जीएम फूड बिना मंजूरी बाजार में

Samachar Jagat | Saturday, 04 Aug 2018 10:52:31 AM
GM Foods In Approved Market

देश में आनुवांशिक रूप से परिवर्तित (जीएम) खाद्य पदार्थों की बिक्री पर पाबंदी के बावजूद से बाजार में धडल्ले से बिक रहे हैं। इनमें कई खाद्य तेल शामिल है, जिनमें ज्यादातर विदेशों से आयातित है। सेंटर फॉर साइंस एंड एनवायरमेंट (सीएसई) की महानिदेशक सुनीता नारायण के अनुसार एफएसएसएआई की मंजूरी के बिना जीएम खाद्य पदार्थों का उत्पादन, बिक्री और आयात प्रतिबंधित है। बाजार से 65 खाद्य पदार्थों की जांच की गई। इनमें से 21 जीएम पॉजीटिव निकले। इनमें तेल के 16 में से 9, पैक खाद्य पदार्थों के 39 में से 10 तथा शिशु आहार के 8 में से 2 नमूने जीएम खाद्य निकले।

 यहां यह बता दें कि जीएम आर्गेनिज्म (पौधे, जानवर) में डीएनए को इस तरह बदला जाता है जैसे प्राकृतिक तरीके से होने वाली प्रजनन प्रक्रिया में नहीं होता। इस प्रक्रिया में एक प्राणी या वनस्पति के जीन को निकालकर दूसरे असंबंधित प्राणी या वनस्पति में डाला जाता है। इस बारे में वैज्ञानिक का दावा है कि जीएम फसलों की उत्पादकता और प्रतिरोधिकता अधिक होती है। इस तकनीक से सूखे जैसी प्राकृतिक आपदाओं से लड़ने वाली नस्लें तैयार की जा सकती है। हालांकि इसका मानव शरीर पर बुरा प्रभाव पड़ता है। कपास के तेल की जांच के दौरान उन उत्पादों को शामिल किया गया जो सोया, कपास और कैनोला से निर्मित है। 

दुनिया में बड़ी मात्रा में इनका उत्पादन जीएम फसलों से किया जा रहा है। देश में निर्मित सिर्फ एक उत्पाद जीएम पॉजीटिव पाया गया जो कपास का तेल है। कैनोला तेल के चार ब्रांड कैनड्रोप, फेरेल जियो और हडसन में जीएम होने की पुष्टि हुई है। भारत में कपास बीजों से निर्मित चार तेल अंकुर, गिनी, तिरूपति और विमल में जीएम खाद्यान्न पाया गया। पैक खाद्य पदार्थों में पेनकेक सिरप, पॉपकॉर्न हॉट एन स्पाइसी, फ्रूट लूप्स, बटर एंड गालिके क्रौटॉन्स, कोर्न पक्स, सिलकेन टोफू और क्रिप्सी कॉर्न फ्लेक्स शामिल है। इन सब स्थितियों के मद्देनजर जीएम खाद्य पदार्थों की बिक्री के लिए अभी खाद्य संस्था एवं मानक प्राधिकरण (एफएसएसएआई) मानक तैयार करने में जुटा है।

 फिलहाल यदि खाद्य पदार्थ में 5 फीसदी से कम जीएम कंटेट है तो बिना किसी घोषणा के कंपनियां इन्हेें बेच सकती है। इससे ज्यादा होने पर उन्हें लेबल लगाकर इसकी घोषणा करनी होगी। कंपनियों को यह अधिकार स्वत: घोषणा के आधार पर दिया जा रहा है। हालांकि सीएसआई ने इस प्रस्ताव पर आपत्ति जताई है। खास बात यह है कि जीएम खाद्यान्न पर फिलहाल भारत में चार कानून बनाए ्रगए हैं, पर व्यवहार में उनका पालन नहीं हो रहा है।
 



 

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