कच्चे तेल में उछाल से रुपए में भारी गिरावट

Samachar Jagat | Wednesday, 10 Oct 2018 04:55:16 PM
Crude oil surge in the rupee drops

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भारतीय मुद्रा पहली बार 74 रुपए के पार 74.23 रुपए प्रति डालर के रिकार्ड निचले स्तर पर आ गई। अक्टूबर की पहली तारीख से रुपए में गिरावट जारी है। डालर के मुकाबले रुपया एक अक्टूबर को जहां 72.91 रहा वहीं 3 अक्टूबर को 73.34, 4 अक्टूबर को 73.57 और 5 अक्टूबर को 73.78 रहा और 6 अक्टूबर को 74.22 तक गिर गया। विशेषज्ञों का कहना है कि अगर तेल के दाम नहीं थमे तो रुपया अक्टूबर में ही 75 के पार जा सकता है। रुपए में वर्ष 2018 में 13.3 फीसदी की गिरावट आई है, कच्चे तेल की कीमत 86 डालर प्रति बैरल होने का सीधा असर रुपए पर पड़ा है। 

रुपए की गिरावट में सरकारी बांड पर रिटर्न में पिछले कुछ माह में बड़ा उछाल आया है। ऐसे में उधारी के बदले सरकार को ज्यादा रकम चुकानी पड़ेगी। रुपए का रुख डालर के मुकाबले लगातार नीचे की ओर बने रहने से सरकार के लिए अर्थव्यवस्था को संभालने की चुनौतियां बढ़ती जा रही है। भारतीय मुद्रा में गिरावट की वजह अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की बढ़ती कीमतें बताई जा रही है। पिछले नौ महीनों में कच्चे तेल की कीमतें 64 डालर से बढक़र 86 डालर प्रति बैरल तक पहुंच गई है। अभी इसके और बढ़ने की आशंका जताई जा रही है। 

ईरान पर अमेरिकी दबाव और ओपेक देशों की तेल आपूर्ति के प्रति अनिच्छा को देखते हुए इसके सौ डालर प्रति बैरल तक पहुंचने के कयास लगाए जा रहे हैं। यानी रुपए की कीमत और नीचे जाने की आशंका है। सरकार पिछले महीने 19 वस्तुओं के आयात शुल्क में बढ़ोतरी कर रुपए की कीमत गिरने से रोकने का प्रयास किया था, पर वह भी बेअसर साबित हो रहा है। अब इसे प्रवासी भारतीय जमा योजना के जरिए मजबूत करने की योजना बनाई जा रही है। यानी प्रवासी भारतीयों को भारत में डालर जमा करने को प्रोत्साहित करने पर विचार किया जा रहा है, ताकि रुपए का रुख कुछ ऊपर की ओर हो सके। 

रुपए की कीमत गिरने के पीछे कुछ बड़ी वजहें भी है। एक तो यह कि तेल की बढ़ती और रुपए की गिरती कीमतों की वजह से भारतीय शेयर बाजार का रुख भी नीचे की तरफ है। उधर अमेरिका ने जमा खाते की ब्याज दर बढ़ा दी है। इसके कारण बहुत सारे विदेशी निवेशकों ने भारतीय शेयर बाजार से अपना पैसा निकाल लिया। नतीजन, विदेशी मुद्रा भंडार चार सौ अरब डालर के नीचे आ गया। 

इसके अलावा भारत के चालू खाते का घाटा लगातार बढ़ रहा है देश के विदेशी मुद्रा भंडार में सितंबर के अंतिम सप्ताह में 9300 करोड़ रुपए की गिरावट दर्ज की गई है। इस गिरावट के बाद अब देश का विदेशी मुद्रा भंडार 29.7 लाख करोड़ रुपए का है। यह आंकड़ा भारतीय रिजर्व बैंक ने जारी किया है। रिजर्व बैंक के आंकड़ों के अनुसार 28 सितंबर को समाप्त सप्ताह में विदेशी मुद्रा भंडार का सबसे प्रमुख घटक विदेशी मुद्रा परिसंपति 8700 करोड़ रुपए घटकर 27.9 लाख करोड़ रुपए रह गया है। भारत के चालू खाते के निरंतर बढ़ते घाटे को सरकार के लिए इसे 3 फीसदी तक समेटना मुश्किल हो रहा है। इस तरह रुपए की मजबूत स्थिति में लाने के लिए सरकार के सामने कई चुनौतियां है।

अगर कच्चे तेल की कीमतें काबू में आ जाए तो इसके सुधारने की उम्मीद की जा सकती है। पर इसके आसार नजर नहीं आते। यों सरकार ने देश में तेल की कीमतों को संतुलित करने की मंशा से वैट की दरें कम करने का ऐलान किया है। पर इससे उपभोक्ताओं को जरूर मामूली राहत मिल सकती है, लेकिन रुपए की कीमत संतुलित करने का दावा नहीं किया जा सकता। केंद्र सरकार ने बीते सप्ताह ईंधन की बढ़ती कीमतों पर परेशान आम जनता को राहत देने के लिए गुरुवार 4 अक्टूबर को पेट्रोल-डीजल की कीमतों में ढ़ाई रुपए सस्ता करने का ऐलान किया। इसके बाद भाजपा शासित कई राज्यों ने भी दाम में ढ़ाई रुपए की कटौती का ऐलान कर दिया।

इस प्रकार उपभोक्ताओं को पेट्रोल एवं डीजल पर प्रति लीटर 5 रुपए तक की कमी करके राहत दी गई। केंद्र ने इसके लिए डेढ़ रुपया उत्पाद शुल्क में कम किया, वहीं तेल कंपनियों ने भी एक रुपया प्रति लीटर दाम घटाए। इस प्रकार केंद्र की ओर से उपभोक्ताओं को ढ़ाई रुपए प्रति लीटर की राहत दी गई। केंद्र द्वारा की गई अपील पर भाजपा शासित राज्यों उत्तर प्रदेश, उत्तराखंड, हरियाणा, हिमाचल प्रदेश, झारखंड, गोवा, त्रिपुरा, और छत्तीसगढ़ समेत कई राज्यों ने अपनी ओर से ढ़ाई रुपए कटौती का ऐलान किया। 

राजस्थान इससे पहले ही वैट में कमी करके पेट्रोल-डीजल के दामों में कमी कर चुका है। किन्तु यह कटौती किए जाने के बाद फिर से पेट्रोल-डीजल के दामों में बढ़ोतरी की जाने लगी है। यहां यह उल्लेखनीय है कि जब रुपए की कीमत गिरती है तो उससे कई स्तरों पर परेशानियां बढ़ जाती है। अंतरराष्ट्रीय बाजार में लेन-देन चूंकि डालर में करना होता है। इसलिए सरकार को चीजों की कीमत अधिक चुकानी पड़ती है। अंतरराष्ट्रीय कर्ज का ब्याज बढ़ जाता है। व्यापारियों को वस्तुओं की कीमतें अधिक चुकानी पड़ती है। इस तरह महंगाई बढ़ती है।

कच्चे तेल के लिए भी अधिक रुपया खर्च करना पड़ता है। ऐसे में वैट की दरें घटाने से कीमतों पर बहुत असर नहीं पड़ता। फिलहाल इस समस्या से पार पाने का एक ही रास्ता बचता है कि देश में विदेशी मुद्रा का भंडार बढ़ाया जाए। वह कैसे संभव होगा यह सरकार को सोचना है। सिर्फ प्रवासी भारतीयों के निवेश से शायद ही इस दिशा में अपेक्षित कामयाबी मिले। घरेलू बाजार की स्थिति डावांडोल होने की वजह से विदेशी प्रत्यक्ष निवेश आकर्षित कर पाना मुश्किल बना हुआ है। जिन पहलुओं पर सरकार को पहले से फूंक-फूंक कर कदम उठाने की जरूरत थी, उन पर अब ध्यान देने से स्थिति सुधरने में वक्त लगेगा।

  • भारतीय मुद्रा रुपया पहली बार 74 रुपए के पार 74.23 रुपए प्रति डालर के रिकार्ड निचले स्तर पर आ गया
  • डालर के मुकाबले रुपए में गिरावट पहली अक्टूबर से जारी है
  • विशेषज्ञों का कहना है कि अगर कच्चे तेल के दाम नहीं थमे तो रुपया अक्टूबर में ही 75 के पार जा सकता है
  • रुपए में वर्ष 2018 में 13.3 फीसदी की गिरावट आई है
  • कच्चे तेल की कीमत 86 डालर प्रति बैरल होने का सीधा असर रुपए पर पड़ा है
  • डालर के मुकाबले रुपए के लगातार नीचे की ओर बने रहने से सरकार के लिए अर्थव्यवस्था को संभालने की चुनौतियां बढ़ती जा रही है
  • भारतीय मुद्रा में गिरावट की वजह अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की बढ़ती कीमतें बताई जा रही है
  • पिछले नौ महीनों में कच्चे तेल की कीमतें 64 डालर से बढक़र 86 डालर प्रति बैरल तक पहुंच गई है
  • तेल की बढ़ती और रुपए की गिरती कीमतों की वजह से भारतीय शेयर बाजार का रुख भी नीचे की ओर है
  • अमेरिका ने जमा खाते की ब्याज दर बढ़ा दी है। इसके कारण बहुत सारे विदेशी निवेशकों ने शेयर बाजार से अपना पैसा निकाल लिया है
  • विदेशी निवेशकों के अपना पैसा निकालने से विदेशी मुद्रा भंडार चार सौ अरब डालर के नीचे आ गया है
  • चालू खाते के घाटे को 3 फीसदी तक समेटना मुश्किल हो रहा है
  • भारत सरकार विदेशी मुद्रा भंडार बढ़ाने के लिए प्रवासी भारतीयों को निवेश के लिए आकर्षित करने के लिए कदम उठाने जा रही है
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