पिघलते ग्लेशियर से पूरी हो रही है पानी की कमी

Samachar Jagat | Tuesday, 11 Jun 2019 03:17:16 PM
Depleting glacier is getting complete water shortage

एशिया के पिघलने वाले ग्लेशियर सूखे के दौरान पानी की कमी को रोकने में मददगार साबित हो रहे हैं। एक अध्ययन से पता चला है कि ग्लेशियर सूखे के दौरान एशिया की कुछ प्रमुख नदी घाटियों में पानी के सबसे बड़े माध्यम बन गए हैं। जब पानी की कमी सबसे खराब स्थिति में होती है, तब उन ग्लेशियर से मिलने वाले पानी से ही 22.1 करोड़ लोगों की बुनियादी जरूरतों को पूरा किया जा रहा है। जर्नल नेचर में प्रकाशित यह अध्ययन उन क्षेत्रों के लिए सामाजिक और आर्थिक रूप से महत्वपूर्ण है जो सूखे की चपेट में है। जलवायु परिवर्तन से इन क्षेत्रों के अधिकांश ग्लेशियर सिकुड़ रहे हैं।

 ब्रिटेन के ब्रिटिश अंटार्कटिक सर्वेक्षण के ग्लेशियर विज्ञानियों ने कहा है जब बारिश नहीं होती और पानी की बहुत अधिक कमी हो जाती है तब निचले इलाकों में रहने वाले लोगों के लिए पिघली हुई बर्फ का पानी बहुत जरूरी हो जाता है। 

शोधकर्ताओं के मुताबिक हर गर्मियों में ग्लेशियर 36 क्यूबिक किलोमीटर पानी छोड़ते है जो कि इन नदियों के लिए 1.4 करोड़ ओलंपिक स्वीमिंग पूल के बराबर है। यह 22.1 करोड़ लोगों की जरूरतों को पूरा करने के लिए पर्याप्त पानी है। तीसरे धु्रव के नाम से पहचाने जाने वाले एशिया के उच्च पर्वतीय क्षेत्रों में कई पर्वत है, जिनमें कुल 95 हजार ग्लेशियर मौजूद है। ग्लेशियर विज्ञानिकों के अनुसार जलवायु परिवर्तन के कारण हालात ये है कि एशिया के ऊंचे पर्वत भी खतरे में है। अध्ययन में यह भी पता चला है कि पानी के प्राकृतिक भंडार के रूप में यह समाज के लिए काफी मूल्यवान है। ये चीजें गर्मियों में नदियों को लंबे समय तक सूखने से रोकती है। 

उनका कहना है कि इसी तरह से चलता रहा तो सूखे के कारण आने वाले समय में पानी और भोजन की कमी हो जाएगी। अगले कुछ दशकों में होने वाली इस तरह की समस्या से इंकार नहीं किया जा सकता है। इसलिए समय रहते इन ग्लेशियरों को बचाने के उपाय किए जाने चाहिए।



 

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