जीवन में प्रवेश करें, केवल इसके आस-पास ही नहीं घूमें

Samachar Jagat | Monday, 27 Aug 2018 02:11:48 PM
Enter life, do not just walk around it

बहुत पहले की बात है, एक लकड़हारा रोजाना जंगल से सूखी लकडि़यां काटकर बाजार में बेचा करता था। उसकी आमदनी का यही एक तरीका था जिससे वे अपने परिवार का भरण-पोषण करते थे। वर्षो से वह यही काम करता आ रहा था। एक दिन उसे जंगल में एक साधु मिला और उससे बोला- ‘तुम इतने दिनों से लकड़ी काट रहे हो, इससे तो तुम्हारे परिवार का काम नहीं चलता होगा, यदि तुम थोड़ा और आगे बढ़ो तो तुम्हें घने जंगल में लकड़ी के अलावा और भी बहुत कुछ मिलेगा।’ लकड़हारे ने साधु की बात पर ध्यान दिया और जंगल में आगे की ओर बढ़ने लगा तो उसने देखा कि बहुत सारे तांबे के टुकड़े पड़े हैं, उसकी खुशी का कोई ठिकाना नहीं रहा। 

उसने तांबे के टुकड़ों को एकत्रित किया और बाजार में बेच दिया जिससे खूब आमदनी हुई। इसके बाद वह दूसरे दिन साधु के पास गया और उससे कहा- ‘बाबा! मुझे बहुत कुछ मिल गया है, अब मेरे पास परिवार का पेट भरने के लिए काफी रुपए हैं।’ बाबा ने कहा- ‘बेटा! यह ठीक है, लेकिन तुम जंगल के और भीतर जाओ। उसने साधु की बात पर फिर गौर किया और वह जंगल में और भीतर तक बढ़ने लगा, जहां उसे सोने और हीरे की टुकड़े जमीन पर पड़े हुए दिखाई दिए, अब तो वह भाव-विभोर हो गया, उसने सोने और हीरे के टुकड़ों को इकट्ठा किया और खुशी-खुशी से बाजार में गया और इन टुकड़ों को बेच दिया, जिससे वह बहुत अमीर हो गया।

 एक दिन वही साधु उसको जंगल में मिल गया, लेकिन अब लकड़हारा कार में था। इस पर साधु ने उस लकड़हारे से कहा- ‘अरे लकड़हारे! तुम इतने दिनों तक जंगल के किनारे-किनारे लकडि़यां बटोर रहे थे, लेकिन उनसे तुम्हारा पेट भी सही ढंग से नहीं भरता था, लेकिन जब तुम घने जंगल में प्रवेश कर गए तो तुम्हें सोने और हीरे के टुकड़े मिले और तुम मालामाल हो गए।’


 यही बात जीवन के साथ भी लागू होती है। जो लोग जीवन के आसपास ही घूमते रहते हैं वे केवल जीवन भर लकडि़यां ही बटोरते रहते हैं और जो लोग जीवन में प्रवेश करना चाहते हैं या जीवन के भीतर के सच को जान लेते हैं, उन्हें जीवन में सोने-हीरे-रत्न आदि मिलने तय हैं। इसलिए महत्वपूर्ण यह नहीं है कि अब तक आपने कितनी लकडि़यां बटोरी है या कितने हीरे-जवाहरात बटोरे हैं।

 बल्कि महत्व इस बात का है कि अब तक आपने इन सब चीजों को बटोरने की कला सीखी है या नहीं? इसलिए जीवन में कुछ पाने के लिए, जीवन के आसपास घूमने से काम नहीं चलेगा, जीवन के भीतर उतरना पड़ेगा, अंदर की शक्तियों को जानना होगा, उन्हें मानना होगा और उन पर अमल भी करना होगा। फिर आप जीवन में कुछ ही नहीं पाएंगे, बहुत कुछ ही नहीं पाएंगे, सब कुछ पाएंगे और जीवन में सभी खुशियों के बीच रहेंगे, इसमें कहीं कोई दो राय नहीं है। यह जीवन भरपूर खुशियों के बीच में रहने के लिए है और खुशियां आसमान से नहीं टपकती हैं, ये तो व्यक्ति के भीतर असीमित मात्रा में भरी पड़ी है।

प्रेरणा बिन्दु:- 
यह जीवन घुट-घुटकर केवल जिंदा रहने के लिए नहीं है, केवल जीने के लिए भी नहीं है, यह जीवन तो जिंदादिली के साथ जीने के लिए है, लोगों के दिलों को जीतने के लिए है।



 

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