बसंत पंचमी को शीत ऋतु की विदाई के रूप में देखा गया है। बसंत पंचमी पर जाड़े की जकड़ से निकलकर मौसम खुशगवार हो जाता है, लेकिन इस बार बसंत पंचमी पर भी पूरा प्रदेश ठिठुर रहा है। सीकर जिले के फतेहपुर का तापमान एक बार फिर मानइस में पहुंच गया बीते शुक्रवार को मानइस 2.2 डिग्री के साथ फतेहपुर प्रदेश में सबसे ठंडा रहा। जबकि पर्वतीय पर्यटन स्थल माउंट आबू में तापमान 2 डिग्री सेल्सियस रिकार्ड किया गया। हाड़ौती, शेखावाटी, उदयपुरवाटी सहित प्रदेश के ज्यादातर हिस्सों में ठंड और शीतलहर ने धूजणी छुड़ा दी। 


दिन में धूप जरूर खिलती है, किन्तु सर्द हवाओं के चलते यह बेअसर हो रही और शाम होते-होते सर्दी का असर और तीखा हो जाता है। यह सारी स्थिति उत्तर भारतीय पर्वतीय इलाकों में हो रही बर्फबारी के कारण बनी है। मौसम विज्ञानिकों के अनुसार उत्तर भारत में इस बार मार्च तक शीतलहर चलने की संभावना है। इसका मार्च शुरू तक उत्तर भारत में ‘ला-नीना’ तूफान सक्रिय होना है। मौसम वैज्ञानिकों ने कहा है कि प्रशांत महासागर अपेक्षाकृत ज्यादा ठंडा रहेगा। उत्तर भारत में इसका खासा असर पड़ने की संभावना है।

बीते सप्ताह गुरुवार को कई मैदानी और पर्वतीय इलाकों में भारी बारिश और बर्फबारी हुई। उत्तर प्रदेश, हरियाणा, पंजाब, दिल्ली और राजस्थान में कई जगह जमकर बारिश हुई और कई जगहों पर ओले भी गिरे। जम्मू-कश्मीर हिमाचल और उत्तराखंड समेत उत्तर भारत हिमपात एवं बारिश के कारण फिर से कड़ाके की ठंड के चपेट में आ गया है। वहीं भारी बर्फबारी के चलते दूसरे दिन भी कश्मीर देश के दूसरे हिस्से से कटा रहा। श्रीनगर-जम्मू राष्ट्रीय राजमार्ग बंद रहे और क्षेत्र में हिमपात के चलते वहां हवाई अड्डे पर विमान सेवाएं बाधित रही। 

शीतलहर लंब चलने से किसानों को नुकसान होगा। फरवरी में तापमान कम रहा, तो गेहूं की फसल में दाना पड़ने की प्रक्रिया पर असर होगा। बर्फबारी के चलते जम्मू-कश्मीर के भदरवाह और उसक आसपास के इलाकों में 50 फीसदी तक सेब और अखरोट के बाग तबाह हो गए हैं। इससे यहां के किसानों को 100 करोड़ रुपए तक नुकसान हो सकता है। मौसम वैज्ञानिकों का कहना है कि उत्तर भारत के पर्वतीय क्षेत्रों में भारी बारिश और जमकर बारिश का सबब बनेगा ‘ला-नीना’। साथ ही तराई और भाबर क्षेत्रों में बारिश, कोहरा, शीतलहर का प्रकोप लंबा खींचेगा। साल की शुरुआत से अब तक हाड़ कंपाने वाली सूखी सर्दी का सितम लोग झेल रहे हैं। आने वाले दिनों में तेज बारिश और पहाड़ी इलाकों में भारी बर्फबारी से ठंड का प्रकोप बढ़ेगा।

मौसम विभाग के अनुसार हिमाचल प्रदेश में भारी हिमपात होने का अनुमान है, इसलिए रेड अलर्ट जारी किया गया है। जम्मू-कश्मीर के कई इलाकों में हिमस्खलन होने की चेतावनी जारी की गई है। झारखंड में भी कुछ जगहों पर भारी बारिश के साथ ओलावृष्टि के आसार है। मौसम वैज्ञानिकों के अनुसार पिछले साल दिसंबर से इस साल फरवरी में अभी तक बारिश का स्तर शून्य बना हुआ है। जिससे फरवरी के आखिरी से ‘ला-नीना’ के उत्तर भारत में आने के आसार है। इसके जून तक सक्रिय रहने के आसार है। ऐसा हर साल देखने को मिलता है। सर्द हवाएं, बर्फबारी, बारिश, ओलावृष्टि इनसे होने वाली मुश्किलें और नुकसान कोई नई बात नहीं है।

नई बात यह है कि पिछले कुछ सालों से ठंड की अवधि और तीव्रता दोनों में बदलाव आया है। इसका असर यह हुआ है कि हर साल सर्दी किसी न किसी रूप में पिछले रिकार्ड तोड़ रही है। करीब तीन दशक पहले तक तो सर्दी की अवधि औसतन चार या पांच महीने रहती थी। अक्टूबर से गुलाबी सर्दी का असर होने लगता था और दिसंबर जनवरी में तो हाड़ कंपाने देने वाली हवाएं चलती थी और होली आने तक ठंड अपनी मौजूदगी बनाए रखती थी। पर अब यह चक्र बदल रहा है। इसी से मौसम का मिजाज भी बदला है। दिसंबर का महीना भी कड़ाके की ठंड का अहसास नहीं कराता, अक्टूबर-नवंबर के महीने में तो पंखे चलते हैं। इसी तरह पहाड़ी क्षेत्रों में बर्फबारी का समय भी बदल रहा है और मौसम के बदलते चक्र स भारत ही नहीं, पूरी दुनिया प्रभावित हो रही है। इसका बड़ा एक मात्र कारण जलवायु परिवर्तन का संकट है।

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