प्रधानमंत्री आवास योजना में मकान की लागत बढ़ी

Samachar Jagat | Wednesday, 09 Aug 2017 10:37:15 AM
 प्रधानमंत्री आवास योजना में मकान की लागत बढ़ी

जीएसटी का असर प्रधानमंत्री आवास योजना पर भी पड़ा है। आवासीय योजना के तहत निर्माण की लागत में प्रति आवास करीब दो से ढ़ाई हजार रुपए की बढ़ोतरी होने का अनुमान सरकारी आकलन में लगाया गया है। सरकार के सभी विभागों में इस तरह का आकलन करके विभिन्न योजनाओं पर खर्च का खाका नए सिरे से तैयार हो रहा है। ग्रामीण विकास मंत्रालय ने मंत्रालय के तहत आने वाली योजनाओं प्रधानमंत्री आवास योजना ग्रामीण, प्रधानमंत्री ग्राम सडक़ योजना और मनरेगा के तहत लागत का आकलन कराया है। सभी योजनाओं में थोड़ा बहुत अंतर पाया गया है। ग्रामीण विकास मंत्रालय के अनुसार जीएसटी की वजह से वस्तुओं पर लगने वाले कर दरों में परिवर्तन आया है। कुछ वस्तुओं पर कर दरें बढ़ी है, तो कुछ में कमी आई है। 

इसकी वजह से लागत का फिर से आकलन करना पड़ा है। आवास योजना के तहत सभी जरूरी वस्तुओं पर जीएसटी दर का आकलन अलग-अलग करके समग्र मूल्यांकन कराया गया है। ईंट पर छह प्रतिशत की जगह जीएसटी के बाद 12 प्रतिशत कर हो गया है। सीमेंट पर 30 की जगह 28 फीसदी पत्थर पर 27.5 की जगह 28 फीसदी कर की दरें हो गई है। ग्रामीण विकास मंत्रालय के  अनुसार सभी वस्तुओं पर कर की दरों को जोड़ने के बाद यह अंतर ढ़ाई से तीन हजार रुपए के बीच पाया गया। यहां यह बता दें कि आवास योजना के तहत एक लाभार्थी को एक लाख बीस हजार रुपए दिए जाने है। इनमें केंद्र और राज्य का अनुपात 60 और 40 प्रतिशत का है।

इसके अलावा 12 हजार रुपए शौचालय बनाने के लिए दिए जा रहे हैं। मनरेगा के मद से 18 हजार रुपए पारिश्रमिक के लिए आवास योजना में दिए जा रहे हैं। उज्जवला योजना के तहत गैस और केंद्र की विद्युत योजना के तहत बिजली कनेक्शन भी दिया जा रहा है। इस बारे में किए गए आकलन के अनुसार 2500 करोड़ रुपए की अतिरिक्त जरूरत पड़ेगी। अभी तक 70 लाख के करीब आवास स्वीकृत किए जा चुके हैं। राज्य अपने मद में होने वाली बढ़ोतरी की भरपाई केंद्र से करने की मांग करेंगे। केंद्र को भी अपना बजट पुनर्निधारित करना पड़ेगा। पूरी योजना पर दो से ढ़ाई हजार करोड़ रुपए अतिरिक्त चाहिए होंगे। प्रधानमंत्री आवास ग्रामीण योजना में दिसंबर 2018 तक एक करोड़ मकान बनाने का लक्ष्य रखा गया है। करीब एक लाख आवास बनाए जा चुके हैं।

 

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