जीडीपी दर में भारी गिरावट

Samachar Jagat | Tuesday, 04 Jun 2019 03:09:11 PM
Great drop in GDP rates

केंद्रीय सांख्यिकी कार्यालय ने सकल घरेलू उत्पाद (जीडीपी) और रोजगार से जुड़े तमाम आंकड़े जारी कर दिए हैं। जीडीपी से जुड़े आंकड़े बताते हैं कि इस तिमाही में देश की जीडीपी ग्रोथ 6 फीसदी से नीचे आ गई है। देश की आर्थिक वृद्धि दर यानी जीडीपी वित्त वर्ष 2018-19 की चौथी तिमाही में धीमी पडक़र 5.8 फीसदी रही, जो एक साल पहले इसी तिमाही में 8.1 फीसदी थी। पिछले 5 सालों में जीडीपी का यह सबसे निचला स्तर है। यहां यह उल्लेखनीय है कि वर्ष 2018-19 की चौथी तिमाही के आंकड़े चुनावों की वजह से निर्धारित समय पर जारी नहीं हो पाए थे, जिन्हें बीते सप्ताह शुक्रवार को जारी कर दिया गया। इसके अनुसार इस अवधि में जीडीपी ग्रोथ रेट 5.8 प्रतिशत रही, जो कि अनुमानित दर 6.5 से बहुत कम है। यहां यह भी उल्लेखनीय है कि भारत दुनिया की सबसे तेजी से बढ़ती अर्थव्यवस्था होने का दावा अब नहीं कर सकता। यह दर्जा अब चीन ने हासिल कर लिया है। 

जनवरी 2019 से मार्च 2019 की तिमाही में उसकी ग्रोथ रेट 6 फीसदी रही है। पूरे वित्त वर्ष 2018-19 में जीडीपी वृद्धि दर 6.8 फीसदी रही जो इससे पूर्व वित्त वर्ष में 7.2 फीसदी थी। बता दें कि वित्त वर्ष 2018-19 में राजकोषीय घाटा जीडीपी का 3.39 फीसदी रहा, जो बजट में संशोधित अनुमान 3.4 फीसदी से कम है। यही नहीं आठ बुनियादी उद्योगों की वृद्धि दर अप्रैल में कम होकर 2.6 फीसदी रही, जो पिछले इसी महीने में 4.7 फीसदी रही थी। भारत में बेरोजगारी की दर 2017-18 में 45 साल के उच्च स्तर के उच्च स्तर 6.10 फीसदी पर पहुंच गई है। वित्त वर्ष 2017-18 की चौथी देश की जीडीपी विकास दर 7.7 फीसदी थी। वित्त वर्ष 2018-19 में राजकोषीय घाटा सकल घरेलू उत्पाद का 3.9 प्रतिशत रहा है। 

यह बजट के 3.40 प्रतिशत के संशोधित अनुमान की तुलना में कम है। राजकोषीय घाटे के बजट के मुख्य कारण कर से अन्यत्र अन्य मदों से प्राप्त होने वाले राजस्व में वृद्धि तथा खर्च का कम रहना है। इसके साथ ही जैसा कि ऊपर कहा गया है, भारत में सबसे तेजी से बढ़ने वाली अर्थव्यवस्था का ताज खो दिया है। भारत अब चीन से पिछड़ गया है। चीन की विकास दर 6.4 फीसदी रही है। भारत में बेरोजगारी की दर 45 साल के उच्च स्तर तक पहुंच गई है। वैसे भी मोदी सरकार के पहले कार्यकाल में रोजगार एक बड़ा मुद्दा रहा है। रोजगार संकट को लेकर विपक्ष लगातार उन पर हमलावर रहा। संभावित आर्थिक मंदी से रोजगार के नए अवसर पैदा करना भी बड़ी चुनौती साबित होगी। यहां यह बता दें कि कुछ महीनों पहले बेरोजगारी पर एनएसएसओ (नेशनल सैंपल सर्वे कार्यालय) की रिपोर्ट मीडिया में लीक हो जाने के बाद सनसनी फैल गई थी। 

इस रिपोर्ट में पता चला था कि पिछले साल बेरोजगारी की दर साढ़े चार दशक यानी 45 वर्षों में सबसे ऊपर पहुंच गई है। यह आंकड़ा छह दशमलव एक (6.1) फीसदी था। अब केंद्रीय सांख्यिकी कार्यालय की ओर से जारी आंकड़े में भी यही है। यह आंकड़ा चुनाव के दौरान आया था। इसलिए इसकी पुष्टि नहीं हो सकी थी। बेरोजगारी के हालत का अंदाजा लगाने के लिए तथ्य और भी है। मसलन देश में रोजगार मांगने वाले नए युवाओं की संख्या कम से कम डेढ़ करोड़ प्रतिवर्ष की रफ्तार से बढ़ रही है।

सही सही आकलन में मुश्किल यह है कि सरकार कई बार बेरोजगारी के आंकड़े बताने में अपनी असमर्थता जता चुकी है। खुद नीति आयोग कबूल कर चुका है कि ये आंकड़े उपलब्ध नहीं है। लब्बोलुआव यह है कि बेरोजगारी के सभी प्रकारों को जोडक़र समस्या इतनी व्यापक है कि वह शहर-गांव, महिला-पुरुष, युवा-प्रौढ़, प्रशिक्षित, शिक्षित-अशिक्षित यानी देश के हर वर्ग को अपनी चपेट में लिए हुए हैं। इसलिए सरकार की प्राथमिकता की सूची में सबसे ऊपर बेरोजगारी से निपटने का लक्ष्य होना चाहिए।



 

यहां क्लिक करें : हर पल अपडेट रहने के लिए डाउनलोड करें, समाचार जगत मोबाइल एप। हिन्दी चटपटी एवं रोचक खबरों से जुड़े और अन्य अपडेट हासिल करने के लिए हमें फेसबुक और ट्विटर पर फॉलो करें!

loading...
रिलेटेड न्यूज़
ताज़ा खबर

Copyright @ 2019 Samachar Jagat, Jaipur. All Right Reserved.