जन्मदिन पर दीपक बुझाऐं नहीं, जलाएं

Samachar Jagat | Monday, 03 Dec 2018 11:34:38 AM
Do not burn the lamp on the birthday, burn it

साल के तीन सौ पैसठ दिनों में से कुछ ही दिन ऐसे होते हैं, जिसमें वह बहुत खुश रहता है और ऐसा लगता है जैसे कि वह हमेशा प्रसन्न ही रहता है। दिन दिनों में त्योहार, उत्सव, शादी, उद्घाटन और जन्मदिन विशेष आते है। इन दिनों के अलावा व्यक्ति के जीवन से ऐसा लगता है जैसे कि वह ‘जी’ नहीं रहा है, ‘जी’ मर रहा है अर्थात् उसका जीने से मन भर गया है। और ये सब अपनी महानतम, पुरातन और सनातन संस्कृति से दूर होते जाने के कारण है। संस्कृति से दूर जाने का सबसे बड़ा उदाहरण जन्मदिन मनाने का तरीका है।

वैसे भारतीय संस्कृति का मूल भाव है- प्रसन्न और सम रहना, सादा जीवन उच्च विचार और जीओ और जीने देना। हमारी संस्कृति कहती है कि जन्मदिन पर मोमबत्तियों को बुझाएं नहीं, उन्हें रोशनी से रहित नहीं करें, उन्हें निरुपयोग और निरर्थक नहीं करें। बल्कि घर में रोशनी बढ़े। जीवन रोशन हो इसके लिए ग्यारह-इक्कीस इक्यावन या फिर एक सौ एक दीपक जलाएं, उनसे श्रीप्रभु की आरती उतारें और उस आरती की लौ को अपने अपने सिर-चेहरे और पूरे शरीर पर उतरने दें, इससे तन-मन जगमग हो उठेगा, घर जगमग हो जाएगा उन दीपकों को पूरे घर में रखने से।

दूसरी बात जो हम जन्मदिन पर करते हैं वह दिलनुमा लगी केक को चाकू से काटना है, कितने अपशकुन और अप्राकृतिक बात है यह। क्या घर पर बनाया हुआ हलुआ, मूंगथाल, मिश्रीमावा या फिर अन्य पकवान जन्मदिन की शोभा कम करेंगे, बिल्कुल भी नहीं। क्योंकि भारतीय संस्कृति बांटने की बात कहती है काटने की नहीं। स्कूल में पढ़ने वाले विद्यार्थी हॉफी-चॉकलेट, केक और फास्ट-जंक फूड ले जाते हैं, जरा गम्भीरता से सोचिए क्या ये सब किसी भी दृष्टि से उचित हैं।

क्या इनकी जगह मिश्री, फल, सूखे, सलाद, गुड़, चने, नारियल या फिर घर पर बनी हुई कोई चीज नहीं हो सकती? क्या यें चीजें सम्मान कम करती हैं? बिल्कुल भी नहीं, बस शुरुआत कौर करे? यही बात महत्वपूर्ण है। हाँ, बसंत वेली प्रेरणा स्कूल परिवार ऐसा करना शुरु कर दिया है। आओ हम भी ऐसा करना शुरू करें और न केवल अपने जन्मदिन को सार्थक बनाएं बल्कि अपने जीवन को भी सार्थकता की ओर ले जाएं।

प्रेरणा बिन्दु:- 
जन्मदिन पर दिएं जलाएं घर पर पकवान बनाएं, पेड़ लगाएं, घर की सफाएं करें, ब्लड डोनेशन करें, कम-मधुर, धीरे और सार्थक बोलने का संकल्प लें और जीवन को पढ़ाई तथा अच्छाई से जोड़ने का संकल्प भी लें तभी जन्मदिन और जीवन सार्थक होंगे।



 

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