लक्ष्य सधे जीवन सधे

Samachar Jagat | Thursday, 06 Jun 2019 02:30:32 PM
Goal is half life

बहुत सारे लोगों से जब कभी पूछा जाता है कि आपको जीवन में करना क्या है तो वे कुछ भी जवाब नहीं दे पाते हैं अर्थात् जीवन की तो बात अलग है उन्हें यही नहीं मालूम होता कि कल क्या करना है, आज क्या करना है और अब क्या करना है। ऐसे में उसका जीवन कैसा होगा, यह आसानी से समझ में आने वाली बात है। बिना उद्देश्य जीवन कुछ भी नहीं है। इस बात को समझने के लिए एक उदाहरण दिया जा रहा है

एक ऐसा युवा जिसे दौड़ने का बहुत शौक था। वह घर की छत पर दौड़ता था, यहां तक कि कमरे में भी दौड़ते रहता-इधर-उधर। लेकिन उसे यह कतई मालूम नहीं था कि वह दौड़ क्यों लगाता है? एक दिन वह घर से बाहर दौड़ने के लिए निकला और तेजी से लगा दौड़ने। दौड़ते-दौड़ते वह चौराहे पर पहुंच गया। अब उसके कदम ठिठक गए और रूक गए कि अब मैं किधर जाऊं, कौनसी सडक़ पर दौडूं मुझे तो इसका बिल्कुल भी पता ही नहीं है। वह बहुत निराश और चिंतित था। वह चौराहे के बीच में अपने पैर गढ़ाए खड़ा था। तभी उधर से एक वृद्ध व्यक्ति गुजर रहा था, उसने उस युवक को इस हालत में खड़े देखकर पूछा कि तुम यहां बीच चौराहे पर क्यों खड़े हो? उसमें वृद्ध व्यक्ति से पूछा कि मुझे तनिक भी मालूम नहीं है कि किस सडक़ पर दौडूं। वृद्ध व्यक्ति ने कहा कि तुम्हें तो दौड़ना है केवल, इससे क्या फर्क पड़ता है कि सडक़ कहां के लिए जाती है।

वह युवा अपने माथे को पकड़ कर बोला जब मुझे यही नहीं मालूम कि मुझे कब दौड़ना है, कितना दौड़ना है, क्यों दौड़ना है और कहां दौड़ना है तो फिर ऐसा दौड़ना मेरे लिए कुछ भी मायने नहीं रखता है। आपका जैसा भी जीवन है, जिस भी हालत में आप हैं, जैसी भी मनोदशा आपकी है, उसके पीछे केवल आप हैं। यदि आपने अपने जीवन का कोई लक्ष्य निर्धारित कर रखा है तो इसके बाद में ही सारी मनोवृतियां काम करने के लिए सक्रिय हो पाती हैं। 

आपका विजन अर्थात् मिशन क्लीयर होना बहुत जरूरी होता है, इसके पश्चात ही लगन, ललक, दृढ़ निश्चय और समर्पण काम आते हैं और आपको वहां पहुंचाते हैं जहां आप पहुंचना चाहते हैं। लक्ष्य ही है जो जीवन मेें एकाग्रचितता लाता है, नियमितता लाता है, संयम लाता है, लगन पैदा करता है, संकल्प और समर्पण को साकार करता है। जीवन बहुत सरल है, आसान है इसे जटिल न समझें और न जटिल बनाने का प्रयास करें।

प्रेरणा बिन्दु:- 
ऊंची चिकनी एक दीवार मकड़ी हुई पैरों पे सवार
जाला छत पर लटक रहा था, तन मकड़ी को पटक रहा था
तन पर हो गया मन भारी, गिर-गिर हिम्मत ना हारी
गिरकर उठना ही उठना है लक्ष्य पथ पर नित बढ़ना है।



 

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