यदि मन का नहीं हुआ है, तो ऐसा और अच्छे के लिए हुआ है

Samachar Jagat | Friday, 17 Aug 2018 10:19:10 AM
If the mind has not happened, then it has happened for the better

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हर कोई कह देता है कि मन का होता है तो अच्छा और यदि मन का नहीं हुआ तो और भी अच्छा इसमें निश्चित रूप से बहुत सार छिपा हुआ है। यदि व्यक्ति के मन के अनुसार नहीं हुआ है तो श्रीप्रभु उसे और अच्छा मौका देना चाहते हैं कुछ और अच्छा करने के लिए। इसका एक अर्थ यह भी निकल कर आता है कि जो हुआ सो अच्छा हुआ इसकी सार्थकता सिद्ध करने के लिए एक पुरानी कहानी है। एक बार एक राजा की कुछ करते हुए एक उंगली कट गई। 

राजा यह देखकर बहुत दुखी हुआ, लेकिन उसके मंत्री ने कहा कि जो हुआ सो अच्छा हुआ। अपने मंत्री से ऐसा सुनकर राजा को बड़ा क्रोध आया और उस मंत्री को जेल में डलवा दिया। महीने भर बाद राजा कुछ दरबारियों को लेकर जंगल में आखेट खेलने गया। राजा इधर-उधर अपने घोड़े को दौड़ाता रहा, लेकिन वह कोई शिकार नहीं कर सका। और इसी चक्कर में उसके सारे दरबारी भी बिछुड़ गए।

 संध्या गहराने लगी, राजा चिन्तित हुआ। तभी राजा को कुछ जंगली लोग ढोल-नंगाड़े बजाते हुए, सामने आते हुए दिखाई दिए। जब उन्होंने इस तरह अकेले घूमते हुए राजा को देखा तो उसे पकड़ लिया। उस कबीले में रोज एक व्यक्ति की बलि देने की प्रथा थी। राजा को निर्धारित स्थान पर बलि के लिए ले जाया गया। बलि की सभी तैयारियां हो चुकी थी, राजा को अपनी मृत्यु साफ दिखाई दे रही थी।

तभी अचानक किसी की नजर राजा की कटी हुई उंगली पर पड़ी और वह जोर से चिल्लाया ठहरो! ठहरो! यह व्यक्ति अंग-भंग वाला है और अंग-भंग वाले व्यक्ति की बलि नहीं ली जाती है। राजा को तुरंत छोड़ दिया गया। जैसे-तैसे करके राजा अपने दरबार में पहुंचा और सबसे पहले जेल में डाले हुए अपने मंत्री को बुलवाया और उसे न केवल धन्यवाद दिया बल्कि खूब उपहार भी दिए। लेकिन राजा ने उससे पूछा कि मेरी उंगली कटी तो यह अच्छा हुआ लेकिन आपका जेल में डाला जाना कैसे अच्छा हुआ। राजा से ऐसा सुनकर मंत्री बोला- ‘हे राजन! यह भी अच्छा ही हुआ।’ क्योंकि आप मुझे जेल में नहीं डालते तो मुझे भी आप अपने साथ ले जाते और चूंकि आपका अंग-भंग था, इसलिए आप बच गए, लेकिन वे लोग मुझे बलि के लिए पकड़ लेते क्योंकि मैं अंग-भंग नहीं था। अब तो राजा ने उस मंत्री को अपना प्रधान सलाहकार रख लिया और अपने आपसे कहा कि जो होता है वह अच्छा ही होता है।

मित्रो, आप बहुतों को यह कहते हुए सुनते हैं कि हाय, मेरी ट्रेन छूट गई, बस छूट गई लेकिन उसी को फिर से यह भी कहते हुए सुनते हो कि अरे वाह! मेरे लिए उस दिन यह बस छूट जाना अच्छा हुआ क्योंकि वह रास्ते में ही दुर्घटना ग्रस्त हो गई थी और सारे यात्री मारे गए थे। रोजाना जीवन में ऐसी बहुत सारी घटनाएं घटती रहती हैं और हम लोग उनको लेकर बहुत अधिक पश्चयाताप करने लगते हैं। जबकि सच्चाई यह होती है कि सब कुछ आज तक वैसा नहीं हुआ है जैसा कि व्यक्ति चाहता है और होता वही है जो खुदा मंजुरे होता है। कुल मिलाकर अच्छे और अच्छे के लिए होता है।

 एक व्यक्ति ने एक शानदार भूखण्ड देखा, उसको वह भूखण्ड बहुत पसंद आया। सब कुछ तय हो गया लेकिन ऐनवक्त पर विक्रेता किसी काम से बाहर चला गया। कुछ दिनों बाद में उस व्यक्ति को मालूम पड़ा कि उस प्लाट के सारे दस्तावेज फर्जी थे। यह मानव स्वभाव ही होता है कि वह अपनी छोटी-छोटी इच्छाओं के पूरा नहीं होने पर दुखी हो जाता है, परेशान हो उठता है और अपना सब कुछ लुटा मान बैठता है जबकि होता ठीक इसके विपरीत है क्योंकि श्रीप्रभु कुछ और ही चाहता है इसलिए कभी भी किसी भी स्थिति-परिस्थिति में अपना धैर्य नहीं खोएं अपनी हर इच्छा के पूर्ण नहीं होने पर क्योंकि केवल इच्छाएं पूरी नहीं होती हैं इच्छाओं के पीछे धैर्य-शौर्य और सद्भाव भी साथ हो।

प्रेरणा बिन्दु:- 
आशा के दीप जलाने आए हैं
सोए हुए विश्वास को जगाने आए हैं
कौन कहता है कि समस्याओं के समाधान नहीं होते
मन के न होने को और अच्छा करने आए हैं।

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