नई शिक्षा नीति के मसौदे से हिंदी की अनिवार्यता हटी

Samachar Jagat | Saturday, 08 Jun 2019 03:09:44 PM
Hindi mandatory draft of new education policy

Rajasthan Tourism App - Welcomes to the land of Sun, Sand and adventures

नई शिक्षा नीति के मसौदे में त्रिभाषा फार्मूले को लेकर उठे विवाद के बीच केंद्र सरकार ने सोमवार को नई शिक्षा नीति का संशोधित मसौदा जारी किया। इसमें गैर हिंदी भाषी राज्यों में हिंदी पढ़ाना अनिवार्य करने के विवादित प्रावधान को हटा दिया गया है। यहां यह उल्लेखनीय है कि तमिलनाडु में द्रमुक और अन्य दलों ने नई शिक्षा नीति के मसौदे में त्रिभाषा फार्मूले का जबरदस्त विरोध किया था और आरोप लगाया था कि यह हिंदी भाषा थोपने जैसा है। संशोधित मसौदा जारी होने पर उन्होंने केंद्र के फैसले का स्वागत किया है। यहां यह बता दें कि संशोधित शिक्षा नीति के मसौदे में हिंदी की अनिवार्यता का कहीं जिक्र नहीं है। संशोधित मसौदे में कहा गया है कि जो छात्र पढ़ाई जाने वाली तीन भाषाओं में से एक या अधिक भाषा बदलना चाहते हैं। वे ग्रेड 6 या ग्रेड 7 में ऐसा कर सकते हैं। 

जब वे तीन भाषाओं में माध्यमिक स्कूल के दौरान बोर्ड परीक्षा में दक्षता प्रदर्शित कर पाते हैं। इससे पहले के मसौदे में समिति ने गैर हिंदी प्रदेशों मेें हिंदी की शिक्षा को अनिवार्य बनाने का सुझाव दिया था। केंद्रीय मानव संसाधन विकास मंत्री रमेश पोखरियाल निशंक ने स्पष्ट किया था कि किसी प्रदेश पर कोई भाषा थोपी नहीं जाएगी। यहां यह उल्लेखनीय है कि दिग्गज द्रविड़ नेता और पार्टी के संस्थापक सीएन अन्नादुरई के नेतृत्व में 1967 में सत्ता में आने के बाद 1968 से राज्य में तमिल और अंग्रेजी का द्विभाषी फार्मूला चल रहा है। तमिलनाडु में हिंदी थोपने का हमेशा से विरोध रहा है। साल 1965 में जब हिंदी को भारत की एकमात्र आधिकारिक भाषा बनाने का प्रस्ताव आया तो राज्य में हिंसक विरोध हुआ। ऑस्कर पुरस्कार से सम्मानित संगीतकार एआर रहमान ने केंद्र सरकार के इस फैसले का स्वागत किया है। 

उन्होंने ट्वीट कर कहा कि हिंदी तमिलनाडु में अनिवार्य नहीं होगी। नीति के मसौदे को सही कर अच्छा किया। पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने कहा कि क्षेत्रीय भाषाओं को प्राथमिकता मिलनी चाहिए। उनका कहना था कि लोगों को भाषा के प्रयोग को लेकर चयन की स्वतंत्रता होनी चाहिए। उनका यह भी कहना है कि प्रत्येक राज्य का एक विशिष्ट चरित्र और भिन्न भाषा है। क्षेत्रीय भाषाओं को प्राथमिकता मिलनी चाहिए मेरा पूरा समर्थन क्षेत्रीय भाषाओं के लिए है। अब हिंदी की अनिवार्यता को खत्म करने का स्वागत किया गया है।
 



 

यहां क्लिक करें : हर पल अपडेट रहने के लिए डाउनलोड करें, समाचार जगत मोबाइल एप। हिन्दी चटपटी एवं रोचक खबरों से जुड़े और अन्य अपडेट हासिल करने के लिए हमें फेसबुक और ट्विटर पर फॉलो करें!



Copyright @ 2019 Samachar Jagat, Jaipur. All Right Reserved.