सख्ती का रास्ता

Samachar Jagat | Friday, 08 Jun 2018 01:25:50 PM
Hard way

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चार साल से भी ज्यादा समय के बाद ब्याज दरें बढ़ाने के अपने फैसले के बावजूद भारतीय रिजर्व बैंक ने किसी को चौंकाया नहीं है। बाजार में यह राय बनने लगी थी कि देश के और वैश्विक माहौल को देखते हुए कुछ कड़े कदम उठाए ही जाएंगे। मौद्रिक नीति समिति की दूसरी द्वैमासिक समीक्षा बैठक के बाद रिजर्व बैंक ने रीपो और रिवर् रीपो रेट में 0.25 फीसदी की बढ़ोतरी की है। इसके चलते रीपो रेट 6.25 फीसदी और रिवर्स रीपो रेट 6 फीसदी हो गई है।

 रीपो रेट वह ब्याज दर है, जिस पर तमाम बैंक आरबीआई से कर्ज उठाते हैं, जबकि अपने पास पड़ा पैसा उन्हें आरबीआई में जमा करना हो तो इस पर उनको मिलने वाले ब्याज की दर रिवर्स रीपो रेट कहलाती है। 2014 में मोदी सरकार के सत्ता में आने के बाद पहली बार ब्याज दरें बढ़ाई गई हैं। कार लोन और होम लोन पर बैंक अपनी ब्याज दरें पहले ही बढ़ाने लगे थे, अब वे इन्हें और बढ़ा सकते हैं। 

जाहिर है, कर्ज महंगा होगा तो ईएमआई भी बढ़ जाएगी। इससे संकटग्रस्त रीयल्टी सेक्टर के फिर से ऊपर उठने की उम्मीद मंद पड़ गई है। मार्केट में कन्ज्यूमर ड्यूरेबल्स की बिक्री नरम पड़ सकती है और बैंकों से पैसा उठाकर किए जाने वाले निजी निवेश में सुस्ती आ सकती है, लेकिन आरबीआई के पास कोई चारा ही नहीं था। कच्चे तेल के बढ़ते दाम, डॉलर की मजबूती और बढ़ती मुद्रास्फीति ने अर्थव्यवस्था पर दबाव बढ़ा दिया था। ऐसे में बाजार का हाथ तंग करने का रास्ता ही बचा था। अच्छी बात यह हुई है कि इससे अनिश्चितता छंट गई है। यही वजह है कि ब्याज दरें बढ़ाने का फैसला सुनकर भी शेयर बाजार ऊपर की ही तरफ गए। 

आरबीआई ने 2018-19 की पहली छमाही के लिए खुदरा मुद्रास्फीति के अनुमान को संशोधित कर 4.8-4.9 प्रतिशत और दूसरी छमाही के लिए 4.7 प्रतिशत किया। मुद्रास्फीति के इस अनुमान में केद्रीय कर्मचारियों को मिलने वाले बढ़े महंगाई भत्ते का असर शामिल है और इसमें वृद्धि का जोखिम भी बताया गया है। बाजार को आश्वस्त करते हुए आरबीआई ने कहा है कि रेट बढऩे का सिलसिला लगातार जारी रहने की संभावना कम है और अर्थव्यवस्था के स्थिर, फिर बेहतर होते जाने का अनुमान है। वित्त वर्ष 2019 के लिए जीडीपी ग्रोथ का अनुमान 7.4 फीसदी पर बरकरार रखा गया है। 

आरबीआई गवर्नर उॢजत पटेल ने बैठक के बाद कहा कि मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर की क्षमता बढ़ी है। ग्रामीण और शहरी इलाकों में खपत बढ़ रही है। मॉनसून अच्छा रहने का अनुमान है, इसलिए कृषि पैदावार बेहतर होने की उम्मीद है। बहरहाल, एक बात तय है कि इस फैसले के बाद इकॉनमी को रफ्तार देने का काम अगले आम चुनाव तक सरकार को अपने निवेश से ही करना होगा।

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