बच्चों को समय और संस्कार दें

Samachar Jagat | Monday, 15 Apr 2019 10:10:41 AM
Give time and ritual to the children

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आज माता-पिता अपने बच्चों के सामने पूरा भौतिक संस्कार परोस रहे हैं, पूरी पश्चिमी संस्कृति परोसी जा रही है, सभी सुख-सुविधाएं उसके पास उपलब्ध करवाई जा रही हैं। इसके साथ-साथ उसके सामने हौड़ का लक्ष्य रखा रहता है हमेशा, बड़े-बड़े पद रखे रहते हैं उसके सामने और खूब धन-दौलत जोड़ने के सपने होते हैं उसके सामने। लेकिन अफसोस की बात है कि माता-पिता के पास इतना भी समय नहीं है कि वे उनसे दो पल तो शगुन से बतिया सकें, घर-समाज-स्कूल और देश की चर्चा कर सकें, अपनेपन की, बचपन की मीठी-मीठी बातें कर सकें, उनको जीवन निर्माण में आने वाली महत्वपूर्ण चीजों के बारे में चर्चा कर सकें और यही कारण है कि ऐसा सब नहीं होने से आज बच्चे अपने बचपन में ही पचपन जैसी बातें करते देखे जाते हैं, जिद्दी-सनकी, चिड़चिड़े, गुस्से में दिखाई देते हैं क्योंकि उनके सामने सकारात्मक वातावरण नहीं है, संयुक्त परिवार नहीं है, नानी-दादी के गीत-किस्से नहीं है और गौरवशाली चरित्रों की जानकारी नहीं है। 

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बच्चों को देने की जो सबसे जरूरी बात है उसे समय कहते हैं, संस्कार कहते हैं और ये चीजें बच्चों के जीवन को सार्थक बनाती है, सच्चा और सरल बनाती हैं। इसलिए उनके साथ बच्चे बनें, समय दें, खेलें और खूब हंसे। बच्चों के व्यक्तित्व का सही विकास हो, इसके लिए उनके जीवन को लेकर एक सार्थक योजना जरूर बनाएं। इस योजना की पहली बात है कि बच्चे अकेले नहीं रहें क्योंकि अकेलापन उनको कुंठित कर देगा, उनके विकास के कदमों को बढ़ने से रोक देगा, उन्हें बहुत सारे विकारों से ग्रस्ति कर उनके जीवन के उद्देश्य को ही बदल देगा, जीवन को ही बदल देगा। इसलिए यदि माता-पिता दोनों ही व्यस्त हैं तो भी बच्चों के लिए जो समय तो देना ही पड़ेगा, बेशक इसके लिए कोई वैकल्पिक व्यवस्था करनी पड़े। 

एक और बात है कि यदि बच्चों के सामने हमेशा पोजिटिव एनवायरमेंट रखा जाए, उनके जीवन के सभी पहलुओं को ध्यान में रखकर कोई कार्य योजना बनाएं जिसमें शिक्षा, संस्कार, पिकनिक, कैरियर, खेल, मनोरंजन, सामान्य-ज्ञान, कॉमन सेंस, क्रिमटिविटी, टेक्नोलॉजी और सांस्कृति-साहित्यिक गतिविधियों का समावेश जरूर करें। यदि बच्चों के जीवन में विविधता होगी, अलग-अलग चीजें होंगी, स्वस्थ वातावरण होगा, भयमुक्त और प्रेरक माहौल होगा तो फिर ऐसे बच्चे जरूर से अच्छे बनेंगे, सच्चे बनेंगे और मानव प्रेमी बनेंगे। आइए, जीवन की सबसे अनमोल धरोहर को बनाएं, बनाएं और सबसे बड़ा करें।

प्रेरणा बिन्दु:- 
बच्चे कब के जिम्मेदार, समझदार और संस्कारवान नागरिक बनें इसके लिए उनको आज ही से ऐसा करना और बनना सिखाएं।

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