मैदान से पहाड़ तक गर्मी का कहर

Samachar Jagat | Friday, 07 Jun 2019 03:33:30 PM
Heat from the ground to the mountain

इन दिनों करीब-करीब पूरा देश ही भीषण गर्मी की चपेट में है। करीब दो तिहाई जनसंख्या इसका कहर झेल रही है। देशभर में तीन दर्जन से ज्यादा लोगों की मौत हो चुकी है। राजस्थान में मंगलवार को 4 लोगों की मौत हो गई। इनमें जोधपुर में कुरियर कंपनी में काम करने वाले अब्दुल रहीम पठान (65) की मौत हो गई। टोंक में खेत से घर जा रहे हंसराज (45) बेहोश होकर गिर गए। इलाज के दौरान उनकी मौत हो गई। धोलपुर में एक मनरेगा मजदूर की और कोटा में 55 वर्षीय विमंदित चंदा बाई की मौत हो गई। सोमवार को भी गर्मी से 4 लोगों की मौत हो गई थी।

प्रदेश में चूरू में बीते शनिवार को पारा 50 डिग्री सेल्सियस को भी पार कर गया। जो मैदानी इलाके में सबसे अधिक है। लगातार चौथे दिन चूरू 48 डिग्री के साथ प्रदेश में सबसे गर्म रहा। मौसम विभाग ने 5 दिन के लिए प्रदेश में 29 जिलों में ‘रेड अलर्ट’ जारी किया है। मौसम विभाग ने राजस्थान के अलावा उत्तरप्रदेश, हरियाणा, मध्यप्रदेश, महाराष्ट्र और पंजाब में भी ‘रेड अलर्ट’ जारी किया है। यही नहीं उत्तराखंड, हिमाचल प्रदेश जैसे पहाड़ी राज्यों में भी ‘येलो अलर्ट’ है। यहां यह बता दें कि सामान्य से चार डिग्री अधिक तापमान होने पर ‘रेड अलर्ट’ जारी किया जाता है, जबकि ‘येलो अलर्ट’ में लू का पूर्वानुमान जारी किया जाता है। गर्मी की वजह से देश भर में बीते एक पखवाड़े में 35 से अधिक मौतें हो चुकी है।

सबसे अधिक मौतें तेलंगाना में हुई है। ‘एल्डोराडो वेदर वेबसाइट’ द्वारा दुनिया के सबसे गर्म 15 शहरों की जारी सूची में 10 भारतीय शहर है। बाकी 5 पाकिस्तान के है। वेबसाइट के अनुसार राजस्थान का चूरू और श्रीगंगानगर सबसे गर्म स्थान है। इस सूची में बाकी भारतीय शहर है, जैसलमेर, ग्वालियर, लखनऊ, बांदा, भोपाल, अकोला, बाड़मेर और बीकानेर। इस प्रकार देश के 10 शहरों में 5 राजस्थान के है। उत्तर भारत के प्रमुख शहरों दिल्ली, जयपुर, लखनऊ, इलाहाबाद समेत कई शहरों में पारा 45 डिग्री सेल्सियस को पार कर चुका है। यह सिलसिला उत्तर भारत तक सीमित नहीं है। दक्षिण भारत भी फिलहाल चिलचिलाती गर्मी का सामना कर रहा है। तेलंगाना, आंध्रप्रदेश, केरल, पुड्डुचेरी और तमिलनाडु के कई हिस्सों में पारा 44 डिग्री तक पहुंच गया है। और तो और कुछ खुशनुमा पहाड़ी शहरों में भी तीखी गर्मी दर्ज की गई है। 

शिमला में रविवार को अधिकतम तापमान 32 डिग्री सेल्सियस था और नैनीताल में 33 डिग्री सेल्सियस, जबकि मसूरी में एक जून को तापमान 38 डिग्री सेल्सियस तक पहुंच गया था। भारतीय मौसम विभाग (आईएमडी) के पुराने डेटा पर आधारित अध्ययन के अनुसार बीते दो दशकों में पहाड़ी इलाकों में गर्म दिनों की संख्या बढ़ती जा रही है। मौसम चक्र में आ रहे बदलाव से देश भर में गर्मी का दायरा बढ़ता गया है। 1950 के दशक में उच्च तापमान का क्षेत्र केवल दक्षिण मध्य भारत तक सीमित था, जहां 41 डिग्री सेल्सियस तक तापमान दर्ज किया जाता था। लेकिन अभी तो करीब-करीब पूरा भारत ही गर्मी का गढ़ बन गया है। मौसम विभाग के आंकड़ों के मुताबिक 1961 से 2018 के बीच तापमान में आश्चर्यजनक बढ़ोतरी (करीब 0.8 डिग्री सेल्सियस) दर्ज की गई है और गर्मी वाले दिनों की संख्या पूरे देश में बढ़ गई है। 

मौसम विभाग का मानना है कि अगर मानसून में बारिश पूर्वानुमान के अनुसार नहीं होती है तो 2019 बीते साल 2018 से भी ज्यादा गर्म होगा। भारी गर्मी अपने साथ जल संकट भी लाती है। पिछले कुछ वर्षों से बार-बार सूखे का सामना कर रहे महाराष्ट्र के विदर्भ और उत्तर प्रदेश, मध्यप्रदेश के बुंदेलखंड में पीने के पानी की समस्या बढ़ गई है। इन इलाकों के कई जलाशयों में पानी का स्तर क्षमता का 10 फीसदी ही रह गया है, जिससे कुछ फसलें संकटग्रस्ट हो गई है। सेंट्रल वॉटर कमीशन (केंद्रीय जल आयोग) के मुताबिक पानी का स्तर अभी बीते 10 सालों में सबसे कम है। मौसम विभाग के अनुसार एक जून के बाद से राजस्थान, मध्यप्रदेश और छत्तीसगढ़ समेत पूरे देश में 29 प्रतिशत कम बारिश हुई है। होना चाहिए था 11.6 मिलीमीटर लेकिन हुई 8.2 मिलीमीटर। मौसम विभाग ने अनुसार इस दौरान राजस्थान में 90 प्रतिशत, मध्यप्रदेश में 89 फीसदी और छत्तीसगढ़ में 23 प्रतिशत कम बारिश हुई। पूरे देश का औसत देखें तो इस वर्ष मार्च से मई के बीच मानसून से पहले होने वाली बारिश सामान्य से 25 प्रतिशत कम हुई है।

 लेकिन आम धारणा के विपरीत राजस्थान के मरूस्थलीय इलाकों में प्री-मानसून सामान्य से 57 फीसदी ज्यादा बारिश हुई। अरावली के पार पश्चिमी राजस्थान में बादल सामान्य से 65 फीसदी ज्यादा बरसे। मध्यप्रदेश और छत्तीसगढ़ में भी प्री-मानूसन बारिश में कमी नहीं रही। दोनों प्रदेशों में यह सामान्य रहा। बावजूद राजस्थान, मध्यप्रदेश और छत्तीसगढ़ में पारा 45 डिग्री पार है। तीनों प्रदेश जल संकट से जूझ रहे हैं। राजस्थान के 84 प्रतिशत बांध सूखे है। झीलों की नगरी उदयपुर की फतेहसागर झील का आधे से ज्यादा हिस्सा सूख गया है। मौसम विभाग के अनुसार मानसून के आगे बढ़ने के लिए अनुकूल मौसमी परिस्थितियां बन रही है और यह एक और देरी से 7 जून तक केरल पहुंच सकता है। 

मौसम विभाग द्वारा मंगलवार को जारी रिपोर्ट में कहा गया है कि देश के पूरे दक्षिणी प्रायद्वीप में बुधवार से समुद्र तल से 3.1 किलोमीटर ऊपर पूरब-पश्चिम ‘शीआर जोन’ का विकास होगा। इससे तीन दिन में मानसून के केरल तट पर पहुंचने के लिए अनुकूल परिस्थितियां बनेगी। विभाग के अनुसार अगले 24 घंटे में मानसून के दक्षिणी अरब सागर मालदीव-कोमोरीन क्षेत्र, दक्षिण पश्चिम, दक्षिण-पूर्व तथा मध्य बंगाल की खाड़ी में और आगे बढ़ने की उम्मीद है। कुल मिलाकर इस समय प्रशासन को बहुत ही सतर्क रहने की जरूरत है, उसे न सिर्फ जल संकट से जूझ रहे लोगों को पेयजल उपलब्ध कराने के विशेष प्रबंध करने होंगे, बल्कि गर्मी से हो रही बीमारियों से निपटने के उपाय भी करने होंगे।
 



 

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