जो आपके पास है, उस पर फोकस करें

Samachar Jagat | Tuesday, 18 Jun 2019 03:25:45 PM
Focus on what you have

अधिकतर यह देखा और सुना जाता है कि लोग उस पर फोकस करते हैं जो उनके पास नहीं होता है, और यही कारण है कि वे अपने उद्देश्य में सफल नहीं हो पाते हैं, इसका एक मात्र कारण यही होता है कि उनको जो उनके पास होता है, वह बहुत कम दिखाई देता है और जो उनके पास नहीं होता है, वह सब कुछ दिखाई देता है। लोगों की ऐसी धारणा को गलत साबित करती एक वास्तविक प्रेरक कहानी:- बात बहुत पुरानी है अर्थात् उन्नीस सौ अड़तीस की। यूरोप महाद्वीप में एक हंगरी नाम का देश है, उसमें एक पिस्टल शूटर था जिसका नाम कैरली थी।

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 उसका एक मात्र उद्देश्य था कि उसका दाहिना हाथ दुनिया का बेस्ट पिस्टल शूटर बने। वह ऐसा करने के लिए दिन-रात अभ्यास करता रहता था। उसने अपने देश की बहुत सारी नेशनल शूटिंग प्रतिस्द्र्धाएं जीती और चैम्पियन बना। इसी क्रम में वह अभ्यास करता रहता था और प्रतियोगिताएं जीतता रहता था। एक दिन वह आर्मी के टे्रनिंग कैम्प में अपनी तैयारी कर रहा था कि अचानक हैण्डगे्रनेड फट गया और उसका हाथ पूरी तरह से क्षतिग्रस्त हो गया। वह दर्द से कराह उठा, उसे अस्पताल ले जाया गया, भयंकर पीड़ा के बावजूद उसके दिमाग में अपना उद्देश्य हासिल करना ही चल रहा था। वह मात्र एक महीने के बाद अस्पताल से घर आ गया। अब वह अपने दाहिने हाथ को भूल चुका था, अब उसका सम्पूर्ण फोकस केवल बायें हाथ पर था, जिससे लिखा तक नहीं जा सकता था, लेकिन उसके संकल्प का कोई विकल्प नहीं था। उसने अपने बायें हाथ से लगातार बिना किसी को बताए अभ्यास करने लगा।

कुछ महीनों के बाद हंगरी में एक नेशनल चैम्पियनशीप का आयोजन हुआ, कैरली भी वहां पहुंचा। सभी पिस्टल शूटरों ने उसका स्वागत किया और उससे कहा कि भाई आपको धन्यवाद जो अपना हाथ गंवाने के बावजूद हमारा हौसला बढ़ाने के लिए यहां आए हो। कैरली ने तपाक से जवाब दिया- मैं तुम्हारा हौसला बढ़ाने नहीं आया हूं, मैं तो तुम्हें हराने के लिए आया हूं। मित्रों वे सब दोनों हाथ से मुकाबला कर रहे थे और कैरली अपने बायें हाथ से और ताजुब कैरली वीनर बन गया। अब वह 1940 के ओलम्पिक की तैयारी करने लगा, लेकिन द्वितीय विश्व युद्ध के कारण 1940 के ओलम्पिक रद्द हो गए, लेकिन कैरली ने हार नहीं मानी अब उसका फोकस 1944 के ओलम्पिक पर था, विश्व युद्ध लंबा चलने से 1944 के गेस्स भी निरस्त हो गए लेकिन कैरली ने हिम्मत नहीं हारी, अब उसका फोकस 1948 के ओलम्पिक पर टिक गया और उसने अपने संकल्प को पिस्टल शूटिंग में गोल्ड मेडल लेकर पूरा किया और आश्चर्य की बात 1952 में भी वह दुनिया का सर्वश्रेष्ठ पिस्टल शूटर घोषित हुआ। आइए, हम उस पर फोकस करें, जो हमारे पास है, उस पर नहीं जो हमारे पास नहीं है।

प्रेरणा बिन्दु:- 
जो कुछ है पास तेरे
उसको तू साकार कर
कामयाबी जरूर मिलेगी
कोशिश हर प्रकार कर।



 

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