आओ प्रदूषण मुक्त दुनिया बनाएं

Samachar Jagat | Friday, 08 Jun 2018 01:36:42 PM
Come create a pollution free world

जितनी तेजी से सुविधाओं का आविष्कार हो रहा है उतनी ही तेजी से दुविधाओं का जाल इस सुंदर धरती पर फैलता जा रहा है। धीरे-धीरे दुनिया नित नए आविष्कृत चीजों, उपकरणों, मशीनों या फिर अन्य सामानों से अटती जा रही है, भरती जा रही है। इनमें प्रमुख रूप से टू व्हीलरस, फोर व्हीलरस, बच्चों की चीजें, रसाई और घर का सामान है। आज देखो वही गली-मौहल्ला-सडक़ वालों से अटे पड़े हैं, इनके लिए पार्किंग स्थलों की कमी पड़ गई है। घर में नित नए और अच्छा-बढि़या के नाम पर मोबाइल, गाड़ी या अन्य इलेक्ट्रॉनिक आइटम आते रहते हैं। दुनिया में अधिकतर चीजें प्लास्टिक से बनने लगी हैं जो न कभी गलता है, न मिटता है, न जलता है और न सड़ता है।

 ऐसे में हर घर से पांच-सात किलो कचरा, टूटा-फूटा प्लास्टिक का सामान, रसोई में बचा-खुचा सामान बाहर यहां-तहां-हर-कहां फेंक दिया जाता है। यह सड़ा गला सामान हवा के साथ अपनी बदबू को लोगों तक आसानी से पहुंचाता रहता है और स्वास्थ्य से खिलवाड़ होता रहता है। ये सारी-चीजें, अनगिनत उपकरण जब कारखानों में तैयार होते हैं, फैक्ट्रियों में इन्हें ढलाया-गलाया जाता है तो इनसे जबरदस्त प्रदूषण निकलता है और यह ऐसा प्रदूषण है जो हवा के साथ, जल के साथ और यहां तक ध्वनी के साथ समूचे क्षेत्र को प्रदूषित कर देता है, बीमार कर देता है और जीवन को लाचार बना देता है।

आज दुनिया में जो सबसे बड़ी समस्याएं हैं-महंगाई, भ्रष्टाचार, बेरोजगारी, असुरक्षा, गरीबी, आर्थिक मंदी, नैतिक पतन, सामाजिक अवमूल्यन की। लेकिन आज इन सबसे बड़ी समस्या बन गई है फैलता प्रदूषण, बढ़ता जहर, बढ़ते शहर, गिरता स्वास्थ्य, बढ़ता कचरा और प्रदूषित होते हवा-पानी-ध्वनी, विचार-भाषा और व्यवहार। इन सबके बढ़ने का दोष व्यक्ति सरकार पर डाल देता है, सरकार इस काम में लगी संस्थाओं पर डाल देती है और संस्थाएं सीमित संसाधनों और आधुनिक सुविधाओं के अभाव को जिम्मेदार ठहरा देती है। 

इसका सीधा सा मतलब है कि कचरा यहां-तहां फैला रहेगा, गंदगी के ढेर लगे रहेंगे, लोग लघुशंका हर कहीं करते रहेंगे, वाहनों से घर-बाजार अटे रहेंगे, पोलिथीन की थैलियां गायें चबाती रहेंगी और दम तोड़ती रहेंगी, हर कहीं जर्दा-गुटके की पीक डलती रहेगी, सिगरेट-बीड़ी का धुआं शरीर को खोखला करता रहेगा और गंदे पानी के नाले खुले में बदबू फैलाते रहेंगे। नहीं-नहीं-नहीं, ऐसा अब और नहीं हो सकता है वरना विकास नहीं विनाश सामने खड़ा है मुंह बाये निगल जाएगा।

इसके लिए सबसे कारगर उपाय है जनता को जागरूक करने की, जीवन निर्माण की शिक्षा देने की, उनमें संस्कार भरने की और इन सबकी अवहेलना करने वालों को नियमानुसार दण्डित करने की। साथ में नगर पालिकाओं, ग्राम पंचायतों, परिषदों, निगमों और सरकारों के बीच सटीक संवाद, एक्शन, सख्ती के साथ-साथ प्रभावी सुपरविजन और साधनों की उपलब्धता की। आइए, स्वयं से वादा करें कि मैं प्रदूषण नहीं फैलाऊंगा और अपने जीवन में पांच पेड़ न केवल लगाऊंगा बल्कि उनकी परवरिश अपने बच्चों की तरह करूंगा।



 

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