कोहरे से कोहराम

Samachar Jagat | Monday, 07 Jan 2019 02:45:12 PM
Fog by the fog

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देश में कड़ाके की सर्दी के साथ अब कोहरा की कहर ढाने लगा है। जयपुर-दिल्ली राष्ट्रीय राजमार्ग नं. 8 पर नीमराना के पास दुधेड़ा मोड पर गुरुवार की सुबह घने कोहरे के कारण दो दर्जन वाहन भिड़ गए। एक ट्रोले व डंपर में आग लग गई। अलग-अलग वाहनों में 23 लोग घायल हुए और करीब 5 किलोमीटर लंबा जाम लग गया। कोहरे के कारण दिल्ली एयरपोर्ट पर उतरने वाले 8 विमान जयपुर डायवर्ट किए गए।

जयपुर से 10 विमान देरी से उड़े। प्रदेश के अन्य भागों में भी कोहरे के कारण यातायात में बाधाएं आ रही है। कोहरे के कारण पिछले दिनों जयपुर-अजमेर रोड पर एक कार दुर्घटना में एक ही परिवार के 3 लोगों की मौत हो गई। इसी तरह हरियाणा में रोहतक-रेवाड़ी राष्ट्रीय राजमार्ग पर कोहरे की वजह से हुए हादसे में एक ही परिवार के 8 लोगों की दर्दनाक मौत हर संवेदनशील इनसान को विचलित कर गई। हर साल दिसंबर-जनवरी में कोहरे के कोहराम से सैकड़ों निर्दोष जिंदगिया असमय कालकलवित हो जाती है। सत्ताधीश और दुर्घटनाएं रोकने के लिए जिम्मेदार तमाशबीन बने रहते हैं। मौसम की तल्खी और बढ़ते प्रदूषण से सडक़ों पर धुंध का विस्तार एक अटल सत्य है तो फिर दुर्घटनाओं को टालने के लिए गंभीर पहल क्यों नहीं होती। 


हमने रफ्तार वाले हाईवे तो बना दिए मगर यह सुनिश्चित नहीं किया कि लोग बेमौत न मारे जाएं। हर सिलसिला हर साल का है। इस दौरान सडक़ यातायात ही नहीं, देश का रेल व हवाई यातायात भी पंगु हो जाता है। इसके बावजूद कोहरे से बचाव व सुरक्षित यातायात की गंभीर पहल होती नजर नहीं आती। जिस देश में हर साल 5 लाख हादसे होते हों और तकरीबन डेढ़ लाख लोग वर्ष 2017 में सडक़ दुर्घटना में मारे गए हों। उस देश में सडक़ों को दुर्घटना मुक्त बनाने के प्रयास युद्ध स्तर पर होने चाहिए। इन मरने वाले लोगों के अलावा उन घायलों का आंकड़ा भी बड़ा है, जो इन दुर्घटनाओं में घायल होकर ताउम्र जख्मों से जूझते रहते हैं।

दरअसल, कोहरे के दौरान सफर करना बेहद जोखिम भरा होता है। इसके लिए हाईवे व शेष मार्गों पर सुरक्षा के चाक चौबंद उपाय किए जाने जरूरी होते हैं। पर्याप्त लाइट की व्यवस्था व परावर्तक साइन बोर्ड वाहन चालकों के लिए कम दृश्यता में सहायक हो सकते हैं। वाहन चालकों को कोहरे के मौसम में वाहन चलाने में मददगार आवश्यक जानकारी दी जानी चाहिए। 

देखा जाता है कि कोहरे लदे वाहनों की वजह से होती है। क्यों न भारी वाहनों के लिए अलग लेन निर्धारित की जाए ताक जानमाल की क्षति को कम किया जा सके। कोशिश होनी चाहिए कि कोहरे के दौरान वाहन चालकों की सुगमता के लिए पर्याप्त वैकल्पिक इंतजाम किए जाए। जानते हुए कि मौसम के मिजाज में तल्खी लगातार बढ़ती है और बढ़ते वायु प्रदूषण से सडक़ों में दृश्यता और अधिक बाधित होती है। बारिश, कोहरे, धुंध और ओलावृष्टि जैसी विपरीत परिस्थितियों में वाहन चलाने के लिए चालकों को समय-समय दिशा निर्देश जारी किए जाने चाहिए, जिससे जानमाल की क्षति  को कम किया जा सके। इसके साथ ही उन तकनीकों पर भी शोध होना चाहिए जो विपरीत मौसम में सुरक्षित यातायात का मार्ग प्रशस्त कर सके। तभी हर साल होने वाली जनधन की हानि को रोका जा सकेगा।
 

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