समुद्री जल स्तर में तेजी से हो रही है बढ़ोतरी

Samachar Jagat | Tuesday, 11 Jun 2019 03:07:33 PM
Increase in seawater level is increasing

जलवायु परिवर्तन के कारण समुद्री जल स्तर में तेजी से बढ़ोतरी हो रही है। एक अध्ययन के अनुसार इस सदी के अंत तक समुद्र का जल स्तर दो मीटर तक यानी 6.6 फीट तक बढ़ जाएगा। अगर जलवायु परिवर्तन को नहीं रोका गया तो समुद्र के जल स्तर बढ़ने से न्यूयार्क और शंघाई जैसे शहर डूब जाएंगे। इससे करीब 187 करोड़ लोग बेघर हो जाएंगे। इस बारे में किए गए शोध में कहा गया है कि समुद्र के जल स्तर में पूर्व के अनुमानों से कहीं ज्यादा तेजी से बढ़ोतरी हो रही है। शोधकर्ताओं के अनुसार ग्रीनलैंड और अंटार्कटिका में तेजी से पिघल रही बर्फ की परतों के कारण यह वृद्धि संभव है। अंतरराष्ट्रीय विशेषज्ञों का दावा है कि अगर भयावह स्थितियों में दुनिया का तापमान 5 डिग्री सेल्सियस तक बढ़ जाता है, तो सन् 2100 तक समुद्र के जल स्तर में 6.6 फीट का इजाफा हो जाएगा।

यह यूएन क्लाईमेट पैनल द्वारा लगाए गए अनुमान से ज्यादा है। शोधकर्ताओं के अनुसार यह स्थिति भीषण आपदा का कारण बन सकती है। यूनिवर्सिटी ऑफ ब्रिस्टल के एक शोधकर्ता का कहना है कि यह स्थिति बेहद भयावह है। समुद्र के जल स्तर में 2 मीटर की बढ़ोतरी काफी चिंताजनक है। उनका कहना है कि समुद्र का जल स्तर बढ़ने से तटीय इलाकों में रहने वाले लोगों पर विस्थापन का खतरा मंडराएगा। उनके बेघर हो जाने से एक बड़ी सामाजिक समस्या खड़ी हो सकती है। साथ ही प्रशांत क्षेत्र में मौजूद छोटे-छोटे द्वीपों के डूबने से वह रहने लायक नहीं बचेंगे और वहां के लोग दर-दर भटकने को मजबूर हो सकते हैं।

शोधकर्ताओं समुद्र का जल स्तर बढ़ने 1.79 मिलियन वर्ग किलोमीटर तक की जमीन समुद्र में समा जाएगी। यह आकार कैलिफोर्निया शहर का तीन गुना है। इससे दुनिया भर में 187 करोड़ लोग विस्थापित होने को मजबूर हो जाएंगे। यह संख्या दुनिया की कुल जनसंख्या का काफी बड़ा हिस्सा है। शोधकर्ताओं के अनुसार सबसे खराब स्थिति की संभावना सिर्फ 5 फीसदी है। लेकिन इसे अनदेखा नहीं किया जा सकता। शोधकर्ताओं के अनुसार समुद्र का जल स्तर 2 मीटर तक बढ़ने की संभावना है। इस चिंताजनक स्थिति को अनदेखा नहीं किया जा सकता है। ग्रीनलैंड और अंटार्कटिका की बर्फ पूर्व अनुमानों से कहीं तेजी से पिघल रही है।

उनका कहना है कि इस समस्या को दूर करने के लिए इंसानों के पास बहुत ज्यादा मौका और समय नहीं बचा है। ऐसे में जल्दी कोई कदम उठाने की जरूरत है। शोधकर्ताओं का कहना है कि इस मुद्दे को लेकर वैश्विक और राजनीतिक रूप से हम अगले 10 सालों में जो भी कदम उठाएंगे उसी पर हमारे ग्रह का भविष्य निर्भर होगा और भविष्य के जलवायु का निर्माण होगा। 2013 में यूनाइटेड नेशंस क्लाईमेट पैनल की रिपोर्ट में अनुमान लगाया गया था कि 2100 तक समुद्र के जल स्तर में 52 से 98 सेंटीमीटर की बढ़ोतरी होगी। लेकिन वैज्ञानिकों का कहना है कि संयुक्त राष्ट्र की रिपोर्ट वर्तमान परिस्थितियों को ध्यान में रखकर नहीं बनाई गई है। वैज्ञानिकों ने चिंता जताई है कि वर्तमान में बर्फ के पिघलने का पता लगाने वाली तकनीक में खामिया है।

जिनकी वजह से समुद्र के जल स्तर में बढ़ोतरी का सही अनुमान लगाना थोड़ा मुश्किल है। ग्रीनलैंड, अंटार्कटिका की पिघलने वाली बर्फ के बारे में पता लगाने के लिए वैज्ञानिकों ने 22 विशेषज्ञों को जांच करने का जिम्मा सौंपा था, जिससे बर्फ के पिघलने के मॉडल के बारे में ज्यादा जानकारी प्राप्त की जा सके। वैज्ञानिकों का कहना है कि अभी भी जलवायु परिवर्तन की समस्या से निपटने के लिए हमारे पास 10 साल का समय है। दौरान अगर हम ग्रीन हाउस गैस के उत्सर्जन में कमी करते हैं तो भयावह स्थिति से निपटा जा सकता है। उनका कहना है कि वैश्विक और राजनीतिक तौर पर अगले 10 सालों में हम जो भी निर्णय लेंगे, उससे हमारी पृथ्वी की जलवायु का निर्धारण होगा। यह शोध यूएस नेशनल अकादमी ऑफ साइंसेस की पत्रिका में प्रकाशित किया गया है।



 

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