स्टार्टअप की नई नीति से रोजगार बढ़ाएगी सरकार

Samachar Jagat | Wednesday, 29 Aug 2018 01:49:04 PM
Government to increase employment with new startup policy

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केंद्र सरकार स्टार्टअप के जरिए रोजगार बढ़ाने की तैयारी कर रही है। जल्द ही स्टार्टअप में विदेशी निवेश का रास्ता आसान करने और रोजगार बढ़ाने के लिए नई नीति का ऐलान हो सकता है। इस बारे में सरकारी सूत्रों ने बताया है कि सरकार की नई नीति के तहत बड़ी हिस्सेदारी बेचने के बावजूद स्टार्टअप के प्रमोटर को अपना मालिकाना हक खोने का डर नहीं रहेगा। सरकार जिस नए तरीके पर काम कर रही है, उसके लिए एक नया कानून बनाया जाएगा। नए कानून में एक ऐसा फ्रेमवर्क तैयार किया जा रहा है। इस नई नीति के जरिए विदेशी निवेश करने वालों का स्टार्टअप कंपनी पर सीमित नियंत्रण रहेगा। इससे देश के भीतर ही नई कंपनियों में रोजगार के ज्यादा मौके पैदा होंगे। नए कानून के तहत स्टार्टअप के प्रमोटर के पास हिस्सेदारी भले ही कम हो जाए, लेकिन मालिकाना हक पूरा रहेगा। सरकार का मानना है कि ऐेसे कदम से स्टार्टअप के साथ-साथ वेंचर कैपिटल फर्म को भी फायदा होगा।

 वो निवेश की सीमा बढ़ाकर ज्यादा मुनाफा कमा सकते हैं। हालांकि सरकार इस निवेश की समय सीमा एक दायरे में बांधने के हक में है और एक तय समय सीमा तक निवेश करना जरूरी करने का प्रावधान कर रही है। हाल में इस मुद्दे पर संबंधित मंत्रालयों के अधिकारियों के साथ वित्त मंत्रालय में एक अहम बैठक हुई थी, जिसमें यह फैसला लिया गया है। यहां यह बता दें कि भारत में इस समय 52 सौ के करीब है स्टार्टअप, जिसके 2020 तक 10 हजार 500 तक होने की आशा है। भारत अमेरिका और यूरोप का मॉडल अपनाने की तैयारी में है, ताकि स्टार्टअप देश में ही रोजगार पैदा करते रहे। अक्सर जब बड़ी कंपनियां छोटे स्टार्टअप को खरीद लेती है या प्रबंधकीय नियंत्रण पा लेते हैं तो धीरे-धीरे उसका अस्तित्व ही खतरे में पड़ जाता है।

 मौजूदा नियमों में इक्विरी के जरिए एक तय सीमा से अधिक निवेेश के बाद निवेशक को कंपनी में प्रबंधकीय नियंत्रण यानी मैनेजमेंट कंट्रोल देना होता है, लेकिन इस नई नीति में मैनेजमेंट कंट्रोल स्टार्टअप शुरू करने वाले के पास ही रहेगा। इधर राजस्थान में मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे ने पिछले सप्ताह जयपुर में ‘‘भामाशाह टेक्नो हब’’ का उद्घाटन किया। उन्होंने कहा कि प्रदेश में स्टार्टअप से एक लाख रोजगार पैदा होने की उम्मीद है। करीब 70 करोड़ की लागत से बने इस सेंटर में स्टार्टअप को मुफ्त में काम करने की जगह दी जाएगी। उन्हें हर तरह की विशेषज्ञता मुहैया कराई जाएगी। दरअसल सरकार चाहती है कि राज्य में एक ऐसा स्टार्टअप हब बनाया जाए जिसमें एक ही छत के नीचे कारोबारियों की इस नई पौध को दफ्तर, मीटिंग रूम और एक बड़े प्रोजेक्ट को चलाने के लिए तमाम जरूरी बुनियादी ढांचा मिले। 

हब में अलग-अलग कंपनियों के एक्सपर्ट इन स्टार्टअप को एक आइडिया को कारोबार में तब्दील करने के गुट भी सिखाएंगा। इन स्टार्टअप को सरकार दो लाख रुपए तक की मदद भी देगी। अगर पैसों की वजह से प्रोजेक्ट अटका है तो 25 लाख रुपए तक की फंडिंग की जाएगी। राजस्थान सरकार ने इसके लिए 500 करोड़ रुपए का बजट रखा है। इसमें से 50 करोड़ रुपए पर्यावरण में सुधार से जुड़े ग्रीन, प्रोजेक्ट पर जोर 100 करोड़ रुपए महिलाओं से जुड़े कार्यों पर खासतौर से खर्च किए जाएंगे। इसमें शामिल किए जाने वाले स्टार्टअप के लिए कोई बंदिश नहीं होगी।

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