पीएनबी में भ्रष्टाचार का स्वर्णकाल

Samachar Jagat | Wednesday, 16 May 2018 04:58:06 PM
Golden Age of corruption in PNB

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पंजाब नेशनल बैंक में 13000 करोड़ रुपए का महाघोटाला ने सिर्फ भारत को ही नहीं बल्कि पूरी दुनिया को झकझोर दिया। इस भ्रष्टाचार के महासमुन्दर में सत्ताधारी सरकारों ने देश की आजादी पर अमिट काला धब्बा लगा दिया। गौरतलब है कि अंग्रेजों ने 260 वर्षों तक भारत का अकूत खजाना लूटकर इंग्लैण्ड भेजते रहे और अब आजादी के 70 सालों तक हमारे ही देश के लोग भारत का खजाना लूटकर विदेशों में भेजते रहे जिस पर हमारी सरकारें मौन होकर खामोश बैठी रही। ताज्जुब की बात यह है कि नीरज मोदी 2011 से पीएनबी से अरबों रुपए देश का खजाना खुलेआम लूटकर विदेशों में भेजता रहा।

 क्या यह मुमकिन है कि इस लूट की भवन गर्वनर, रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया सहित उच्चाधिकारियों, केंद्रीय वित्त मंत्रालय के मंत्री सहित अन्य उच्चाधिकारियों, पंजाब नेशनल बैंक के सीएमडी/एमडी, पीएनबी का सीवीओ, कार्यपालक निदेशकों, सभी बैंक के ऑडिटर्स एवं उच्चाधिकारियों को इस महाघोटाला लूट की खबर नहीं हो। उल्लेखनीय है कि इस लूट के संबंध में एक शिकायककर्ता जी.एस. गुप्ता ने प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी को दिनांक 11-4-2018 को पत्र लिखकर सूचित किया था कि- ‘‘पीएनबी में नीरज मोदी द्वारा लूट का सिलसिला 2011 से जारी था जो कि यह गंभीर लूट का मामला दुनिया के सामने दिनांक 18-02-2018 को  आया। अगर यह मामला सामने नहीं आता तो पंजाब नेशनल बैंक जर्जर होकर बिखर जाती और भाजपा सरकार देखती रह जाती।’’

पीएनबी में 13000 करोड़ रुपए के महाघोटाला का राज हांगकांग में एक भारतीय बैंक कर्मचारी द्वारा रिश्वत मांगने की शिकायत आर.बी.आई के पास आयी थी तब आरबीआई ने पीएनबी के ऑफिसरों से इस शिकायत की सफाई मांगी थी। इस प्रारंभिक सफाई में जब एक कर्मचारी पकड़ा गया था तब इसके बाद महाघोटाला की भयानक आग की लपटें मीडिया द्वारा समुचित देश में दिनांक 18-02-2018 को फैल गई। शनै: शनै: इस बैंक की आग की लपटों में अन्य 31 बैंकें सीबीआई, ईडी, आईटी, एसएफआईओ सहित जांच एजेंसियों के शिकंजों में फंस गई।

पंजाब नेशनल बैंक के सीएमडी के.आर. कामत, एमडी ऊषा अनंत सुब्रह्मण्यन और एमडी सुनील मेहता सहित अन्य सभी उच्चाधिकारियों, आरबीआई के पूर्व गर्वनर रघुराम राजन, गर्वनर उर्जित पटेल, पूर्व केंद्रीय वित्त मंत्री पी. चिदम्बरम, पूर्व प्रधानमंत्री डॉ. मनमोहन सिंह एवं वर्तमान वित्त मंत्री अरुण जेटली की देखरेख में पीएनबी महाघोटाला की लूट में फंसकर बैंक जर्जर हो रही थी किन्तु कार्यवाही इसलिए नहीं हो रही थी इस कांड में मंत्रियों के रिश्तेदार, पत्नी, बेटे शामिल थे क्योंकि नीरज मोदी को संरक्षण दिए बिना इतना बड़ा भयाभय भ्रष्टाचार का गुब्बारा समूचे भारत में नहीं फैलता, यह पूरा देश ही नहीं बल्कि विश्व भी भलीभांति जानता है। स्मरण रहे कि अगर केंद्र सरकार नीरज मोदी को संरक्षण देने से इंकार करता है तब यह बताए कि भाजपा सरकार के दौरान जब वैभव नाम से एक शख्स ने 07 मई, 2015 को पीएमओ, ईडी, सेबी, गुजराज और महाराष्ट्र सरकार को इस महाघोटाला की सूचना दी थी तब प्रधानमंत्री एवं वित्त मंत्री ने तुरंत कार्यवाही क्यों नहीं की।

इतना ही नहीं बल्कि 26 जुलाई, 2016 को एक और शख्स हरिप्रसाद ने भी पीएमओ को शिकायत की थी कि इस महाघोटाले का चौकीदार नीरज मोदी विदेश भागेगा, जिस पर तुरंत कार्यवाही की जाए किन्तु फिर भी केंद्र सरकार ने कोई कार्यवाही नहीं की थी और किसी भी जांच एजेंसी इसे पकड़ नहीं पाई और तत्पश्चात् नीरज मोदी भारत से विदेश भागने में सफल हो गया। अत: इस सत्य को नहीं नकारा जा सकता कि देश की बड़ी बैक पीएनबी में हुआ 13000 करोड़ रुपए का महाघोटाला शीर्ष मंत्रियों, वित्त मंत्रालयों के उच्चाधिकारियों द्वारा नीरज मोदी को बिना संरक्षण दिए भ्रष्टाचार का यह भयाभय गुब्बारा भयानक रूप धारण नहीं करता।

 उदाहरण के लिए इस संबंध में इलाहबाद बैंक के पूर्व डायरेक्टर दिनेश दुबे ने यह दावा करते हुए कहा था कि- ‘‘घोटाला यूपीए सरकार के वक्त जारी है। यूपीए सरकार में यह 10 से 50 गुना बढ़ गया। गीतांजलि जैम्स को गलत तरीके से कर्ज देने का विरोध करने पर इस्तीफा देना पड़ा। 2013 में सरकार और आरबीआई को डिसेन्ट नोट भेजने पर आदेश मिला कि लोन देना है। वित्त सचिव ने दबाव बनाया था।’’ देश की ईडी एवं आईटी को यह आशंका है कि पीएनबी में हुआ यह भ्रष्टाचार का घोटाला का आकार 30 हजार करोड़ रुपए से भी ऊपर जा सकता है। जिसमें पीएनबी के अलावा एसबीआई, आईसीआईसीआई, यूको, ओबीसी, इलाहबाद, एचडीएफसी, एक्सिस, कॉर्पेरेशन आदि प्रमुख 31 बैंकें शामिल है।

यह भी सत्य है कि नीरज मोदी द्वारा पीएनबी में हुआ महाघोटाले में बैंक खजाने के प्रमुख चौकीदार पूर्व वित्त मंत्री पी. चिदम्बरम, पूर्व सीएमडी के.आर. कामत, पूर्व एमडी उषा अनंत सुब्रह्मण्यन, बैंक का पूर्व सीवीओ शिवकुमार गुप्ता और एमडी सुनील मेहता शामिल है। जिन्होंने बैंक खजाने की चौकीदारी करते वक्त पीएनबी को लुटाने में नीरज मोदी की 07 साल (2011-2018) तक भरपूर मदद की थी अन्यथा यह चौकीदार बैंक के प्रति वफादार होते तब तुरंत केंद्रीय वित्त मंत्री अरुण जेटली से सम्पर्क करके भयाभय लूट की सूचना उन्हें देते और तत्पश्चात् जेटली प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी को अवगत कराते।

उल्लेखनीय है कि पीएनबी में इस घोटाले का सिलसिला 2011 से जारी था और उस वक्त पीएनबी में आने से पूर्व के.आर. कामत इलाहबाद बैंक में सीएमडी थे और तत्पश्चात् पंजाब नेशनल बैंक में सीएमडी पद पर कामत का कार्यकाल 2010 से अक्टूबर 2014 तक, सीवीओ शिवकुमार का कार्याकाल 2011 से 30-11-2015, उषा अनंत सुब्रह्मण्यन का कार्यकाल 19-07-2017 से 11-11-2017 तक कार्यपालक निदेशक और तत्पश्चात् 14-08-2015 से अप्रैल 2017 तक एमडी पद पर कार्यरत रहे और उसके पश्चात् सुनील मेहता ने 05-05-2017 बैंक में एमडी पद पर कार्य ग्रहण किया। 

नीरज मोदी के शिकंजे में 31 बैंकें फंसी हुई थी उनमें पंजाब नेशनल बैंक में आने से पूर्व के.आर. कामत इलाहबाद बैंक में सीएमडी पद पर, उषा अनंत सुब्रह्मण्यन बैंक ऑफ बड़ौदा में महाप्रबंधक पद पर, शिव कुमार गुप्ता स्टेट बैंक ऑफ इंडिया में महाप्रबंधक, सुनील मेहता इलाहबाद बैंक में महाप्रबंधक (2012-16) और उसके बाद सुनील मेहता कॉर्पेरेशन बैंक में कार्यपालक निदेशक (22-01-2016 से 04-05-2017) पद पर और तत्पश्चात् पीएनबी में 05-05-2017 से लेकर अब तक एमडी पद पर नीरज मोदी के साथ मिलकर उक्त बैंकों में गघ्इ/इ/एट्ट (गैर निष्पादित संपत्तियां) के जरिए अरबों रुपयों का घाटा दिखाकर बैंकों को जर्जर कर दिया। इस पर भी केंद्र सरकार बजाय उक्त अधिकारियों को बर्खास्त करने एवं उनके ठिकानों पर सीबीआई छापे डलवाने की अपेक्षा केंद्रीय वित्त मंत्री जेटली ने बैंकों को अरबों रुपए का अनुदान देकर भ्रष्टाचार को छिपा दिया।

नीरज मोदी के महाघोटाले से पूरे देश में बवाल खड़ा हो गया। आने वाले राज्यों में चुनावों को देखते हुए केंद्र सरकार ने तुरंत फुर्ती दिखाते हुए सख्त कदम उठाए और पीएनबी के पूर्व महाप्रबंधक राजेश जिन्दल, 04 उपमहाप्रबंधक, पूर्व डिप्टी मैनेजर गोकुलनाथ शेट्टी, ऑफिसर आर.के. जैन, पी.सी. जैन सहित 20 कर्मचारियों को गिरफ्तार करके जेलों में बंद कर दिया किन्तु बैंक के किसी भी सीएमडी के.आर. कामत, एमडी उषा अनंत सुब्रह्मण्यन, एमडी सुनील मेहता, सीवीओ शिव कुमार गुप्ता एवं पीएनबी का वर्तमान में कार्यरत सीवीओ तथा अन्य किसी केबिनेट व रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया के किसी उच्चाधिकारी को गिरफ्तार नहीं किया जो कि इस महाघोटाला में शामिल थे।

 उल्लेखनीय है कि करोड़ों/अरबों रुपयों के लोन एण्ड एडवांस के स्टेटमेन्ट्स उनके पास भेजे जाते हैं। इतना ही नहीं बल्कि पीएनबी के एमडी सुनील मेहता ने अपने टॉप मैनेजमेंट का बचाव करते हुए दिनांक 10-04-2018 को मीडिया के जरिए यह कहा था कि- ‘‘इस काम के लिए टॉप मैनेजमेंट जिम्मेदार नहीं होता। अगर नीचे का कोई कर्मचारी कुछ करना चाहे और ठान ले कि गलती करनी है तो टॉप मैनजमेंट कुछ नहीं कर सकता।’’ 

इस संबंध में शिकायतकर्ता एक शख्स जी.एस. गुप्ता ने सुनील मेहता को दिनांक 26-03-2018 को पत्र लिखा जिसमें एमडी मेहता से निम्न इस घोटाले से संबंधित सवाल पूछे गए कि- 1. नीरज मोदी की 13000 करोड़ लूट का गंभीर मामला दिनांक 18-02-2018 को देश के सामने आया था। आपके एमडी पद ग्रहण करने के बाद क्या आपको यह पता नहीं था कि नीरज मोदी बैंक को लूट रहा है। 2. क्या नीरज मोदी के करोड़ों/अरबों रुपए के लोन एण्ड एडवांस के स्टेटमेन्ट प्रधान कार्यालय नई दिल्ली के सीवीओ, कार्यपालक निदेशकों को नहीं भेजे जा रहे थे। 3. क्या बैंक के सीवीओ, ऑडिट एण्ड इन्स्पेक्शन विभाग के महाप्रबंधक/उपमहाप्रबंधक को मुम्बई से भेजे गए स्टेटमेन्ट्स से यह पता नहीं चल रहा था कि नीरज मोदी बैंक को लूट कर उसे जर्जर कर रहा है।

 4. क्या प्रधान कार्यालय नई दिल्ली में बोर्ड ऑफ डायरेक्टर्स की मीटिंग में एमडी सुनील मेहता ने 13000 करोड़ रुपए का यह ज्वलंत मुद्दा नहीं उठाया था जबकि सुनील मेहता बैंक ट्यूर पर कई बार मुम्बई गए तब वहां यह गंभीर मामला महाप्रबंधक ने एमडी के सामने नहीं रखा था। 5. क्या बैंक के टॉप मैनेजमेन्ट ने किसी कर्मचारी को इतनी बड़ी पॉवर दे रखी है कि वह अरबों रुपए के लोन को वह सीधा कर दे। अगर यह इतनी भारी भरकम पावर किसी कर्मचारी को नहीं दे रखी है तब एमडी मेहता यह बताए कि कर्मचारी कैसे गलती करने की ठान लेगा।

तात्पर्य यही है कि पंजाब नेशनल बैंक में भ्रष्टाचार के महासमुंदर में टॉप मैनेजमेन्ट नीरज मोदी के साथ डुबकी लगाकर मस्ती मार रहे थे और केंद्र सरकार खामोश थी। अत: इस सत्य को नहीं नकारा जा सकता कि भ्रष्टाचार के महासमंदर में मगरमच्छ बच जाते हैं और मछलियां फंस जाती है।
(ये लेखक के निजी विचार हैं)

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