लालच जिंदगी को रास्ते से भटका देता है

Samachar Jagat | Thursday, 21 Feb 2019 05:43:44 PM
Greed lays life out of the way

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बात पुराने समय की जरूर है लेकिन है बड़ी प्रासांगिक और उद्देश्य से भरी। एक ब्राह्मण यजमानों के घरों में पूजा-पाठ करवाकर अपनी गृहस्थी चलाता था लेकिन कुछ समय बाद वहां अकाल पड़ गया। अब ब्राह्मण के सामने गृहस्थी चलाने का संकट खड़ा हो गया। अब रोजी रोटी तक की भी कोई व्यवस्था नहीं हो पा रही थी। उसने सोचा, ऐसे जीने से तो मर जाना ही भला। यही सोचकर वह मरने के लिए किसी जंगल में गया। वहां उसने एक शेर को आते हुए देख मन में विचार किया- ‘यह शेर मुझे अपना आहार बना ले तो इसकी भूख मिट जाएगी और मेरी मृत्यु की इच्छा भी पूरी हो जाएगी।’ ऐसा मन में सोचकर वह उस शेर के सामने खड़ा हो गया। शेर ने उसे अपने सामने ऐसे खड़ा हुआ देखकर मनुष्य वाणी में बोलने लगा- ‘क्या बात है? मेरे सामने इस तरह से क्यों खड़े हो?’  ब्राह्मण ने अपनी दुर्दशा उस शेर के सामने बंया कर दी। शेर को ब्राह्मण की दुर्दशा पर बहुत दया आई। शेर वास्तव में वन देवता थे। अपनी असली रूप में आकर उन्होंने ब्राह्मण को हजार अशर्फियां दे दी और भविष्य में कभी भी जीवन से नहीं हारने की सलाह दी।


अब ब्राह्मण बहुत खुश था, वह प्रसन्नता के साथ अपने घर लौट आया। वह दूसरे दिन दुकान पर एक अशर्फी लेकर कुछ सामान खरीदने गया तो उस अशर्फी को देखकर दुकानदार को थोड़ा शक हुआ और ब्राह्मण से पूछा- ‘तुम्हें यह अशर्फी कहां से प्राप्त हुई है। ब्राह्मण अपनी पूरी कहानी दुकानदार को सच-सच बता दी। दुकानदार बहुत ही लालची था। उसने सोचा जब वन देवता इस ब्राह्मण को इतनी सारी अशर्फियां एक साथ दे सकता है तो मुझे भी दे सकता है। मुझे भी ब्राह्मण वाला तरीका ही अपनाना चाहिए। यही सोचकर वह अगले दिन जंगल में गया और एक स्थान पर बैठ गया। थोड़ी देर बाद में वहां शेर आया और दुकानदार ने ब्राह्मण की तरह ही उसे खा लेने की प्रार्थना की। शेर ने दुकानदार से खा लेने का कारण पूछा तो दुकानदार ने अपनी कहानी में झूठे ही गरीबी की कहानी बताई। शेर दुकानदार की सारी कहानी से यह समझ गया कि दुकानदार बिल्कुल झूठी कहानी कह रहा है और धन पाना चाहता है। 

तब वन देवता रूपी शेर ने उस दुकानदार पर हमला कर बहुत घायल कर दिया और कहने लगा- ‘आज तुम्हें जीवित छोड़ रहा हूं ताकि भविष्य में तू कभी लालच नहीं करे। यदि फिर भी तू इसी लालच में फंसा रहा तो निश्चित ही अपने जीवन से हाथ धो बैठोगे। दुकानदार भयंकर पश्चाताप करता हुआ अपने घर लौट आया और मन में संकल्प लिया कि अब मैं कभी भी जीवन में लालच नहीं करूंगा। साथियो, छोटे-छोटे लोभ-लालच जीवन की खुशबू को खा जाते हैं, जिंदगी को रास्ते से उतार देती है, जीवन को भटका देती है, लोगों की नजर में गिरा देते हैं, अपनी नजरों में भी गिरा देते हैं और जीवन की उज्ज्वलता पर अमिट कलंक लगा देते हैं। इसलिए जीवन लोभ-लालच के लिए नहीं है, प्रतिशोध के लिए नहीं है, यह तो शोध के लिए है बोध के लिए है। अपने जीवन को उज्ज्वल रखिए आप हमेशा खुश रहेंगे।

प्रेरणा बिन्दु:- 
लालच से मन बिगड़े और मन से बिगड़े जिंदगी।
अपनी मेहनत अपनी जिंदगी कर मेहनत की वंदगी।।

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