कैश में कारोबार पर जुर्माना और डिजिटल लेन देन में गलत वसूली

Samachar Jagat | Thursday, 14 Mar 2019 05:09:50 PM
Incorrect recovery in the fine on cash in the cash and digital transaction

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एक राजस्थानी कहावत प्रचलित है ‘जिसकी अंटी में हो रूपल्ली उसकी रोही में भी चली’ जिसका सीधा सा अर्थ है जिसकी जेब नकदी रुपए हो, उसकी जंगल में भी चलती है। इसी से मिलती जुलती एक और कहावत है, जो कि नकदी के महत्व को दर्शाती है, ‘नकद न्याणा बिंद परणिजे काणा’ जिसका अर्थ है कि जिसके पास नकदी हो, उसका दूल्हा भले ही एक आंख वाला हो, उसकी शादी ठाट से होती है। एक ओर जहां नकदी का इतना महत्व दर्शाया गया है, वहीं आज इससे बिल्कुल उलट हो रहा है, सरकार का आयकर  विभाग नोटबंदी के बाद कैश यानी नकदी में कारोबार के लिए बने नए नियमों के उल्लंघन के मामले में कई बड़े अस्पतालों और लग्जरी बांड पर कार्रवाई का अभियान चलाकर जुर्माना वसूल रहा है।


 जिन कंपनियों ने एक दिन में 2 लाख रुपए से ज्यादा नकद में कारोबार किया है, उन पर कार्रवाई कर रहा है। आयकर विभाग निर्धारित सीमा से ज्यादा नकदी में कारोबार पर आयकर कानून का उल्लंघन मानता है। आयकर विभाग के सूत्रों के मुताबिक पिछले साल जनवरी से मार्च महीने में आयकर विभाग ने खास मुहीम चलाकर कैश में काला कारोबार करने वालों के खिलाफ छापेमारी की थी। इस दौरान छापेमारी में आयकर विभाग के अधिकारियों ने कैश की सीमा उल्लंघन 1705 मामले पकड़े थे। इन सभी मामलों में आयकर कानून की धारा-269 एसटी का उल्लंघन किया गया था।


 आयकर विभाग ने इस मामले में 45 करोड़ रुपए जुर्माने की राशि की वसूल ली है। यह छापेमारी आयकर विभाग ने राजधानी दिल्ली, मुंबई, पुणे, गुवाहाटी, कोलकाता, चेन्नई, लखनऊ जैसे शहरों में की थी। इनमें अपोलो और मुंबई के लीलावटी जैसे नामी अस्पताल शामिल थे। वहीं हार्ले डेविड्सन, बैंकीज, फ्रांस के मशहूर ब्रांड लूई वोटॉन जैसे बड़े ब्रांडों के शोरूम में छापेमारी की गई थी। यही नहीं आयकर विभाग के अधिकारियों पर भी आजकल अंतरिम बजट में संशोधित किए गए रेवेन्यू टारगेट का लक्ष्य हासिल करने को लेकर दबाव में है। आलम यह है कि शनिवार, रविवार और सार्वजनिक छुट्टियों में भी ये अधिकारी लक्ष्य हासिल करने में जुटे हुए हैं। सीबीडीटी चेयरमैन का पद संभालने के बाद पीसी मोदी ने विभाग के अधिकारियों को भी इस मोर्चे में इजाफा करने के निर्देश दिए हैं। यहां यह बता दें कि नोटबंदी के बाद आयकर कैश कारोबार की आड़ में होने वाले काले कारोबार पर लगाम लगाने के मकसद से सरकार ने इस पर प्रति व्यक्ति प्रति लेन देन 2 लाख रुपए से कम रखने की सीमा लगाई थी। इससे ज्यादा लेन देन कैश में करने पर आयकर एक्ट के तहत कार्रवाई का प्रावधान किया गया था। एक ओर जहां नकद कारोबार में सीमा से अधिक लेन देन को लेकर आयकर विभाग कार्रवाई कर रहा है, वहीं डिजिटल लेन देन में बैंकों ने अवैध वसूली की है, और सरचार्ज के नाम पर गलत वसूली कर रहे हैं। 

इस मामले में रिजर्व बैंक ने जांच शुरू कर दी है। रिजर्व बैंक को कुछ बैंकों के खिलाफ गलत तरीके से डिजिटल लेन देन के नाम पर सरचार्ज वसूलने वालों की जानकारी मिली है। मामला करीब 200 करोड़ रुपए की अतिरिक्त वसूली का है। आईआईटी बॉम्बे की तरफ से डिजिटल लेन देन पर तैयार की गई एक रिपोर्ट में ये खुलासा हुआ है कि बैंकों ने इन ट्रांजेक्शन पर पेमेंट सरचार्ज लगाकर साल 2018 में 200 करोड़ रुपए की अतिरिक्त वसूली की है। इसे लेकर रिजर्व बैंक बेहद गंभीर है। सूत्रों के अनुसार जांच में दोषी पाए जाने पर बैंक रेग्युलेशन एक्ट के तहत एक करोड़ रुपए का जुर्माना लगाया जा सकता है। 

साथ ही रिजर्व बैंक के पेमेंट एंड सेटेलमेंट सिस्टम एक्ट के तहत भी कार्रवाई की जा सकती है। रिपोर्ट में बताया गया है कि दिल्ली में यूपीआई के जरिए बिजली बिल भरने वालों को बिल की रकम से एक फीसदी ज्यादा कीमत चुकानी पड़ रही है। मुंबई में टाटा पावर के ग्राहकों का बिजली बिल दो हजार रुपए से ज्यादा और दिल्ली में 5 हजार रुपए से ज्यादा होने पर जीएसटी लगाकर 0.7 फीसदी सरचार्ज देना पड़ता है, जबकि आईआरसीटीसी से टिकट बुक करते समय यूपीआई से दो हजार रुपए से ज्यादा के पेमेंट पर जीएसटी के साथ अतिरिक्त 10 रुपए देने पड़ रहे हैं। 

भारतीय रिजर्व बैंक ने 8 मार्च को ही स्विफ्ट प्रणाली से जुड़े नियमों के उल्लंघन के मामले में कुल 36 बैंकों पर 71 करोड़ रुपए का जुर्माना लगाया है। स्विफ्ट एक वैश्विक संदेश साफ्टवेयर है, जिसका इस्तेमाल वित्तीय इकाइयों के लेन देन में किया जाता है। हीरा कारोबारी नीरव मोदी और मेहुल चौकसी ने इसी प्रणाली का दुरूपयोग करके पीएनबी के साथ 14 हजार करोड़ की धोखाधड़ी को अंजाम दिया था।

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