उच्च शिक्षा में छात्र बढ़े पर कॉलेज घटे

Samachar Jagat | Wednesday, 01 Aug 2018 11:33:21 AM
College decreases in higher education

देश में उच्च शिक्षा की तस्वीर बदल रही है। पढ़ने वालों की संख्या में इजाफा हुआ है लेकिन कॉलेज घट रहे हैं। इसकी वजह यह है कि इंजीनियरिंग और मैनजमेंट के कॉलेजों को जो बाढ़ आई हुई थी, वह थमने लगी है। विश्वविद्यालयों की संख्या बढ़ी है। लेकिन चिंताजनक बात यह है कि राज्यों के बीच उच्च शिक्षा की ढांचागत सुविधाओं की भारी कमी है। कर्नाटक में जहां एक लाख छात्र-छात्राओं के लिए 51 कॉलेज है, वहीं बिहार में सिर्फ सात कॉलेज है। मानव संसाधन विकास मंत्री प्रकाश जावड़ेकर ने बीते सप्ताह शुक्रवार को अखिल भारतीय उच्च शिक्षा रिपोर्ट 2017-18 जारी की। रिपोर्ट के अनुसार देश में कुल विश्वविद्यालयों की संख्या 903 हो गई है, जबकि पिछले साल 864 थी। लेकिन कॉलेजों की संख्या घटी है।

 पिछले साल कुल 40 हजार 26 कॉलेज थे, पर एक साल में 976 कॉलेज घटे हैं और संख्या 39 हजार 50 रह गई है। इसी प्रकार एकल कॉलेज की संख्या में भारी कमी आई है। पहले ऐसे कॉलेज 11 हजार 699 थे जो अब 10 हजार 11 रह गए हैं। उच्च शिक्षा में भारत की सकल प्रवेश दर (जीईआर) बढक़र 25.8 हो गई है। उच्च शिक्षा में प्रवेश लेने वालों की संख्या 3.66 करोड़ दर्ज हुई है। 2016-17 में यह 3.57 करोड़ थी। इस प्रकार एक साल में 9 लाख नए छात्र उच्च शिक्षा में जुड़े है। यदि 2015-16 के आंकड़ों को देखे तो उस वर्ष 3.45 करोड़ छात्र प्रवेश हुए थे। अच्छी खबर यह है कि उच्च शिक्षा में लड़कियों की हिस्सेदारी बढ़ी है। पिछले सर्वे में उच्च शिक्षा में प्रवेश लेने वाली लड़कियों की संख्या 1.67 करोड़ थी, जो बढक़र इस बार 1.74 करोड़ हो गई है। 

जबकि लडक़ों की हिस्सेदारी 1.90 करोड़ से बढक़र 1.92 करोड़ ही हुई है। उच्च शिक्षा का ताजा सर्वेक्षण बताता है कि देश में पिछले साल जिन 3.6 करोड़ छात्रों ने उच्च शिक्षा में प्रवेश लिया था। उनमें महज 1.7 करोड़ ही छात्राएं थी। यानी छात्रों के मुकाबले छात्राओं का प्रतिशत 47.6 ही था। अनुसूचित जातियों के मामले में यह प्रतिशत अगर 21.8 है तो अनुसूचित जनजातियों के मामले में तो महज 15.9 फीसदी है। हालांकि यह संख्या बढ़ रही है। कॉलेजों का औसत देखें तो एक लाख पढ़ने योग्य छात्रों (18-23 साल) पर देश में 28 कॉलेज है। यह अनुपात संतोषजनक है।

 प्रति लाख आबादी पर देखें तो बिहार में सबसे कम कॉलेज है जबकि कर्नाटक और तेलंगाना इस मामले में सबसे ऊपर है। कर्नाटक में प्रति एक लाख पर 51 कॉलेज है। वहां कुल कॉलेज 3593 है। तेलंगाना में भी एक लाख छात्रों पर 51 कॉलेज है, वहां 2045 कॉलेज है। राजस्थान इस मामले में तीसरे नंबर पर है, जहां एक लाख छात्रों पर 33 कॉलेज हैं। राज्य में कुल कॉलेजों की संख्या 33 है। 

उत्तर प्रदेश में एक लाख छात्रों पर 28 कॉलेज है, जबकि वहां कुल कॉलेज 6922 है। बिहार में सबसे कम एक लाख छात्रों पर 7 कॉलेज है, वहां कुल कॉलेज 770 है। दिल्ली मेें एक लाख छात्रों पर 8 कॉलेज है, वहां 178 कॉलेज है। रिपोर्ट के अनुसार उच्च शिक्षा क्षेत्र में देश में कुल शिक्षकों की संख्या 12 लाख 84 हजार 755 है। इनमें 58 फीसदी पुरुष और 42 फीसदी महिलाएं हैं। लिंगानुपात में बिहार सबसे पीछे है। यहां 79.1 फीसदी पुरुष शिक्षक है, जबकि 20.9 फीसदी महिला शिक्षिकाएं हैं।

 यह अनुपात 4-1 का बनता है। उत्तर प्रदेश में 32.8 फीसदी महिला शिक्षक है। शिक्षक छात्र अनुपात की बात करें तो इसमें उत्तर प्रदेश, बिहार और झारखंड फिसड्डी है। यहां एक शिक्षक पर छात्रों की संख्या 50 से ऊपर है। जबकि यह कर्नाटक में 16, और आंध्र प्रदेश में 18 है। वहीं राष्ट्रीय औसत सभी श्रेणियां मिलाकर 29 है। रिपोर्ट के अनुसार उच्च शिक्षा पर निजी क्षेत्र हावी है। करीब 78 फीसदी कॉलेज निजी क्षेत्र द्वारा संचालित है।

 कुल 67.3 फीसदी छात्र इन कॉलेजों में पढ़ते हैं। बाकी करीब 33 फीसदी छात्र सरकारी कॉलेजों में पढ़ते हैं। इसी प्रकार विश्वविद्यालयों की संख्या पर नजर डालें तो 903 में से 343 विश्वविद्यालय निजी क्षेत्रों के हैं। लेकिन यह आंकड़ा कम नहीं है। जहां तक ग्रामीण क्षेत्रों में कॉलेज और विश्वविद्यालयों की बात है। ग्रामीण क्षेत्रों में 60.48 कॉलेज है। जिनमें से 11.4 फीसदी महिलाओं के लिए है। इसी प्रकार 357 विश्वविद्यालय भी ग्रामीण क्षेत्रों में है। रिपोर्ट के अनुसार 3.6 फीसदी कॉलेजों में छात्रों की भरमार है। देश में 18.5 फीसदी कॉलेज ऐसी है, जहां छात्रों की संख्या 100 से भी कम है। जबकि 3.6 फीसदी कॉलेज ऐसे हैं, जहां तीन हजार से अधिक छात्र पढ़ते हैं।

ग्रामीण और कस्बों में खुले सरकारी कॉलेजों में छात्रों की संख्या अधिक है। शिक्षा जैसे-जैसे उच्चतर होती जाती है, यह अंतर और भी बढ़ता जाता है। 2017-18 का सर्वेक्षण बताता है कि इस दौरान देश में कुल 34 हजार 400 पीएचडी अवार्ड हुई, जिनमें से 20 हजार 179 पीएचडी छात्रों को मिली, जबकि छात्राओं के हिस्से में महज 14 हजार 221 पीएचडी ही आई।

एक और बात यह भी है कि पिछले सर्वे के मुकाबले पीएचडी हासिल करने वाली छात्राओं का अनुपात इस सर्वे के दौरान घटा है। सर्वेक्षण यह भी बता रहा है कि राष्ट्रीय महत्व की शिक्षण संस्थानों में लड़कियों की संख्या अन्य संस्थानों के मुकाबले सबसे कम है। निचली कक्षाओं के बारे में यह मान चुके हैं कि छात्राएं ज्यादा मेहनत करती है, तो फिर ऐसा क्या है कि उच्च शिक्षा तक पहुंचते पहुंचते उपलब्धियां छात्रों को ज्यादा मिल जाती है? जब तक हम इस अंतर को नहीं पाट देते, बेटी पढ़ाओ का सपना अधूरा ही रहेगा। इसके लिए उच्च शिक्षा क्षेत्र में बहुत कुछ करने की जरूरत है।
 



 

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