साइबर सुरक्षा बजट में कटौती

Samachar Jagat | Friday, 12 Jan 2018 03:00:36 PM
Cyber Security Budget cuts

प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के महत्वाकांक्षी अभियान डिजिटल इंडिया के दौर में साइबर सुरक्षा पर खर्च करने पर लगातार कंजूसी बरत रही सरकार अब ऐसा नहीं करेगी। सरकार ने संसद की स्थायी समिति की उन सिफारिशों को स्वीकार कर लिया है, जिसमें कम खर्च के दुष्प्रभावों पर गहरी चिंता जाहिर की गई। साथ वित्त मंत्रालय को समुचित कोष बढ़ाने को कहा गया है। साइबर सुरक्षा कार्यक्रमों पर राजग सरकार आने के बाद पिछले चार बजट में कोष का आवंटन लगातार कम होता रहा। यही नहीं आवंटित राशि को भी लगातार संशोधित कर और कम किया गया, जबकि इस दौरान साइबर हमलों में लगातार बढ़ोतरी होती रही, बैंकिंग क्षेत्र से लेकर निजी कंपनियां तक पीडि़त रहे। 

स्थायी समिति ने साइबर सुरक्षा पर लगातार घटते खर्च की वजह से विशेषज्ञों की कमी, तकनीक के अपग्रेड नहीं होने और प्रशिक्षण की कमी को लेकर चिंता जाहिर की है। समिति ने कहा है कि भारतीय कम्प्यूटर आपात जवाबदेही दल (सीईआरटी-इन), साइबर अपीलीय ट्रिव्यूनल और राष्ट्रीय साइबर समन्वय केंद्र (एनसीसीसी) को स्थापित करने  के खर्च के साथ विभिन्न कार्यक्रम में रूकावट नहीं आनी चाहिए। इस दौर में एनसीसीसी के साथ आईटी विभाग वॉटनेट क्लीनिंग और मालवेयर अध्ययन केंद्र भी बन रहा है, जो मौजूदा समय की जरूरत को पूरा करेंगे। ऐसे में साइबर खतरों से अलर्ट करने, हमलों का वर्गीकरण करने और उनसे निपटने के लिए समुचित कोष मुहैया कराना चाहिए। सूचना एवं प्रौद्योगिकी मंत्रालय ने पूरे देश में राष्ट्रीय डिजिटल साक्षरता अभियान और डिजिटल साक्षरता अभियान चलाने के लिए पूरी तैयारी कर ली है। आईटी मंत्री रविशंकर प्रसाद ने इस पर राज्य सरकारों से विचार विमर्श कर रूपरेखा भी तैयार कर ली है। इसके तहत 52.5 लाख लोगों को प्रशिक्षण दिया जाएगा। साथ ही सूचना एवं प्रौद्योगिकी मंत्रालय ने देश में साइबर क्षेत्र के विस्तार और साइबर सुरक्षा के लिए चार गुना बजट की मांग की है। 

यहां यह बता दें कि वर्ष 2014-15 के बजट में 120 करोड़ रुपए का आवंटन किया गया था। जिसे संशोधित कर उसे 62 करोड़ रुपए कर दिया गया और इस राशि को भी पूरा नहीं, बल्कि 58.59 करोड़ रुपए खर्च किया गया। 2015-16 में बजट आवंटन घटाकर 105 करोड़ रुपए किया गया और फिर संशोधित कर उसे 85 करोड़ रुपए कर दिया गया। इस साल भी पूरी राशि खर्च नहीं हुई और संशोधित आवंटन कोष से 68.21 करोड़ रुपए ही खर्च हुए। इसके बाद आवंटन हुआ, जिसे कम कर 58.61 करोड़ रुपए कर दिया गया। इस मामले में हालांकि वित्त मंत्रालय यह तर्क दे सकता है कि आईटी मंत्रालय को साइबर सुरक्षा कोम के लिए आवंटित राशि ही जब वह खर्च नहीं कर सका तो उसमें कमी किया जाना जरूरी हो गया। शायद इसीलिए 2014-15 के बजट में आवंटित 120 करोड़ रुपए के मुकाबले 2016-17 में यह राशि घटकर 70 करोड़ रुपए की गई और उस राशि को भी मंत्रालय खर्च नहीं कर पाया है। 

मंत्रालय अब स्थायी समिति द्वारा चिंता प्रकट किए जाने के बाद साइबर सुरक्षा के कार्यक्रम में जोरशोर से जुट गया है। मंत्रालय राष्ट्रीय डिजिटल साक्षरता अभियान को सफल बनाने में जुअ गया है। संसद की स्थायी समिति ने खर्च के दुष्प्रभावों से बचने को समुचित कोष बढ़ाने की सिफारिश की थी, इसलिए वित्त मंत्रालय ने इस कोष में अब कटौती न करने और समुचित धनराशि आवंटन का भरोसा दिलाया है। मंत्रालय ने एनसीसीसी के साथ आईटी विभाग बॉटनेट क्लीनिंग और मालवेयर अध्ययन केंद्र भी बनाने की तैयारी कर ली है। प्रधानमंत्री मोदी के महत्वाकांक्षी अभियान डिजिटल इंडिया को सफल बनाने के लिए समुचित बजट का आवंटन किया जाना जरूरी है, वहीं मंत्रालय को भी आवंटित कोष को भरपूर सदुपयोग की व्यवस्था करनी होगी। जब बजट में चार गुना बढ़ोतरी की मांग की जा रही है तो उसके लिए आवश्यक योजना को भी लागू करने के लिए मुस्तैदी से काम करना होगा। बढ़ते साइबर हमलों को रोकने के लिए माकूल इंतजाम जरूरी है।



 

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