हिमालयी क्षेत्रों में बड़ी शक्ति के भूकंप आ सकते हैं

Samachar Jagat | Saturday, 27 Apr 2019 04:52:34 PM
Himalayan areas can cause big power earthquakes

देश-दुनिया के भूगर्भीय अध्ययन और भूकंप के पुराने अनुभवों के आधार पर वैज्ञानिक मानते हैं कि हिमालयी क्षेत्रों में बड़ी शक्ति के भूकंप आ सकते हैं। बीते बुधवार को अरुणाचल प्रदेश और नेपाल ने भूकंप के झटके सहे। हाल ही में संपन्न देश के भूकंप विज्ञानियों के राष्ट्रीय सम्मेलन में चिंता जताई गई कि हमने अतीत की घटनाओं से कोई सबक नहीं सीखा। जरूरत इस बात की है कि देश भूकंप संबंधी सुरक्षा सुनिश्चित करे। ऐसे समय में जब देश के भूकंप विज्ञानी, भूगर्भीय परिवर्तनों के चलते आने वाले समय में बड़े भूकंपों की आशंका बता कर जानमाल की रक्षा के लिए गंभीर रणनीति बनाने की जरूरत बता रहे हैं। इसके अंतर्गत सार्वजनिक व निजी निर्माण का भूकंपरोधी होना तथा बचाव व राहत के लिए तंत्र विकसित किया जाए। इस मामले में जापान ऐसा मुल्क है, जिसने भूकंप के साथ जीना सीख लिया है। उन्होंने निर्माण की गुणवता के अलावा मानसिक रूप से भूकंप से जूझने की समझ विकसित कर ली है। 

दरअसल मनुष्य को भूकंप नहीं मारता। उसे गरीबी मारती है। अवैज्ञानिक तरीके से बनाए गए चलताऊ किए निर्माण जानलेवा साबित होते हैं। वर्ष 1993 में महाराष्ट्र, लातूर में आए भूकंप में 9 हजार लोगों की मौत की मुख्य वजह कच्चे मकान ही थे। दरअसल जहां देश में भूकंपरोधी आवासीय संस्कृति की पर्याप्त जानकारी आम लोगों को नहीं कराई जाती, वहीं गरीबी भी इस समस्या की जटिलता को बढ़ाती है। दूसरी ओर बिल्डर जो बहुमंजिली इमारतें बना रहे हैं, उनमें भूकंपरोधी तकनीकों का इस्तेमाल हुआ है कि नहीं, यह जांचने वाले विभाग पड़ताल नहीं करते। लोगों की प्राथमिकता कीमत का भाव-तोल होता है, बजाए कि सुरक्षा मानकों की कसौटी। आंकड़े बताते हैं कि गुजरात में 2001 के भुज केंद्रित भूकंप के चलते अहमदाबाद में 120 बहुमंजिली इमारतें ढह गई थी और 900 लोग मारे गए थे। क्या उन बिल्डरों की जवाबदेही तय करके उन्हें दंडित किया गया? 

हालांकि देश के भूकंप शोध संस्थान और आईआईटी अनुसंधानरत है कि भूकंप की पूर्व चेतावनी देने वाला तंत्र विकसित किया जाए। मगर फिलहाल ऐसी सटीक जानकारी देना संभव नहीं है। ऐसे में जरूरी हो जाता है कि हम ऐसा समाज बनाएं, जिसने भूकंप से उत्पन्न परिस्थितियों के जूझने की मानसिक व सुरक्षात्मक तैयारी रखी होगी। आपातकालीन परिस्थितियों में चिकित्सा व प्रभावित स्थलों तक राहत पहुंचाने की कारगर व्यवस्था की जाए। सही मायने में भूकंप संबंधी सुरक्षा हर नागरिक का अधिकार होना चाहिए। जिसके लिए केंद्र व राज्य सरकारों के अलावा राहत बचाव करने वाले संस्थानों में बेहतर तालमेल जरूरी है।
 



 

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